सिर्फ पढ़ाई नहीं, 5 से 10 साल की उम्र में बच्चों को जरूर सिखाएं ये आदतें, जो बनाएंगी उन्हें जिंदगी में सफल और जिम्मेदार

5 से 10 साल के बच्चों को कौन सी आदतें सिखानी चाहिए? AI image
Parenting Tips: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा बड़ा होकर समझदार और जिम्मेदार इंसान बने. लेकिन इसके लिए बचपन से ही कुछ छोटी-छोटी आदतों पर ध्यान देना बहुत जरूरी होता है. 5 से 10 साल की उम्र में सिखाई गई ये बातें बच्चे की पूरी जिंदगी को बेहतर बना सकती हैं.
Parenting Tips: 5 से 10 साल की उम्र किसी भी बच्चे की जिंदगी का सबसे खास समय होता है. इस उम्र में बच्चे जो कुछ भी देखते और सुनते हैं, उसे बहुत ही जल्दी अपने अंदर एब्जॉर्ब कर लेते हैं. इस उम्र में आप अपने बच्चे को जो भी सिखाते हैं, वह बात उसके दिमाग में हमेशा के लिए बैठ जाती है. यही एक बड़ी वजह है कि माता-पिता को इस उम्र में अपने बच्चों को अच्छी चीजें सिखानी चाहिए. जब आप इस उम्र में बच्चे को अच्छी और जरूरी चीजें सिखाते हैं, तो वह बड़ा होकर एक जिम्मेदार, समझदार और अपने पैरों पर खड़ा रहने वाला इंसान बन जाता है. आज का यह आर्टिकल हर उस माता-पिता के लिए है, जिनके घर पर 5 से 10 साल की उम्र के बच्चे हैं. आज हम आपको 5 ऐसी आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें आपको अपने बच्चे के अंदर जितनी जल्दी हो सके डेवलप करना शुरू कर देना चाहिए. तो चलिए इन आदतों के बारे में विस्तार से जानते हैं.

अपने काम खुद करने की आदत
5 से 10 साल के बच्चों को अपने सभी काम खुद करना सीखना चाहिए. इस उम्र के बच्चों के लिए यह बहुत ही जरूरी हो जाता है. अपने काम खुद करना सिखाने के लिए उन्हें समय-समय पर छोटी-छोटी जिम्मेदारियां देते रहें, जैसे खेलने के बाद खिलौनों को सही जगह पर रखना, स्कूल बैग को खुद पैक करके रखना, अपने कपड़ों को संभालकर रखना और खाना खाने के बाद अपनी प्लेट को सही जगह पर रखना. जब आपका बच्चा अपने काम खुद करने लगता है, तो उसके अंदर जिम्मेदारी का अहसास होने लगता है. ऐसा होने से उसका कॉन्फिडेंस बढ़ता है और साथ ही वह आगे चलकर किसी भी प्रॉब्लम को खुद सॉल्व करना सीख जाता है.
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सच बोलने और ईमानदार रहने की आदत
5 से 10 साल के बच्चों को अपने सभी काम खुद करना सीखना चाहिए. इस उम्र के बच्चों के लिए यह बहुत ही जरूरी हो जाता है. अपने काम खुद करना सिखाने के लिए उन्हें समय-समय पर छोटी-छोटी जिम्मेदारियां देते रहें, जैसे खेलने के बाद खिलौनों को सही जगह पर रखना, स्कूल बैग को खुद पैक करके रखना, अपने कपड़ों को संभालकर रखना और खाना खाने के बाद अपनी प्लेट को सही जगह पर रखना. जब आपका बच्चा अपने काम खुद करने लगता है, तो उसके अंदर जिम्मेदारी का अहसास होने लगता है. ऐसा होने से उसका कॉन्फिडेंस बढ़ता है और साथ ही वह आगे चलकर किसी भी प्रॉब्लम को खुद सॉल्व करना सीख जाता है.
मोबाइल और टीवी कम देखने और बाहर खेलने की आदत
आजकल के बच्चे अपने पूरे दिन का ज्यादातर समय मोबाइल, टीवी या फिर टैबलेट का इस्तेमाल करते हुए ही बिता देते हैं. लेकिन जब बच्चे की उम्र 5 से 10 साल के बीच होती है, तो उनकी बॉडी और दिमाग का सही डेवलपमेंट होना बहुत ही जरूरी होता है. बेहतर मेंटल और फिजिकल डेवलपमेंट के लिए बच्चे को हर दिन कम से कम 1 से 2 घंटे बाहर जाकर दोस्तों के साथ खेलने, दौड़ने या फिर साइकिलिंग करने के लिए मोटिवेट करें. इसके अलावा मोबाइल और टीवी देखने का समय भी फिक्स और लिमिट कर दें. इस उम्र के बच्चों के लिए रात को सही समय पर सोने और सुबह जल्दी उठने की आदत भी उनकी सेहत के लिए बहुत अच्छी रहेगी.
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बड़ों की इज्जत करना और दूसरों की मदद करना
अगर आपके बच्चे छोटे हैं, तो पेरेंट्स होने के नाते आपको उन्हें अच्छे मैनर्स यानी कि संस्कार जरूर सिखाने चाहिए. किसी भी पेरेंट की यह सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है. अगर बच्चे की उम्र 5 से 10 साल के बीच है, तो आपको उन्हें यह जरूर सिखाना चाहिए कि घर के बड़ों, टीचर्स और अपने दोस्तों से तमीज से बात कैसे की जाती है. इसके अलावा जब भी जरूरत हो, थैंक यू, प्लीज और सॉरी जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना सिखाएं. छोटे बच्चों के अंदर दूसरों की मदद करने की आदत भी जरूर डालें. जब बच्चा दूसरों के प्रति दयालु बनेगा, तो लोग भी उसे पसंद करेंगे.
अपनी चीजें शेयर करना और पैसों की कद्र करना
छोटे बच्चों को अपनी चीजें दूसरों के साथ शेयर करना यानी कि बांटना जरूर सिखाना चाहिए. जब वे अपने दोस्तों या फिर भाई बहनों के साथ मिलकर खेलते हैं या फिर खाना खाते हैं, तो उनके अंदर प्यार और निस्वार्थ भावना बढ़ने लगती है. इसके अलावा, अपने बच्चों को बचपन से ही पैसों की वैल्यू समझाएं. पैसों की कीमत समझाने के लिए बच्चे को एक छोटी सी गुल्लक यानी कि एक पिगी बैंक लाकर दें. इस पिगी बैंक के अंदर आपका बच्चा अपने पैसों को सेव करके रखेगा. ऐसा करने से उसे यह समझ में आने लगेगा कि चीजें आसानी से नहीं मिलतीं और वह फालतू पैसे खर्च करने से बचेगा.
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लेखक के बारे में
By सौरभ पोद्दार
सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन टॉपिक्स पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की हिंदी में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और SEO-फ्रेंडली होते हैं.
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