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आरुषि हत्याकांड: जानें क्या है तलवार दंपती का सपना

Updated at : 13 Oct 2017 11:33 AM (IST)
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आरुषि हत्याकांड: जानें क्या है तलवार दंपती का सपना

डासना (गाजियाबाद) : पुत्री आरुषि और घरेलू सहायक हेमराज की हत्या के मामले में बरी हुए दंत चिकित्सक दंपती राजेश और नुपूर तलवार को जेल की चार दीवारी से भी जल्द ही मुक्ति मिल जाएगी, बस जेल अधिकारियों को अदालत का आदेश प्राप्त होने की देर है. जेलर ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. इस […]

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डासना (गाजियाबाद) : पुत्री आरुषि और घरेलू सहायक हेमराज की हत्या के मामले में बरी हुए दंत चिकित्सक दंपती राजेश और नुपूर तलवार को जेल की चार दीवारी से भी जल्द ही मुक्ति मिल जाएगी, बस जेल अधिकारियों को अदालत का आदेश प्राप्त होने की देर है. जेलर ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. इस दोहरे हत्याकांड के सिलसिले में सीबीआइ अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद तलवार दंपती नवंबर 2013 से डासना जेल में बंद हैं.

आरुषि-हेमराज हत्याकांड : नौ साल बाद भी वही सवाल, आरुषि व हेमराज की हत्या किसने की

डासना जेल के अधीक्षक दधिराम मौर्य ने यहां संवाददाताओं को बताया, हमें अदालत का आदेश अभी प्राप्त नहीं हुआ है. आदेश मिलने के बाद हम उन्हें रिहा कर देंगे. उन्होंने बताया कि कैदी को जेल से रिहा करने की प्रक्रिया को पूरा करने के दो तरीके हैं. या तो इलाहाबाद उच्च न्यायालय अपने आदेश की प्रति सीधे जेल अधिकारियों को भेजे या फिर इसे संबद्ध सीबीआइ अदालत के जरिए भेजा जाए जिसने उन्हें उम्र कैद की सजा सुनायी थी.

डासना जेल के तत्कालीन अधीक्षक डॉ. वीरेश राज ने दैनिक जागरण से बातचीत के क्रम में बताया कि तलवार दंपती जेल से रिहा होने के बाद बच्चों के लिए आरुषि का संग्रहालय खोलना चाहते थे. इस बात का जिक्र उन्होंने तत्कालीन जेल प्रशासन से भी किया था. वीरेश राज की मानें तो, इस संग्रहालय के माध्यम से वह आरुषि को हमेशा जिंदा रखना चाहते हैं. संग्रहालय में आरुषि के खिलौने, कपड़े, किताब, फोटो व अन्य सामान रखा जाना था.

आपको बता दें कि गुरुवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तलवार दंपती को मामले में बरी कर दिया था. अदालत ने कहा था कि उपलब्ध साक्ष्य और हालात दोनों ही उन्हें दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. गाजियाबाद की सीबीआइ अदालत ने 28 नवंबर 2013 को तलवार दंपती को उम्रकैद की सजा सुनायी थी. कल आये इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले ने नौ वर्ष बाद तलवार दंपती को बड़ी राहत दी है.

बहरहाल, तलवार दंपती को बरी किए जाने के साथ ही एक बार फिर यह सवाल उठता है कि आखिर 14 वर्षीय आरुषि और 45 वर्षीय हेमराज की हत्या किसने की है? न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति एके मिश्रा की पीठ ने तलवार दंपती की अपील पर सीबीआइ अदालत का आदेश निरस्त करते हुए कहा, इस बात की मजबूत संभावना है कि घटना को किसी बाहरी व्यक्ति ने अंजाम दिया है.

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