गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में ज्यादातर महिलाओं को उल्टी आती है, पर दो प्रतिशत महिलाओं में यह परेशानी काफी अधिक होती है. इस समस्या के कारण पानी और अन्न का एक दाना भी नहीं पचता है. लगातार उल्टी के कारण खून में कीटोन की मात्रा बढ़ जाती है और वजन में भी गिरावट आने लगती है, जो जच्चा व बच्चा के लिए खतरनाक साबित होती है.
करीब दो वर्ष पहले मेरे क्लिनिक में एक महिला आयी, जिसकी उम्र 28 वर्ष थी. वह प्रथम बार गर्भवती हुई थी गर्भ का सातवां माह था, उसे उल्टी अधिक होने की शिकायत थी. उसने कई स्त्री रोग विशेषज्ञ से दिखाया, परंतु उसे कोई खास लाभ नहीं मिला. उन्हें कुछ लोगों ने बताया कि गर्भावस्था में होमियोपैथी का इलाज अच्छा होता है और इससे जच्चा-बच्चा को किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं होता है.
सर्वप्रथम मैंने महिला का केस स्टडी किया. महिला ने बताया कि गर्भ के प्रथम माह से ही उसे उल्टी की शिकायत है. हालांकि, उस समय वह हल्का-फुल्का था, लेकिन छठे माह के बाद से उन्हें काफी उल्टियां आने लगीं. कुछ भी खाती-पीती तो, कुछ देर के बाद उसे उल्टी हो जाती थी. इसकी वजह से उन्हें अत्यधिक कमजोरी हो रही थी. भूख भी लगभग समाप्त हो गयी थी. घबराहट एवं चिड़चिड़ापन भी होने लगा था. कमजोरी की वजह से चक्कर आने लगे थे. मैंने महिला को सर्वप्रथम सिमकेरिकारपस रेसीमोसा 200 शक्ति की चार-चार बूंद रोजाना सुबह और रात में लेने को दिया और उसे पुन: चार दिन के बाद मिलने को कहा, महिला ने वैसा ही किया. जब वे मेरे पास आयीं, तो उन्होंने बताया कि अब उल्टी बंद हो गयी है. कभी-कभी हल्का उल्टी जैसा लगता है, लेकिन अब खाना पचने लगा है. कमजोरी अब भी लग रही है. मैंने पुन: सिमकेरिकारपस रेसीमोसा 200 शक्ति की दवा चार बूंद सुबह-रात एक सप्ताह और लेने को दिया. महिला की एक सप्ताह बाद उल्टी की समस्या से ठीक हो गयी और उन्होंने निर्धारित समय से बच्चे को जन्म दिया.
क्यों आती हैं गर्भावस्था में उल्टियां
गर्भावस्था में उल्टी से क्या-क्या दिक्कत होती है, गर्भावस्था के शुरुआती महीने में मितली आना या उल्टी होना सामान्य है. 80-90 प्रतिशत महिलाओं में ऐसे लक्षण दिख सकते हैं, लेकिन एक से दो प्रतिशत महिलाओं में यह परेशानी काफी अधिक हो सकती है. इस समस्या के कारण पानी और अन्न का एक दाना भी नहीं पचता है. इस कारण शरीर में जल व अन्य रसायनों की कमी हो सकती है. जब लगातार उल्टी के कारण खून में कीटोन की मात्रा बढ़ जाये और वजन में पांच प्रतिशत की गिरावट आये तो उस स्थिति को हाइपर एमेसिस ग्राइडेनम कहते हैं. इसके कुछ अन्य लक्षणों में भूख न लगना, घबराहट महसूस करना, चिड़चिड़ापन, मुंह में लार का अधिक बनना, कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्याएं भी हो सकती है. इन लक्षणों के दिखाई देने पर कुछ विशेष जांच हैं, उसे जरूर करा लेना चाहिए. जांच में पेशाब में कीटोन मिल सकता है. रक्त में सोडियम और पोटैशियम की कमी होती है. लिवर में एंजाइम बढ़ जाता है. इसके अलावा यूरिन कल्चर, थायरॉयड टेस्ट एवं अल्ट्रासाउंड भी करा लेना चाहिए.
प्रो (डॉ) राजीव वर्मा
डीएचएमएस, त्रिवेणी होमियो क्लिनिक, चितकोहरा, पटना
मो : 9334253989
