मप्र के ई-टेंडरिंग घोटाले में 8,935.61 करोड़ की गड़बड़ी : कांग्रेस
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Nov 2018 6:14 PM (IST)
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इंदौर : मध्यप्रदेश के ई-टेंडरिंग घोटाले में 8,935.61 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों के जरिये सूबे की सत्ता में आने पर वह कथित भ्रष्टाचार के इस बहुस्तरीय मामले की जांच करायेगी . कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला […]
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इंदौर : मध्यप्रदेश के ई-टेंडरिंग घोटाले में 8,935.61 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों के जरिये सूबे की सत्ता में आने पर वह कथित भ्रष्टाचार के इस बहुस्तरीय मामले की जांच करायेगी .
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने यहां संवाददाताओं से कहा, "हमारे पास प्रदेश में ई-टेंडरिंग के उस घोटाले के दस्तावेज हैं जिसके तहत अलग-अलग निजी कम्पनियों को सिंचाई विभाग और अन्य महकमों की अहम परियोजनाओं के कुल 8,935.61 करोड़ रुपये के ठेके दिये गये. पहली नजर में लगता है कि ई-टेंडरिंग घोटाले की शुरूआत वर्ष 2014 से हुई थी." उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने ई-टेंडरिंग के लिये एक निजी कम्पनी से सॉफ्टवेयर तैयार कराया था.
आरोप है कि इस सॉफ्टवेयर से छेड़-छाड़ कर चुनिंदा कम्पनियों की पूर्व में लगायी गयीं ऑनलाइन बोलियां ऐन मौके पर घटा दी गयीं जिसके जरिये उन्हें बड़े सरकारी ठेके देकर उपकृत किया गया. सुरजेवाला ने दावा किया कि निजी कम्पनियों और सरकारी तंत्र की कथित मिलीभगत वाले ई-टेंडरिंग घोटाले का आंकड़ा जांच होने पर 50,000 करोड़ रुपये के पार जा सकता है. सुरजेवाला ने कहा कि ई-टेंडरिंग घोटाले में राज्य की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह की भूमिका भी संदेह के घेरे में है.
इसलिये कांग्रेस को डर है कि मामले से जुड़ी कम्प्यूटर हार्ड डिस्क और अन्य सबूत नष्ट किये जा सकते हैं. उन्होंने ई-टेंडरिंग घोटाले को "सरकारी संसाधनों की संगठित लूट" करार देते हुए कहा कि सूबे की सत्ता में आने पर कांग्रेस "जन आयोग" गठित कर इस मामले की जांच करायेगी.
प्रदेश में शासकीय परिसरों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं को प्रतिबंधित करने के कांग्रेस के चुनावी वादे के बारे में भाजपा की कड़ी आपत्ति पर सुरजेवाला ने कहा, "हमारे मुताबिक अगर एक राजनीतिक संगठन (संघ) को सरकारी दफ्तरों के इस्तेमाल की सुविधा दी गयी, तो कांग्रेस, वाम दलों और अन्य सियासी पार्टियों से जुड़े संगठनों को भी इसी तरह की अनुमति देनी पड़ेगी जो बिल्कुल उचित नहीं होगा."
दसाल्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक ट्रैपर द्वारा राफेल सौदे को "साफ-सुथरा" बताये जाने पर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, "दसाल्ट और नरेंद्र मोदी सरकार एक-दूसरे की पीठ थपथपाने का खेल खेल रहे हैं. लेकिन इन हथकंडों से राफेल घोटाले पर परदा नहीं डाला जा सकता.
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