ePaper

मन और विचारों में शुद्धता लाना ही उत्तम शौच धर्म

Updated at : 31 Aug 2025 10:32 PM (IST)
विज्ञापन
मन और विचारों में शुद्धता लाना ही उत्तम शौच धर्म

पर्यूषण पर्व के चौथे दिन श्रीजी का अभिषेक, शांति धारा, धर्म चर्चा और महाआरती हुई

विज्ञापन

हजारीबाग. पर्यूषण पर्व के चौथे दिन रविवार को उत्तम शौच धर्म मनाया गया. संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के संघ की ब्रह्मचारिणी बहन संपदा दीदी ने बताया कि उत्तम शौच धर्म का अर्थ बाहरी शुद्धता से कहीं बढ़कर आंतरिक शुद्धता और पवित्रता है. यह धर्म मन में, विचारों में और शुद्धता लाने की बात करता है. अपनी जरूरत और इच्छाओं के बीच के अंतर को समझें. पर्व को लेकर सुबह दोनों मंदिरों में श्रावकों की चहल-पहल लगी रही. बच्चों का उत्साह देखने लायक था. प्रातः श्रीजी का अभिषेक शांति धारा, धर्म चर्चा के साथ इस पर्व की शुरुआत हुई. पूजन विधान में बैठने वाली 24 सौभाग्यवती महिलाओं के पतियों ने विश्व, राष्ट्र, समाज के सुख, शांति, समृद्धि एवं कल्याण के लिए शांति धारा की. संध्या में महाआरती के साथ आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के चित्र का अनावरण समाज के वरिष्ठ श्रावकों ने किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
SUNIL PRASAD

लेखक के बारे में

By SUNIL PRASAD

SUNIL PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola