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भारतनेट का दूसरा चरण शुरू, सभी ग्राम पंचायतों को ब्राडबैंड से जोड़ने का लक्ष्य

Updated at : 13 Nov 2017 7:24 PM (IST)
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भारतनेट का दूसरा चरण शुरू, सभी ग्राम पंचायतों को ब्राडबैंड से जोड़ने का लक्ष्य

नयी दिल्ली : भारतनेट परियोजना का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हुआ जिसका परिव्यय 31,000 करोड़रुपये है. इस परियोजना के तहत मार्च 2019 तक देश की सभी ग्राम पंचायतों तक हाई स्पीडवाला ब्राडबैंड उपलब्ध करवाना है. दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा, आइटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर तथा बिहार के उप […]

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नयी दिल्ली : भारतनेट परियोजना का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हुआ जिसका परिव्यय 31,000 करोड़रुपये है. इस परियोजना के तहत मार्च 2019 तक देश की सभी ग्राम पंचायतों तक हाई स्पीडवाला ब्राडबैंड उपलब्ध करवाना है. दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा, आइटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर तथा बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने यहां एक कार्यक्रम में इसकी शुरुआत की घोषणा की.

मुकेश अंबानी की अगुवाइवाली रिलायंस जियो ने 30,000 ग्राम पंचायतों को ब्राडबैंड सेवाएं प्रदान करने के लिए 13 करोड़ रुपये का सर्वाधिक अग्रिम ग्राहकी शुल्क चुकाया है. कंपनी ने सरकार से हर पंचायत में बैंडविड्थ खरीदने की प्रतिबद्धता जतायी है. रिलायंस जियो के निदेशक महेंद्र नाहटा ने उक्त राशि का चेक सिन्हा को सौंपा. इस अवसर पर उन्होंने कहा, हमने भारतनेट से बैंडविड्थ खरीदने के लिए जीएसटी सहित 13 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है. शुरू में हम 30,000 ग्राम पंचायतों को कवर करेंगे तथा आगे चलकर हर पंचायत में एक नोड स्थापित करेंगे.

भारती एयरटेल ने 30,500 ग्राम पंचायतों के लिए बैंडविड्थ खरीद हेतु पांच करोड़ रुपये, जबकि वोडाफोन ने 11 लाख रपये व आइडिया सेल्यूलर ने पांच लाख रुपये का भुगतान किया है. सिन्हा ने कहा कि सरकार ने भारतनेट परियोजना के तहत बैंडविड्थ की कीमत 75 प्रतिशत तक कम की है जिससे दूरसंचार कंपनियों को किफायती दरों पर सेवाएं उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी.

मंत्री ने कहा कि भारतनेट का पहला चरण साल के आखिर तक पूरा कर लिया जायेगा. सिन्हा ने कहा, 48,000 से अधिक गांवों में ब्राडबैंड सेवाएं पहले ही शुरू की जा चुकी है, जबकि 75,000 से अधिक गांव इस सेवा के लिए तैयार हैं. उल्लेखनीय है कि पहले इस परियोजना को नेशनल आॅप्टिक्ल फाइबर नेटवर्क के नाम से जाना जाता था जिसे अक्तूबर 2011 में पिछली सरकार ने मंजूरी दी थी. मौजूदा सरकार ने इसका नाम भारतनेट कर दिया था, इसमें गति लाने के लिए कई बदलावों को मंजूरी दी. सरकार को उम्मीद है कि 42,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ समूची भारतनेट परियोजना को मार्च 2019 तक पूरा कर लिया जायेगा.

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