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Madhubani News : श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से की मां चंद्रघंटा की पूजा

Updated at : 24 Sep 2025 10:47 PM (IST)
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Madhubani News : श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से की मां चंद्रघंटा की पूजा

शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्गा मंदिरों में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ नवरात्र के तीसरे दिन बुधवार को मां दुर्गा के तीसरे स्वरुप मां चंद्रघंटा की पूजा की गयी.

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मधुबनी.

शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्गा मंदिरों में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ नवरात्र के तीसरे दिन बुधवार को मां दुर्गा के तीसरे स्वरुप मां चंद्रघंटा की पूजा की गयी. सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव एवं मां दुर्गा को मनाने के लिए निष्ठा, पवित्रता और स्वक्षता का विशेष ध्यान रखा गया. नवरात्र के तीसरे दिन भक्तों ने मां चंद्रघंटा की पूजा विधि अनुसार की और उन्हें खीर, शहद एवं केसर से बनी मिठाई का भोग लगाया. साथ ही “ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः ” मंत्र का जाप किया. मां चंद्रघंटा की पूजा से बौद्धिक क्षमता का विकास होता है और व्यक्ति में स्पष्ट और उचित निर्णय लेने की क्षमता आती है. चंद्रघंटा की आराधना से मुख, नेत्र व संपूर्ण काया में कांति बढ़ती है.

माता कूष्मांडा की पूजा आज

मां दुर्गा के चौथे स्वरुप मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना गुरुवार को की जाएगी. वेदों के अनुसार मां कूष्मांडा, देवी दुर्गा का चौथा स्वरूप है. माता अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की और सभी प्रकार के अंधकार का नाश किया. वह सूर्य मंडल में निवास करती हैं और सभी प्रकार की सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं. जब सृष्टि में केवल अंधकार था, तब उन्होंने अपनी हास्य-ऊर्जा से ब्रह्मांड की रचना की और सूर्य को नियंत्रित किया. उन्हें ब्रह्मांड की निर्माता और सूर्यमंडल के मध्य निवास करने वाली माना जाता है. मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों के प्रति शक्ति और साहस के लिए पूजा की जाती है. जबकि दस महाविद्या पूजा तंत्र-साधना से जुड़ी दिव्य स्त्री ऊर्जा की दस अभिव्यक्तियां हैं, जिनकी उपासना से धन-धान्य, मोक्ष, और सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है. मां कूष्मांडा के मंत्र की ””””वैज्ञानिकता”””” का अर्थ उनके द्वारा ब्रह्मांड के सृजन और ऊर्जा के स्रोत होने के आध्यात्मिक और दार्शनिक विचार से जुड़ा है. यह मंत्र आध्यात्मिक शक्ति और चेतना के विकास में सहायता करते हैं. इससे साधक को रोग, कष्ट और शोक से मुक्ति मिलती है. वैज्ञानिक रूप से, मंत्रोच्चार से उत्पन्न होने वाली ध्वनि तरंगें मन को शांत करती हैं और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती हैं. पंडित पंकज झा शास्त्री ने कहा कि मंत्र एक पवित्र शब्द, ध्वनि या वाक्य होता है. इसे आध्यात्मिक शक्ति से युक्त माना जाता है और इसका उपयोग ध्यान, प्रार्थना या आध्यात्मिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए किया जाता है. यह संस्कृत के मूल “मन ” (सोचना) और “त्र ” (साधन) से बना है. इसका अर्थ है “मन का साधन “. मंत्रों के कई प्रकार होते हैं, जैसे वैदिक मंत्र, तांत्रिक मंत्र और शाबर मंत्र, और इन्हें जप के माध्यम से मन को शांत करने, ऊर्जा को केंद्रित करने और उच्च चेतना से जुड़ने के लिए दोहराया जाता है. मां कूष्मांडा को पीला और हरा रंग बहुत प्रिय है, इसलिए उन्हें चढ़ाने के लिए पीले और हरे रंग के फूल सबसे उपयुक्त माना जाता हैं. इन फूलों में पीले कमल और गेंदे के फूल चढ़ाना विशेष शुभ होता है. मां के प्रसन्न होने और सभी मनोकामनाओं को शीघ्र पूरा करने में सहायक होता है. पंडित पंकज झा शास्त्री ने बताया कि मां कुष्मांडा को प्रसन्न करने के लिए नवरात्र के चौथे दिन मालपुआ, बताशे और पेठा का भोग लगाना चाहिए. नवरात्र में चौंसठ योगिनियों का महत्व देवी शक्ति के आध्यात्मिक स्वरूप के रूप में है, जिन्हें प्रसन्न करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें अलौकिक शक्ति प्राप्त होती है. स्कंद देव के अनुसार, अश्वयुज मास के शुक्ल पक्ष से शुरू होने वाले नौ दिनों तक इनकी पूजा करने से मनुष्य को अपने अनुकूल मनोकामना पूरी करने में सहायक होता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GAJENDRA KUMAR

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