ब्राउन ब्रेड है व्हाइट ब्रेड से बेहतर

Updated at : 23 Apr 2015 11:49 AM (IST)
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ब्राउन ब्रेड है व्हाइट ब्रेड से बेहतर

हमलोग रोज किसी-ना-किसी रूप में ब्रेड का प्रयोग करते हैं. बाजार में मुख्यत: दो प्रकार के ब्रेड देखने को मिलते हैं – व्हाइट और ब्राउन ब्रेड. अधिकतर लोगों को इनमें मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी नहीं होती है. जानिए ब्राउन ब्रेड क्यों है हेल्दी ऑप्शन. साबूत अनाज से बने व्यंजन न सिर्फ पोषक तत्वों से […]

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हमलोग रोज किसी-ना-किसी रूप में ब्रेड का प्रयोग करते हैं. बाजार में मुख्यत: दो प्रकार के ब्रेड देखने को मिलते हैं – व्हाइट और ब्राउन ब्रेड. अधिकतर लोगों को इनमें मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी नहीं होती है. जानिए ब्राउन ब्रेड क्यों है हेल्दी ऑप्शन.

साबूत अनाज से बने व्यंजन न सिर्फ पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, बल्कि ये स्वादिष्ट भी हैं. यही बात उनसे बने ब्रेडों पर भी लागू होती है. इनसे बने ब्रेड में दूसरे किसी भी प्रकार से बने ब्रेड से अधिक पौष्टिकता होती है. ब्राउन ब्रेड बनाने के लिए अनाज के मोटे आटे का प्रयोग किया जाता है, जिससे वे ब्रेड बनने के बाद प्राकृतिक रूप से भूरे रंग के हो जाते हैं. यहां जानिए इससे होनेवाले फायदे.

पोषक तत्व : गेहूं के मोटे आटे से बने ब्राउन ब्रेड में व्हाइट ब्रेड की तुलना में अधिक पोषक तत्व होते हैं. इसमें फाइबर अधिक होने से ये स्वास्थ्य के लिए भी कई प्रकार से फायदेमंद होते हैं. इसमें विटामिन बी-6 और इ, मैगAीशियम, फोलिक एसिड, जिंक, कॉपर और मैंगनीज भी काफी मात्र में होता है. लेकिन यहां यह भी ध्यान देनेवाली बात है कि व्हाइट ब्रेड में फाइबर भले ही कम हो, लेकिन इसमें कैल्शियम अधिक होता है.

निर्माण विधि : व्हाइट ब्रेड बनाने के दौरान कंपनियां ब्रेड को साफ रंग देने के लिए गेहूं के छिलके को पूरी तरह से हटा देती हैं. इसे पूरी तरह सफेद बनाने के लिए इसे ब्लीच किया जाता है. इस कार्य के लिए पोटैशियम ब्रोमेट, बेंजोइल पेरॉक्साइड और क्लोरीन डाइ ऑक्साइड का प्रयोग किया जाता है. ये ऐसे केमिकल हैं जिनका अधिक डोज लेने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो जाती हैं. इस स्थिति में भी यदि देखा जाये, तो ब्राउन ब्रेड में किसी केमिकल का प्रयोग नहीं होता इससे भी वे स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद हैं.

कैलोरी काउंट : व्हाइट ब्रेड में अतिरिक्त शूगर का प्रयोग होता है. इसी कारण इनमें ब्राउन ब्रेड के मुकाबले अधिक कैलोरी होती है. यदि आप व्हाइट ब्रेड को डायट में शामिल भी करते हैं, तो एक दिन में एक या दो स्लाइस से अधिक न खाएं अन्यथा इसे अधिक खाने से वजन बढ़ सकता है.

लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स : वैसे फूड जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स लो होता है, वे ब्लड शूगर लेवल को बढ़ने नहीं देते हैं. ब्राउन ब्रेड का ग्लाइसेमिक इंडेक्स व्हाइट ब्रेड की तुलना में काफी कम होता है. इसका अर्थ यह है कि ब्राउन ब्रेड खाने से आपके ब्लड शूगर लेवल पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा. ऐसे में इसे खानेवाले लोगों में डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोगों का खतरा काफी कम होता है. अत: डायबिटीज रोगी भी इसे खा सकते हैं.

इन बातों का रखें ध्यान

इस बात को ध्यान रखने की जरूरत है कि सभी ब्राउन ब्रेड 100} गेहूं के आटे से नहीं बने होते हैं. पोषक तत्वों से भरपूर ब्रेड पाने के लिए इसे खरीदने से पहले इसके पैकेट पर लिखे इसके घटकों के बारे में अवश्य पढ़ लें. उसमें सबसे पहले यह अवश्य जानें कि इसमें साबूत गेहूं है या नहीं. यदि उसमें ‘एनरिच्ड’ लिखा हो, तो इसका अर्थ यह है कि इसमें मैदे का प्रयोग किया गया है.

यदि इन्ग्रेडिएंट्स में कारमेल के प्रयोग का भी जिक्र है, तो इसका अर्थ यह है कि इसमें रंग मिला कर इसे कृत्रिम रूप से ब्राउन बनाया गया है.

यदि आप हेल्दी ब्रेड खरीदना चाहते हैं, तो इसका सबसे आसान उपाय यह है कि जिसके इन्ग्रेडिएंट्स सबसे कम होंगे, वही ब्रेड सबसे हेल्दी होगा.

सुमिता कुमारी

डायटीशियन

डायबिटीज एंड ओबेसिटी

केयर सेंटर, पटना

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