सिंदूर की एक चुटकी में छिपा है सदियों का इतिहास,जानिए इसके पीछे की गहरी मान्यताएं
विवाहित महिलाएं सिंदूर क्यों लगाती हैं (PC: AI Image)
Why Women Wear Sindoor: सिंदूर को सिर्फ सुहाग की निशानी नहीं, बल्कि प्रेम, आस्था और वैवाहिक जीवन के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है. आइए जानते हैं इसके पीछे छिपा सदियों पुराना इतिहास और मान्यताएं.
Why Women Wear Sindoor: भारतीय संस्कृति में कई ऐसी परंपराएं हैं, जो आज भी लोगों की आस्था से जुड़ी हुई हैं. इन्हीं में से एक है शादीशुदा महिलाओं का मांग में सिंदूर लगाना. इसे सिर्फ श्रृंगार का हिस्सा नहीं माना जाता, बल्कि यह प्रेम, विश्वास, सुहाग और वैवाहिक जीवन का प्रतीक भी माना जाता है. अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में सिंदूर का अपना महत्व है. आइए जानते हैं कि आखिर सिंदूर को इतना खास क्यों माना जाता है.
शक्ति और शुभता का प्रतीक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिंदूर का लाल रंग मां शक्ति से जुड़ा माना जाता है. यह साहस, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि मांग में सिंदूर लगाने से देवी पार्वती का आशीर्वाद मिलता है और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.
शादीशुदा होने की पहचान

पहले के समय में शादीशुदा महिलाओं की पहचान उनके श्रृंगार से होती थी. मांग में सिंदूर यह संकेत देता था कि महिला विवाहित है. आज भी भारत के कई हिस्सों में इसे विवाह का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है.
प्रेम और विश्वास का प्रतीक
हिंदू विवाह में दूल्हा जब दुल्हन की मांग में सिंदूर भरता है, तो यह सिर्फ एक रस्म नहीं होती. इसे पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने के वचन का प्रतीक माना जाता है. कई महिलाओं के लिए सिंदूर अपने रिश्ते के प्रति सम्मान और अपनापन जताने का भी एक तरीका है.
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आध्यात्मिक मान्यताओं से भी जुड़ा है सिंदूर
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मांग के जिस स्थान पर सिंदूर लगाया जाता है, उसे आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया है. कुछ परंपराओं में इसे आज्ञा चक्र के पास का स्थान माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि यहां सिंदूर लगाने से मन शांत रहता है और सकारात्मक सोच बनी रहती है. हालांकि, इन मान्यताओं की वैज्ञानिक पुष्टि सीमित है.
अटूट वैवाहिक बंधन का प्रतीक
सिंदूर को पति-पत्नी के अटूट रिश्ते और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह प्रेम, विश्वास, सुख-समृद्धि और लंबे वैवाहिक जीवन की कामना से जुड़ा होता है. यही वजह है कि आज भी कई महिलाएं इस परंपरा को श्रद्धा और सम्मान के साथ निभाती हैं.
हिंदू धर्म में सिंदूर का महत्व
हिंदू परंपरा में सिंदूर सिर्फ लाल रंग का चूर्ण नहीं है. यह आस्था, संस्कृति और वैवाहिक जीवन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है. किसी के लिए यह धार्मिक विश्वास है, तो किसी के लिए अपने जीवनसाथी के प्रति प्रेम और सम्मान जताने का तरीका. समय के साथ लोगों की सोच और पसंद बदल सकती है, लेकिन सिंदूर की यह परंपरा आज भी भारतीय संस्कृति की खास पहचान बनी हुई है.
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लेखक के बारे में
By मेघा रॉय
मेघा रॉय वर्तमान में प्रभात खबर में वीडियो कंटेंट और लाइफस्टाइल राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. इससे पहले वह राजस्थान पत्रिका में फीचर राइटर के रूप में कार्य कर चुकी हैं. उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में ग्रेजुएशन और मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की है. साथ ही, इंडिया न्यूज और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में इंटर्नशिप का अनुभव भी हासिल किया है.उन्हें डिजिटल मीडिया, ट्रेंडिंग न्यूज, लाइफस्टाइल, हेल्थ, ज्योतिष, धर्म और सोशल ट्रेंड्स से जुड़े विषयों पर सरल और रोचक लेख लिखना पसंद है. उनका मानना है कि एक पत्रकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी पाठकों तक सही, सटीक और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना है.
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