UP News: निलंबित शिक्षक भी दूसरे जिलों में तबादले के लिए कर सकेंगे आवेदन, हाईकोर्ट के फैसले से सरकार को राहत

यूपी में इस वर्ष सरकार की तबादला नीति के तहत उन शिक्षकों को भी लाभ मिल सकेगा, जो वर्तमान में किसी वजह से निलंबित चल रहे हैं. ऐसे शिक्षक भी तबादले के लिए आवेदन कर सकेंगे. हालांकि उन्हें अपने खिलाफ जांच पूरी होने तक इंतजार करना पड़ेगा.
Lucknow: यूपी में इस वर्ष तबादला नीति के तहत निलंबित परिषदीय शिक्षकों को भी एक जनपद से दूसरे जिले में तबादले का लाभ मिलेगा. इस संबंध में बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल ने अपने आदेश में स्थिति स्पष्ट कर दी है. उन्होंने इसे लेकर सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजा है.
इसमें कहा गया है कि यूपी में वर्तमान में निलंबित शिक्षकों को अंतर्जनपदीय स्थानांतरण प्रक्रिया में आवेदन करने से वंचित नहीं किया जाएगा. यदि उन्हें स्थानांतरण का लाभ मिलता है तो उनके विरुद्ध प्रचलित अनुशासनात्मक कार्यवाही समाप्त होने के बाद कार्यमुक्त किया जाएगा.
इसके साथ ही ऐसे शिक्षक जिनकी सेवाएं समाप्त हो गई हैं. लेकिन, कोर्ट के आदेश पर कार्यभार ग्रहण कराया गया है और प्रकरण कोर्ट में विचाराधीन हैं, उनकी सेवाएं कोर्ट के अंतिम निर्णय के पूर्व नियमित नहीं मानी जाएंगी. ऐसे शिक्षकों के ऑनलाइन आवेदन मान्य नहीं होंगे. खास बात है कि शिक्षकों को 9 प्रकार के असाध्य और गंभीर रोग होने पर ही 20 अंक का भारांक मिलेगा. इसके साथ ही आसाध्य रोगी और शादी के पूर्व अंतर्जनपदीय तबादले का लाभ चुके शिक्षक की तबादला नीति का लाभ ले सकेंगे.
सचिव ने यह भी साफ किया है कि पति पत्नी के एक जनपद में सरकारी सेवक होने पर अंतर्जनपदीय तबादले के लिए 10 अंक का भारांक नहीं मिलेगा. पिछली बार तबादले में पति-पत्नी के एक जिले में सरकारी सेवक होने पर उन्हें इसका लाभ मिलता था. इस वर्ष इसमें बदलाव कर दिया गया है.
इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तबादलों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को राहत दी है. हाईकोर्ट ने बेसिक स्कूलों में तैनात शिक्षकों के तबादला के लिए जारी शासनादेश को सही ठहराया है. कोर्ट ने शिक्षकों की याचिका को खारिज भी किया है. प्रदेश सरकार के द्वारा शासनादेश 2 जून 2023 को जारी किया गया था.
हाईकोर्ट ने कहा है कि तबादलों की मांग शिक्षक अधिकार के रूप में नहीं कर सकते हैं. हाईकोर्ट ने कहा कि बेसिक एजुकेशन बोर्ड द्वारा ट्रांसफर को लेकर बनाई गई नीति में सही फैसला किया गया है. नीति में किसी भी तरह की कमी या त्रुटि नहीं है. जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा व जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह आदेश एक याची कुलभूषण मिश्रा साथ ही अन्य की याचिका को लेकर पारित किया है. इसमें 2 जून 2023 को जारी शासन के आदेश के क्लाज नंबर 1 और 15 को चुनौती दी गई थी और 6 जून 2023 को जो सर्कुलर जारी किया गया था उसको भी चुनौती दी गयी थी.
याची शिक्षकों की मांग थी कि तबादला नीति में पांच वर्ष की सेवा की अनिवार्यता रद्द हो. इसके अलावा यूपी बेसिक शिक्षा टीचर सेवा नियमावली 1981 के नियम 21 के अनुसार बने प्रावधानों के तहत तबादला हों. हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया.
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लेखक के बारे में
By Sanjay Singh
working in media since 2003. specialization in political stories, documentary script, feature writing.
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