जिस साड़ी को कभी रानियां पहनती थीं, उसकी दीवानगी आज भी बरकरार है, जानिए चंदेरी सिल्क की सदियों पुरानी विरासत
चंदेरी सिल्क साड़ी का इतिहास क्या है (PC: Instagram)
Chanderi Saree History: जिस साड़ी को कभी रानियां पहनती थीं, उसकी दीवानगी आज भी बरकरार है. जानिए चंदेरी सिल्क की सदियों पुरानी विरासत.
Chanderi Saree History: मध्य प्रदेश के छोटे-से ऐतिहासिक शहर चंदेरी का नाम लेते ही सबसे पहले जिस चीज का ख्याल आता है, वह है यहां की खूबसूरत चंदेरी सिल्क साड़ी. हल्की बुनावट, महीन कपड़ा और जरी की बारीक कारीगरी इसे दूसरी साड़ियों से अलग पहचान दिलाती है. कभी यह साड़ी राजघरानों और रानियों की शान मानी जाती थी, लेकिन आज इसकी खूबसूरती और शालीनता ने इसे देश ही नहीं, दुनिया भर की महिलाओं की पसंद बना दिया है.
फिल्म 'स्त्री' की वजह से चंदेरी शहर एक बार फिर चर्चा में आया. हालांकि, इस फिल्म का चंदेरी सिल्क साड़ी के इतिहास से कोई सीधा संबंध नहीं है, लेकिन इसने लोगों की दिलचस्पी इस ऐतिहासिक शहर और इसकी समृद्ध हथकरघा परंपरा की ओर जरूर बढ़ाई. आइए जानते हैं कि आखिर चंदेरी सिल्क साड़ी की शुरुआत कैसे हुई और सदियों बाद भी इसकी लोकप्रियता क्यों बरकरार है.
चंदेरी सिल्क साड़ी का इतिहास

चंदेरी सिल्क साड़ी का इतिहास मध्य प्रदेश के चंदेरी शहर से जुड़ा है, जिसकी बुनाई की परंपरा कई सौ साल पुरानी मानी जाती है. इतिहासकारों के अनुसार, यह कला मध्यकाल में तेजी से विकसित हुई और मुगल शासन के दौरान इसे खास पहचान मिली. बाद में सिंधिया राजघराने के संरक्षण ने इस शिल्प को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.
Chanderi Silk Weaving Tradition: कैसे बनी राजघरानों की पहली पसंद
शुरुआत में चंदेरी में बेहद महीन सूती कपड़ा और मलमल बुनी जाती थी. समय के साथ इसमें रेशम और सुनहरी जरी का इस्तेमाल शुरू हुआ, जिससे इसकी खूबसूरती और बढ़ गई. हल्की, मुलायम और शाही लुक वाली इन साड़ियों को राजा-महाराजा और रानियां पहनना पसंद करती थीं.
जापानी सिल्क ने बदली पहचान
1930 के दशक में चंदेरी की बुनाई में जापानी रेशम का इस्तेमाल शुरू हुआ. इसके बाद सूती धागों और सिल्क का अनोखा मेल तैयार किया गया, जिसने आधुनिक चंदेरी सिल्क साड़ी को नया रूप दिया. आज भी इसकी यही खास बुनावट इसे दूसरे हैंडलूम से अलग बनाती है.
आज भी क्यों है इतनी खास

फैशन के बदलते दौर में भी चंदेरी सिल्क साड़ी का आकर्षण कम नहीं हुआ है. शादी, त्योहार और खास मौकों पर यह आज भी महिलाओं की पहली पसंद बनी हुई है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह हल्की होने के बावजूद बेहद रॉयल और एलिगेंट लुक देती है.
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लेखक के बारे में
By मेघा रॉय
मेघा रॉय वर्तमान में प्रभात खबर में वीडियो कंटेंट और लाइफस्टाइल राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. इससे पहले वह राजस्थान पत्रिका में फीचर राइटर के रूप में कार्य कर चुकी हैं. उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में ग्रेजुएशन और मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की है. साथ ही, इंडिया न्यूज और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में इंटर्नशिप का अनुभव भी हासिल किया है.उन्हें डिजिटल मीडिया, ट्रेंडिंग न्यूज, लाइफस्टाइल, हेल्थ, ज्योतिष, धर्म और सोशल ट्रेंड्स से जुड़े विषयों पर सरल और रोचक लेख लिखना पसंद है. उनका मानना है कि एक पत्रकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी पाठकों तक सही, सटीक और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना है.
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