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यशवंत ने अब कश्मीर मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा, बोले, भारत ने घाटी के लोगों को भावनात्मक तौर पर खो दिया

Updated at : 01 Oct 2017 9:08 PM (IST)
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यशवंत ने अब कश्मीर मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा, बोले, भारत ने घाटी के लोगों को भावनात्मक तौर पर खो दिया

नयी दिल्ली : देश की अर्थव्यवस्था की बदहाली पर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को घेरने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने अब कश्मीर के मुद्दे पर मोदी सरकार को निशाने पर लिया है. सिन्हा ने कहा है कि भारत ने घाटी के लोगों को भावनात्मक तौर पर खो दिया है. खबरिया […]

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नयी दिल्ली : देश की अर्थव्यवस्था की बदहाली पर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को घेरने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने अब कश्मीर के मुद्दे पर मोदी सरकार को निशाने पर लिया है. सिन्हा ने कहा है कि भारत ने घाटी के लोगों को भावनात्मक तौर पर खो दिया है.

खबरिया वेबसाइट दि वायर को दिए एक इंटरव्यू में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने जानेमाने पत्रकार करण थापर के सवालों के जवाब दिए. सिन्हा से उनके उस आलेख के बारे में भी पूछा गया जिसमें उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था की बदहाली का मुद्दा उठाया था और फिर भाजपा को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था. सिन्हा ने मुद्रा बैंक जैसी सरकारी योजनाओं और विभिन्न सुधारों की सफलता को बढ़ा-चढ़ाकर किए जा रहे दावे करार दिया.

भाजपा नेता ने कहा, मैं जम्मू-कश्मीर में बडे पैमाने पर लोगों के अलगाव को देख रहा हूं. यह ऐसी चीज है जो मुझे बहुत कचोटती है. हमने उन लोगों को भावनात्मक तौर पर खो दिया है. आपको यह समझने के लिए घाटी का दौरा करना पड़ेगा कि उनका हम पर भरोसा नहीं रहा.
सिन्हा एक नागरिक समाज संगठन कंसर्न्ड सिटिजंस ग्रुप (सीसीजी) का नेतृत्व करते हैं, जिसने हाल के समय में कई बार घाटी का दौरा किया है और विभिन्न पक्षों से संवाद किया है ताकि दशकों पुराने कश्मीर मुद्दे का स्थायी समाधान तलाशा जा सके. सीसीजी में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत) ए पी शाह, मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त जूलियो रिबेरो, पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला, खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व प्रमुख ए एस दुलत, जानीमानी समाज सेविका अरुणा रॉय और मशहूर लेखक एवं इतिहासकर रामचंद्र गुहा सहित कई अन्य गणमान्य लोग शामिल हैं.
सिन्हा ने दावा किया कि उन्होंने 10 महीने पहले कश्मीर मुद्दे पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का वक्त मांगा था, लेकिन उन्हें दुख है कि मिलने का समय नहीं मिल सका.
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, मैं दुखी हूं. मैं निश्चित तौर पर दुखी हूं. आप मिलने का समय मांगते हैं, 10 महीने बीत गए. मैं आपको बता दूं कि जब से मैं सार्वजनिक जीवन में आया हूं, राजीव गांधी से लेकर भारत के किसी प्रधानमंत्री ने मुझे मिलने का वक्त देने से मना नहीं किया. किसी प्रधानमंत्री ने यशवंत सिन्हा को नहीं कहा कि मेरे पास आपके लिए वक्त नहीं है.
उन्होंने कहा, और यह मेरे अपने प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया. ऐसे में यदि कोई मुझे फोन करे और कहे कि कृपया मेरे पास आएं, तो माफ करें, वक्त निकल चुका है. मुझसे बुरा बर्ताव किया गया. सिन्हा ने जेटली की इस टिप्पणी के लिए भी उन्हें निशाने पर लिया कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्हें वित्त मंत्री के पद से हटाकर विदेश मंत्री बनाना पदावनति थी.
सिन्हा ने कहा, जेटली यह कैसे कह सकते हैं कि वित्त से हटाकर विदेश मंत्रालय देना मेरे लिए पदावनति थी ? क्या जेटली जी यह कहना चाहते हैं कि मौजूदा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पूरी तरह महत्वहीन प्रभार संभाल रही हैं ? कोई इस पर यकीन नहीं करने वाला.
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