Baldness Mystery Solved: टकला वायरस का सच जानकर चौंक जाएंगे आप, लोगों के बालों को सफा चट कर जाता था

Published by : Rishu Kumar Upadheyay Updated At : 25 Feb 2025 9:19 PM

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Baldness Mystery Solved: कुछ समय पहले महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के गावों में बच्चो से लेकर बुजुर्गों तक के बालों के झड़ने से हड़कंप मच गया था. महज कुछ ही दिनों में सैकड़ो लोगों के सर के बाल उड़ गए थे. प्रभावित इलाकों के हवा, पानी, मिट्टी और हेयर के सैंपल जांच केलिए भेजे गए थे.अब इस जांच रिपोर्ट में हैरान करने वाली बात सामने आई है.

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Baldness Mystery Solved: पिछले साल के दिसंबर महीने में महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के कुछ गांव में लोगों के बाल अचानक झड़ने शुरू हो गए. अभी लोग कुछ समझ पाते की एक के बाद एक गांव के बच्चो से लेकर बुजुर्गों तक के बाल बेतहाशा टूटने शुरू हो गए. इस समस्या की चपेट में बुलढाणा जिले के लगभग 10 गांवों के कई युवा ,किशोर और बुजुर्ग लोग आए , जिस कारण इस बीमारी ने लोगों में भय का माहौल बना दिया था. स्थानीय प्रशासन और हेल्थ एक्सपर्ट्स की टीम एक्टिव हुई और प्रभावित इलाके के मिट्टी, पानी और लोगों के हेयर सैंपल को जांच के लिए भेजा. अब जाकर जांच रिपोर्ट सामने आई है. इस रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय लोगों द्वारा खाने के लिए इस्तेमाल किया गया गेहूं लोगों के बाल झड़ने का कारण बना. जी हां सही सुना आपने, जांच रिपोर्ट बताता है कि जिस गेहूं को खाने के लिए इस्तेमाल किया गया उसमें सेलेनियम की उच्च मात्रा पाई गई.

क्या होता है सेलेनियम?

सेलेनियम एक मिनरल्स है जो मिट्टी से लेकर पानी और भोजन में भी पाया जाता है. मानव शरीर को सेलेनियम की कम मात्रा की आवश्यकता होती है. इंसानी शरीर में सेलेनियम की अधिकता कई परेशानियां खड़े कर सकता है. सेलेनियम के अधिकता से सेलेनोसिस की समस्या उत्पन्न होती है जिसमें बाल झड़ना, थकान चिड़चिड़ापन, नाखून खराब होना जैसी दिक्कत हो सकती हैं.

क्या है टकला वायरस?

पिछले साल दिसंबर महीने में महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में अचानक स्थानीय लोगों के बाल तेजी से झड़ने लगे. कई स्थानीय युवाओं, किशोर और बुजुर्गों के बाल पूरी तरीका से झड़ गया. बाल झड़ने के डर से स्थानीय लोगो ने सिर मुंडवाना शुरू कर दिया ताकि उनके बाल सुरक्षित रहे. इस बीमारी के चपेट में बुलढाणा जिले के लगभग 300 लोग आए. स्थानीय प्रशासन और हेल्थ एक्सपर्ट्स की टीम एक्टिव हुई और प्रभावित जिले के गांव में जाकर वहां के हवा , पानी और हेयर सैंपल को कलेक्ट करके जांच के लिए भेजा गया. इस समस्या को कोई फंगल इन्फेक्शन बता रहा था तो कोई स्थानीय हवा पानी का दोष बता रहा था जबकि स्थानीय लोगों ने इसे टकला वायरस के नाम से प्रचलित कर दिया.

क्या कहा हेल्थ एक्सपर्ट्स और रिसचर्स ने?

मामले की जांच कर रहे हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस समस्या से प्रभावित लोगों को सिर दर्द, बुखार, खुजली, झुनझुनी, उल्टी और दस्त की भी शिकायतें थीं. जांच में यह खुलासा हुआ की सरकारी राशन की दुकानों से जो गेहूं लोगों ने लिया था वह गेहूं पंजाब और हरियाणा से मंगाए गए थे जिसमें सेलेनियम की मात्रा स्थानीय गेहूं की अपेक्षा 600 गुना ज्यादा थी. इसके साथ ही प्रभावित लोगों में जिंक की भी कमी देखी गई.

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Rishu Kumar Upadheyay

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