हेड इंजरी : लापरवाही बन सकती है जानलेवा : डॉ के श्रीधर

Updated at : 17 Apr 2015 11:38 AM (IST)
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हेड इंजरी : लापरवाही बन सकती है जानलेवा : डॉ के श्रीधर

देश में हर साल लगभग 20 लाख लोगों के मस्तिष्क या सिर में लगी चोटों (हेड इंजरीज) के मामले सामने आते हैं. केवल जरा सी लापरवाही होने के कारण इनमें से आधी जिंदगियां समाप्त हो जाती हैं. अगर कुछ सजगताओं पर अमल किया जाए, तो समय रहते पीड़ित व्यक्ति की जान बचायी जा सकती है. […]

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देश में हर साल लगभग 20 लाख लोगों के मस्तिष्क या सिर में लगी चोटों (हेड इंजरीज) के मामले सामने आते हैं. केवल जरा सी लापरवाही होने के कारण इनमें से आधी जिंदगियां समाप्त हो जाती हैं. अगर कुछ सजगताओं पर अमल किया जाए, तो समय रहते पीड़ित व्यक्ति की जान बचायी जा सकती है.
ब्रेन और स्पाइन के जटिल समस्याओं का समाधान करने वाले चेन्नई ग्लोबल हॉस्पिटल के सुप्रसिद्ध न्यूरो एवं स्पाइन सजर्न डॉ के श्रीधर ने ये बातें कही. उन्होंने कहा कि मस्तिष्क या सिर में चोट लगने से मस्तिष्क और खोपड़ी (स्कल) को क्षति या आघात पहुंच सकता है. हेड इंजरी होने पर मस्तिष्क से रक्तस्राव, बेहोशी और यहां तक कि मौत भी हो सकती है.
खोपड़ी और चेहरा समेत सिर, मस्तिष्क को सुरक्षा प्रदान करता है. हड्डियों से सुरक्षा प्रदान करने के अलावा मस्तिष्क सख्त रेशेदार परतों से ढका रहता है और इसके चारों ओर तरल पदार्थ होता है. डॉ श्रीधर ने समझाया कि सिर में जब कोई चोट लगती है तब यह जरूरी नहीं कि उस चोट के निशान स्कल व खोपड़ी पर दिखायी ही दें. बावजूद इसके मस्तिष्क के कार्यो को क्षति पहुंच सकती है. सिर पर चोट लगने पर मस्तिष्क प्रत्यक्ष रूप से चोटिल हो सकता है या खोपड़ी की भीतरी दीवार के चोटिल होने के कारण इसका मस्तिष्क के कार्यों पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है. मस्तिष्क में आघात के कारण मस्तिष्क के आसपास के भागों में रक्तस्राव होने की संभावना होती है.
अब तक पांच हजार से भी अधिक ब्रेन टय़ूमर और स्पाइन का ऑपरेशन करने वाले डॉ के श्रीधर महानगर के स्पाइन डायग्नोस्टिक्स के आमंत्रण पर सिर्फ दो दिनों के लिए जटिल रोगों का इलाज करने कोलकाता आए हुए थे. हिंदी, बांग्ला, इंगलिश आदि कई भाषाओं के जानकार डॉ श्रीधर रोगी की समस्याओं को उसकी ही भाषा में समझकर उसका समाधान करते हैं.
श्रीलंका का एक छह वर्षीय बालक जो स्पाइन रोग से ग्रसित था, देश-विदेश में उसके माता-पिता बच्चे को लेकर घूम रहे थे. कहीं भी उसके बचने का आश्वासन नहीं मिला. अंत में वे डॉ के श्रीधर से मिले. उन्होंने उस बच्चे का जटिल ऑपरेशन करके उसे एक नई जिंदगी दी. बच्च अब पूरी तरह से स्वस्थ एवं अपने माता-पिता के साथ खुश है.
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