World Milk Day 2023 : जमशेदपुर में 5 लाख लीटर दूध की जरूरत, आपूर्ति मात्र साढ़े तीन लाख लीटर

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 26 Nov 2023 12:30 PM

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गव्य विकास विभाग के अधिकारियों की माने, तो भारतीय परिवेश के मुताबिक प्रति दिन प्रति व्यक्ति 240 मिलीलीटर दूध की जरूरत है. इस हिसाब से शहर को प्रति दिन 5 लाख लीटर दूध चाहिए.

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दूध उत्पादन में बड़ी से लेकर छोटी कंपनियों व निजी लोगों के आने के बावजूद अब तक जमशेदपुर शहर व आसपास के इलाकों में रोजाना करीब डेढ़ लाख लीटर दूध की कमी है. गव्य विकास विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले, तो जिले में करीब 20 लाख की आबादी निवास करती है. इस लिहाज से जमशेदपुर में करीब 5 लाख लीटर दूध की रोजाना जरूरत है. लेकिन यहां करीब साढ़े तीन लाख लीटर दूध की ही सप्लाई हो रही है. गव्य विकास विभाग के अधिकारियों की माने, तो भारतीय परिवेश के मुताबिक प्रति दिन प्रति व्यक्ति 240 मिलीलीटर दूध की जरूरत है. इस हिसाब से शहर को प्रति दिन 5 लाख लीटर दूध चाहिए. जमशेदपुर शहर में वर्तमान में सुधा डेयरी, अमूल, आइटीसी, मेधा समेत अन्य कंपनियों की दूध उपलब्ध हैं. इसमें से सबसे अधिक सुधा डेयरी दूध की सप्लाई करती है. सुधा डेयरी में प्रतिदिन करीब 1.50 लाख लीटर, अमूल डेयरी करीब 50 हजार लीटर, मेधा डेयरी करीब 20 हजार लीटर व लोकल स्तर के कारोबारी करीब 85 हजार लीटर दूध की सप्लाई करते हैं.

जिले में दुधारू मवेशियों की स्थिति

पशुपालन विभाग के मुताबिक जिले में उन्नत नस्ल की गायों की कुल संख्या 17379 है. इनमें से 50 से 60 प्रतिशत यानी 10400 ही दुधारू हैं, शेष प्रजनन की प्रक्रिया में हैं. भैंसों की संख्या 24948 है. इनमें से आधी यानी 12500 दुधारू और आधी प्रजनन की प्रक्रिया में हैं. उन्नत नस्ल की गायों से दूध उत्पादन का अनुपात प्रति दिन प्रति गाय 10 लीटर है. इस हिसाब से गायों से रोजाना एक लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है. भैंसों से दूध उत्पादन का अनुपात प्रति दिन प्रति भैंस तीन से चार लीटर है. भैंसों से रोजाना 50 हजार लीटर दूध मिल रहा है.

डेयरी प्लांट का निर्माण शिलान्यास तक ही रह गया सीमित

मानगो के बालीगुमा में डेयरी प्लांट लगाने के लिए राज्य सरकार की ओर से दो बार शिलान्यास किया गया. पहली बार 2012 में झामुमो की सरकार में कृषि मंत्री मथुरा महतो ने जबकि दूसरी बार 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसका शिलान्यास किया था. लेकिन 11 साल हो गये पर पर अब तक इसकी शुरुआत नहीं हो पायी है. आठ एकड़ में प्लांट का निर्माण होना है, पर काम ठप पड़ा हुआ है. इस योजना के तहत करीब 50 हजार लीटर दूध का उत्पादन होना था, जो अभी तक शुरू नहीं हुआ है.

दुधारू पशुओं की खरीद पर 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी

जिले में सरकार द्वारा किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं. मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत आवेदन कर दुधारू पशुओं की खरीद के लिए सब्सिडी प्राप्त कर किसान अपनी आजीविका का अतिरिक्त साधन प्राप्त कर सकते हैं. दुधारू पशु खरीदने पर 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है. इसका लाभ जिले के पशुपालकों को दिया जा रहा है.

जिले में दूध की कमी को दूर करने के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है. यह सही बात है कि दूध की कमी है. इस कमी को पाटने के लिए हर संभव कोशिशें की जा रही हैं.

डॉ सुरेंद्र कुमार, जिला पशुपालन पदाधिकारी, पूर्वी सिंहभूम

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