यूपी निकाय चुनाव: मायावती आज पदाधिकारियों के साथ करेंगी मंथन, शाइस्ता परवीन का बसपा में सियासी भविष्य होगा तय!

यूपी निकाय चुनाव: शाइस्ता परवीन ने जनवरी में प्रयागराज में बसपा की सदस्यता ग्रहण की थी. अतीक के दबदबे और स्थानीय समीकरण को देखते हुए शाइस्ता को मेयर उम्मीदवार के तौर पर भी पेश किया गया. इसके बाद माना जा रहा था कि निकाय चुनाव की लड़ाई रोचक होगी. हालांकि उमेश पाल हत्याकांड के बाद सारे समीकरण बदल गए.
Lucknow: यूपी में निकाय चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं. सत्तारूढ़ दल भाजपा सहित विपक्ष उम्मीदवारों के नाम तय करने में जुट गया है. इसी कड़ी में बसपा सुप्रीमो मायावती रविवार को राजधानी लखनऊ में प्रदेश पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगी. इस बैठक में निकाय चुनाव को लेकर वह पार्टी नेताओं के साथ मंथन करेंगी. इस दौरान पार्टी के मेयर प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा होगी.
इस बैठक में प्रयागराज में उमेश पाल हत्याकांड में नामजद शाइस्ता परवीन को लेकर भी कोई निर्णय किया जा सकता है. दरअसल, प्रयागराज में उमेश पाल की हत्या के बाद से शाइस्ता परवीन को लेकर पार्टी के भीतर ही सवाल उठ रहे हैं. बीते दिनों पार्टी के कुछ लोगों के जरिए शाइस्ता परवीन का टिकट काटे जाने की बात कही गई. इसके बाद ये मामला और सुर्खियों में आ गया. अब रविवार को इस मामले में मायावती बैठक में कोई निर्णय कर सकती हैं.
माफिया अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन ने इस वर्ष जनवरी में प्रयागराज में बसपा की सदस्यता ग्रहण की थी. अतीक के दबदबे और स्थानीय समीकरण को देखते हुए शाइस्ता परवीन को प्रयागराज के मेयर उम्मीदवार के तौर पर भी पेश किया गया. इसके बाद माना जा रहा था कि निकाय चुनाव की लड़ाई रोचक होगी. हालांकि उमेश पाल हत्याकांड के बाद सारे समीकरण बदल गए.
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इस हत्याकांड में अतीक अहमद के परिवार को नामजद किया गया. शाइस्ता परवीन का नाम भी एफआईआर में शामिल किया गया. शाइस्ता शुरुआत में अपने परिवार के बेगुनाह होन की बात करती रहीं. लेकिन, बाद में वीडियो फुटेज में वह स्वयं अतीक के गुर्गों के साथ नजर आई. इसके बाद स्थानीय स्तर पर बसपा में भी शाइस्ता के विरोध में आवाज उठने लगी. हालांकि पार्टी सुप्रीमो मायावती ने शाइस्ता को पार्टी से नहीं निकाला. अभी तक आधिकारिक तौर पर शाइस्ता को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया है.
इससे पहले मायावती ने कहा था कि शाइस्ता परवीन के दोषी पाए जाने पर उनको निष्कासित किया जाएगा. मायावती ने इस मामले को प्रदेश की कानून व्यवस्था से भी जोड़ा. वहीं पार्टी के राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर आकाश आनंद ने खुशी दुबे और शाइस्ता परवीन का नाम लेकर आरोप लगाया कि अपराध खत्म करने के नाम पर लोगों के परिजनों को परेशान किया जा रहा है. अब पुलिस की अभी तक की जांच पड़ताल में साफ हो चुका है कि उमेश पाल हत्याकांड के शूटर शाइस्ता परवीन के संपर्क में थे.
इसके साथ ही शाइस्ता परवीन वर्तमान में फरार अपराधी है. ऐसे में मेयर पद के लिए शाइस्ता के उम्मीदवार होेने पर अन्य दलों को बसपा पर निशाना साधने का आसान मौका मिल सकता है. अतीक अहमद को उमेश पाल अपहरण कांड में सजा सुनाए जाने के बाद भी स्थानीय समीकरण प्रभावित हुए हैं. इन परिस्थितियों में माना जा रहा है कि आज शाइस्ता को लेकर पार्टी की ओर से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है.
ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है, क्योंकि प्रयागराज के बसपा जोनल इंचार्ज ने बयान दिया कि शाइस्ता परवीन मेयर पद की उम्मीदवार नहीं हैं. वहीं, जिलाध्यक्ष के मुताबिक शाइस्ता परवीन को महापौर की संभावित प्रत्याशी के तौर पर लाया गया था. इस बारे में निर्णय पार्टी सुप्रीमो को ही करना है.
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लेखक के बारे में
By Sanjay Singh
working in media since 2003. specialization in political stories, documentary script, feature writing.
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