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राकेश अस्थाना की नियुक्ति को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला 28 को

Updated at : 24 Nov 2017 7:54 PM (IST)
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राकेश अस्थाना की नियुक्ति को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला 28 को

नयी दिल्ली : सुप्रीमकाेर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी राकेश अस्थाना की केंद्रीय जांच ब्यूरो में विशेष निदेशक पद पर नियुक्ति को चुनौती देनेवाली याचिका पर 28 नवंबर को फैसला सुनाया जायेगा. न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल और न्यायमूर्ति एएम सप्रे की पीठ के समक्ष केंद्र ने इस नियुक्ति को चुनौती देनेवाली याचिका का […]

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नयी दिल्ली : सुप्रीमकाेर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी राकेश अस्थाना की केंद्रीय जांच ब्यूरो में विशेष निदेशक पद पर नियुक्ति को चुनौती देनेवाली याचिका पर 28 नवंबर को फैसला सुनाया जायेगा. न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल और न्यायमूर्ति एएम सप्रे की पीठ के समक्ष केंद्र ने इस नियुक्ति को चुनौती देनेवाली याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अस्थाना का शानदार करियर रहा है और उन्होंने कोयला घोटाला, किंगफिशर एयरलाइन, आगस्ता वेस्टलैंड घोटाला, काला धन और धन शोधन जैसे सनसनीखेज मामलों की जांच की निगरानी की है.

गैर सरकारी संगठन कामन काॅज के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि अस्थाना की नियुक्ति गैरकानूनी है, क्योंकि स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड के कार्यालयों और दूसरे परिसरों पर मारे गये आय कर विभाग के छापों में मिली डायरी में उनका नाम सामने आया है. केंद्र की ओर से अटाॅर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और गैर सरकारी संगठन की ओर से प्रशांत भूषण की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा कि इस पर 28 नवंबर को फैसला सुनाया जायेगा.

भूषण के अनुसार कंपनी के यहां से मिली डायरी में अस्थाना का गैरकानूनी तरीके से धन लेना दर्शाया गया है और जांच ब्यूरो ने हाल ही में धन शोधन मामले में आरोपी कंपनी और कुछ लोक सेवकों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की थी. वेणुगोपाल ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जांच ब्यूरो ने प्राथमिकी में उनके नाम का जिक्र नहीं किया है और अस्थाना का शानदार करियर रहा है. अस्थाना, जो पहले जांच ब्यूरो में अतिरिक्त निदेशक के पद पर कार्यरत थे, 11 मंडलों का कामकाज देख रहे थे.

उन्होंने चयन समिति की बैठक की कार्यवाही का विवरण पढ़ते हुए कहा कि चयनसमिति ने नोट पर विचार किया और जांच ब्यूरो के निदेशक के साथ भी इस पर चर्चा की थी. इस तथ्य के मद्देनजर कि ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि उसमें जिस व्यक्ति के नाम का जिक्र है उसी के नाम पर नियुक्ति के लिए विचार हो रहा है ओर इस दस्तावेज के विवरण की सत्यता के बारे में भी कुछ नहीं है. वेणुगोपाल ने कहा कि समिति ने इस तथ्य पर भी विचार किया कि जांच एजेंसी ने ही पहले विशेष निदेशक के पद के लिए अस्थाना के नाम का प्रस्ताव किया था और इसीलिए इस अधिकारी के नाम की पद के लिए सिफारिश करने का फैसला किया गया.

दूसरी ओर, भूषण का कहना था कि सूचना के अधिकार के तहत इस बैठक का विवरण उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि अस्थाना के अधीन केंद्रीय जांच ब्यूरो स्वतंत्र और निर्भय होकर काम नहीं कर सकेगा क्योंकि इस अधिकारी की पुत्री का विवाह आरोपी कंपनी के मालिक के विशाल फार्महाउस में हुआ था.

वेणुगोपाल ने कहा कि आयकर छापे में बरामद डायरी सहित अनेक गोपनीय दस्तावेज पहले ही जनहित याचिका के साथ दायर किये जा चुके हैं और मैं उम्मीद करता हूं कि यह डायरी सूचना के अधिकार के तहत नहीं मिली होगी. भूषण ने कहा कि हाल ही में उन्हें पता चला है कि अस्थाना का बेटा भी आरोपी फर्म में काम करता है और इसलिए उनके अधीन जांच ब्यूरो इस आरोपी कंपनी के खिलाफ जांच नहीं कर पायेगी जिस पर 5000 करोड़ रुपये की अनियमिततायें करने का आरोप है.

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