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Health And Fitness Tips For Women: फिट और हेल्दी रहने के लिए महिलाओं को जरूर करना चाहिए ये काम

By Prabhat Khabar Print Desk
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Health And Fitness Tips For Women
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Health And Fitness Tips For Women: स्वस्थ रहने के लिए वैक्सीनेशन की प्रक्रिया खास भूमिका अदा करती हैं. ये वैक्सीन इम्युनिटी को मजबूत बनाती हैं, जो कई जानलेवा बीमारियों व इन्फेक्शन की गिरफ्त में आने से महिलाओं को बचाती हैं. जरूरी है कि महिलाएं सही समय पर वैक्सीन जरूर लगवा लें और स्वस्थ रहें.

सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होनेवाले कैंसर में प्रमुख है, जो ह्यूमन पेपिलोमाइरस वायरस से फैलता है. वायरस से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन लड़कियों को 9 से 14 वर्ष की उम्र में लगायी जाती है. 9 वर्ष में इस वैक्सीन के 2 डोज 0 और 6 महीने पर दिये जाते हैं, जबकि 14 वर्ष में 0, 1 और 6 महीने पर 3 डोज में लगाये जाते हैं. अगर इस उम्र में वैक्सीन नहीं लगायी गयी हों, तो 40 से 45 साल में महिलाएं यह वैक्सीन लगवा सकती हैं.

रूबेला, मीजल्स और मम्प्स से बचाव के लिए बचपन में 7 से 14 साल की उम्र में रूबेला वैक्सीन या एमएमआर दिया जाता है. वैक्सीन न लगने की स्थिति में प्रेग्नेंसी प्लान करने वाली महिलाओं को गर्भधारण करने से तकरीबन 6 महीने पहले या फिर गर्भावस्था की पहली तिमाही में रूबेला वैक्सीन लगायी जाती है, ताकि नवजात शिशु को किसी प्रकार का जन्मदोष न हो.

जिन महिलाओं को बचपन में चिकन पॉक्स न हुआ हो, उन्हें चिकन पॉक्स की रोकथाम के लिए 0 से 4 सप्ताह में वेरीसेला जोस्टर वैक्सीन की 2 डोज लगायी जाती है. वहीं गर्भवती महिलाओं को इम्युनोग्लोबुलीन एंटीबायोटिक वैक्सीन दी जाती है, जो गर्भावस्था के दौरान चिकन पॉक्स वायरस से जच्चा-बच्चा का बचाव करती है.

हैपेटाइटिस बी वायरस लिवर को नुकसान पहुंचाता है, जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर बॉडी फ्ल्यूड के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है. हैपेटाइटिस के शुरुआती लक्षणों की आशंका होने पर महिलाओं को बचाव के लिए हैपेटाइटिस ए, बी की वैक्सीन दी जाती है. गर्भवती महिलाओं को भी गर्भावस्था के 0, 1 और 6 महीने में हैपेटाइटिस बी वैक्सीन दी जाती है.

तय करें अपनी सीमाएं

माना जाता है कि महिलाओं में मल्टीटास्किंग का गुण गॉड गिफ्टेड होता है. चाहे परिवार हो या प्रोफेशन, उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि हर जिम्मेदारी वही संभाले. इसमें कोई शक नहीं कि कई महिलाएं अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभाती भी हैं, लेकिन इनमें सामंजस्य बिठाने के चक्कर में अक्सर अपनी पर्सनल लाइफ और स्वास्थ्य की अनदेखी भी करती हैं. ऐसे में महिलाओं को अपनी कुछ सीमाएं तय जरूर करनी चाहिए, ताकि वे तनावमुक्त होकर काम कर सकें.

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