Ganga Dussehra 2023: कब मनाया जाएगा गंगा दशहरा, जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

Ganga Dussehra 2023: गंगा दशहरा आने में बस कुछ ही दन बाकी है. गंगा दशहरा, जिसे ‘गंगा अवतार’ के नाम से भी जाना जाता है, देश भर में बड़े उत्साह और आनंद के साथ मनाया जाने वाला एक लोकप्रिय त्योहार है.
Ganga Dussehra 2023: गंगा दशहरा आने में बस कुछ ही दन बाकी है. गंगा दशहरा, जिसे ‘गंगा अवतार’ के नाम से भी जाना जाता है, देश भर में बड़े उत्साह और आनंद के साथ मनाया जाने वाला एक लोकप्रिय त्योहार है. गंगा दशहरा ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दौरान आता है और वर्तमान में मई या जून में पड़ता है. आमतौर पर गंगा दशहरा निर्जला एकादशी से एक दिन पहले मनाया जाता है लेकिन कुछ वर्षों में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी एक ही दिन पड़ सकती है.
इस वर्ष गंगा दशहरा का शुभ अवसर 30 मई, 2023 (मंगलवार) को मनाया जाएगा. द्रिक पंचांग के अनुसार, दशमी तिथि 29 मई को शाम 04:19 बजे शुरू होगी और 30 मई 2023 को शाम 05:37 बजे समाप्त होगी.
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हस्त नक्षत्र समाप्त – 31 मई 2023 को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर
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व्यतिपात योग प्रारंभ – मई 31, 2023 को 01:25 AM से
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व्यतिपात योग समाप्त – 01 जून 2023 को 12:45 AM
गंगा दशहरा एक खुशी का अवसर है जो देवी गंगा को समर्पित है. यह अवसर उस दिन को मनाने के लिए मनाया जाता है जब देवी गंगा भागीरथ के पूर्वजों की शापित आत्माओं को शुद्ध करने के अपने मिशन को पूरा करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं. पृथ्वी पर आने से पहले, देवी गंगा भगवान ब्रह्मा के कमंडल में निवास करती थीं.
द्रिक पंचांग के अनुसार, गंगा दशहरा पर श्रद्धालु पवित्र गंगा नदी की पूजा करते हैं और उसमें स्नान करते हैं. गंगा दशहरा पर दान देना बेहद शुभ माना जाता है. प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, यह माना जाता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा में पवित्र डुबकी लगाने से सभी प्रकार के पाप धुल जाते हैं.
गंगा दशहरा मनाने के लिए श्रद्धालु गंगा नदी में पवित्र डुबकी लगाने के लिए प्रयागराज/इलाहाबाद, गढ़मुक्तेश्वर, हरिद्वार, ऋषिकेश और वाराणसी जाते हैं. गंगा दशहरा का उत्सव वाराणसी शहर में एक अनिवार्य अनुभव है. दशाश्वमेध घाट पर हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान करते हैं और गंगा आरती में भाग लेते हैं.
गंगा दशहरा के शुभ अवसर को मनाने के लिए, भक्तों को सुबह जल्दी उठना चाहिए, गंगा नदी में पवित्र डुबकी लगानी चाहिए और साफ कपड़े पहनने चाहिए. उसके बाद पूजा करने के लिए आवश्यक सभी सामग्री एकत्र की जाती है और भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. अब देवता को अगरबत्ती और फूल चढ़ाएं और पूजा शुरू करें. देवी गंगा और भगवान सूर्य को समर्पित पवित्र मंत्रों का जाप करें और अपने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें.
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By Bimla Kumari
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