UP Budget Session 2023: अखिलेश यादव के बगल में बैठेंगे चाचा शिवपाल, इन्हें मिली आजम खान की सीट

अखिलेश यादव ने विधानसभा में चाचा को बगल की सीट देकर सरकार पर जोरदार हमला करने की रणनीति बनाई है. विधानमंडल का बजट सत्र 20 फरवरी से आयोजित किया जाएगा. इसमें सपा योगी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की तैयारी में जुटी है. शिवपाल यादव पहले से ही भाजपा सरकार पर हमलावर बने हुए हैं.
Lucknow: मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में जीत के बाद सैफई कुनबा एकजुट होने का लगातार संदेश दे रहा है. पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जहां चाचा शिवपाल यादव को राष्ट्रीय महासचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी है, वहीं अब विधानसभा में उनकी सीट भी बदल दी गई है. शिवपाल यादव को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव के साथ बैठेंगे.
शिवपाल यादव की सीट बदलने के लिए मुख्य सचेतक डॉ. मनोज पांडेय ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंप दिया है. विधानसभा में अभी तक नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव के बगल में पूर्व मंत्री अवधेश प्रसाद बैठते थे. शिवपाल सिंह यादव की सीट दूसरी पंक्ति में विधायक रविदास मेहरोत्रा के बगल में थी. इसी पंक्ति में आजम खां भी बैठते थे. अब आजम खां सदन के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में उनकी सीट पर अवधेश प्रसाद बैठेंगे. अवधेश प्रसाद की सीट पर शिवपाल सिंह यादव बैठेंगे.
मुख्य सचेतक डॉ. मनोज पांडेय ने बताया कि आजम खां की सीट अवधेश प्रसाद और नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव के बगल वाली अवधेश प्रसाद की सीट को शिवपाल सिंह यादव को अलॉट करने संबंधी पत्र विधानसभा अध्यक्ष को भेज दिया गया है.
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उत्तर प्रदेश विधानमंडल का बजट सत्र 20 फरवरी से आयोजित किया जाएगा. पहले दिन विधानमंडल के संयुक्त सत्र में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का अभिभाषण होगा. शोक प्रस्ताव के बाद सदन स्थगित हो जाएगा. वहीं 22 फरवरी को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना सदन में बजट प्रस्तुत करेंगे. यह योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा बजट होगा. बजट पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी योगी सरकार को कानपुर देहात सहित विभिन्न मुद्दों पर घेरने की तैयारी में जुटी है.
शिवपाल यादव पहले से ही भाजपा सरकार पर हमलावर बने हुए हैं. ऐसे में अखिलेश यादव ने चाचा को बगल में सीट देकर सरकार पर जोरदार हमला करने की रणनीति बनाई है. हालांकि अखिलेश यादव इससे पहले भी शिवपाल यादव की कुर्सी बदलने को लेकर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को पत्र लिख चुके हैं.
तकनीकी कारणों से तब इस बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी गई, क्योंकि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के प्रमुख होने के बावजूद शिवपाल यादव सपा के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. इसलिए उन्हें अलग से सीट देने से इनकार कर दिया गया था. लेकिन, अब चाचा भतीजे के एक होने के साथ ही प्रसपा (लोहिया) का सपा में विलय हो चुका है.
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लेखक के बारे में
By Sanjay Singh
working in media since 2003. specialization in political stories, documentary script, feature writing.
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