Kohrra 2 Review :एंगेजिंग,दमदार कहानी में मोना और बरुन का शानदार अभिनय 

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kohrra 2 review

अवॉर्ड विनिंग वेब सीरीज में शुमार कोहरा के नए सीजन में क्या कुछ है खास और कहां नहीं बनी बात जानते हैं इस रिव्यु में

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वेब सीरीज – कोहरा 2 

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निर्माता -ए फिल्म स्क्वाड प्रोडक्शन और एक्ट थ्री 

निर्देशक -सुदीप शर्मा और फैसल रहमान कलाकार -मोना सिंह, बरुण सोबती,रणविजय,सत्यकाम आनंद,पूजा बुमराह,अनुराग अरोड़ा ,एकता सोढ़ी , मनदीप कौर,प्रद्युम सिंह और अन्य 

प्लेटफार्म – नेटफ्लिक्स 

रेटिंग –  तीन

kohrra 2 review :नेटफ्लिक्स की अवार्ड विनिंग क्राइम थ्रिलर सीरीज ‘कोहरा ‘का दूसरा सीजन दस्तक दे चुका है. पहला सीजन लेयर्ड किरदारों और स्टोरी टेलिंग के साथ -साथ  सोशल कमेंट्री की वजह से यादगार बन गया था. इस बार भी वही खूबियां नज़र आयी हैं लेकिन इस बार यह सीरीज बंधुआ मजदूरी के जिस भयावह वास्तविकता को सामने लाती है.वह ना सिर्फ आपको सोचने पर मजबूर करती है बल्कि आपकी आँखों को भी नम कर जाती है.

ये है कहानी 

पिछले सीजन की तरह इस सीजन की शुरुआत भी एक लाश से होती है. पशुओं के बाड़े में एक महिला की लाश मिलती है. गुनहगार को पकड़ने की जिम्मेदारी एसआई धनवंत कौर (मोना सिंह )को मिलती है,जिनके साथ जांच में अमरपाल गरुंडी (बरुन सोबती ) भी जुड़ा हुआ है.अमरपाल ने अपनी पोस्टिंग जगराना से दलेरपुरा करवा ली है , जहाँ यह घटना हुई है.मालूम पड़ता है कि लाश प्रीत (पूजा बुमराह )की है, जो अपने एनआरआई पति ((रणविजय )से झगड़कर मायके पंजाब रहने के लिए आयी थी. जैसे जैसे केस आगे बढ़ता है. मालूम पड़ता है कि प्रीत की लड़ाई उसके पति की बेवफाई की वजह से हुई थी. वह तलाक चाहती थी. पंजाब आने के बाद डांस में सुकून तलाशते हुए डांस इंस्ट्रक्टर कम इन्फ्लुएंसर जॉनी मलंग (विखयूत गुलाटी ) के साथ उसकी नजदीकियां बढ़ गयी थी, तो वही घर में अपने सगे भाई (अनुराग अरोरा )से दूरियां बढ़ गयी थी.प्रीत अपने पिता की सम्पति में अपना हिस्सा जो  चाहती थी.जिससे शक की सुई इन तीनों पर घूमती है लेकिन जैसे जैसे पड़ताल आगे बढ़ती है। रहस्य गहराता जाता है.अपराधी कौन है.क्या अपराधी ही असल में पीड़ित है.अमरपाल गरुंडी की निजी जिंदगी की उलझनें क्या कम  हुई. इन सभी सवालों के जवाब यह सीरीज आगे देती है

सीरीज की खूबियां और खामियां 

 पिछले सीजन की तरह एक बार फिर पंजाब के ग्रामीण इलाके के धुंध में छिपे रहस्यों की खोज करता है। पंजाब के स्याह पक्ष का जिक्र होते ही ड्रग्स की बात होती है. इसे कई फिल्मों और वेब सीरीज में दिखाया जा चुका है लेकिन यह सीरीज बंधुआ मजदूरी के दर्द और शोषण को सामने लाती है. जो मौजूदा दौर में भी हकीकत है. समय समय पर अखबार के पन्नों पर छोटी -बड़ी ख़बरों में गाहे बगाहे नज़र आ जाता है ,लेकिन फिल्मों और सीरीज से गायब सा रहा है, जबकि  पंजाब के खेतों में  यूपी, बिहार और झारखंड से लोग काम करने जाते हैं.यह बात किसी से छिपी नहीं है. उसी से जुड़ी एक शर्मनाक हकीकत बंधुआ मज़दूरी की है. सीरीज की शुरुआत एक मर्डर से होती है लेकिन समानांतर  में कई कहानियों के साथ एक में कहानी झारखंड से आये एक युवक अरुण (प्रायार्क मेहता ) की भी चलती रहती है,जिसके पिता राकेश कुमार (सत्यकाम ) का पिछले बीस साल से कोई अता पता नहीं है। अपने पिता को ढूंढने के लिए वह पंजाब आया है, लेकिन हर जगह से उसे निराशा ही मिल रही है. यह ट्रैक जिस तरह से क्लाइमेक्स तक पहुँचते पहुँचते सबसे अहम बन जाता है.वह सीरीज को खास बना गया है. बंधुआ मज़दूरी और शोषण के अलावा यह सीरीज पितृसत्ता समाज,कार्यस्थल पर पुरुष महिला के सम्बन्ध ,शराबखोरी, पंजाब में आतंकवाद के काले दौर  सहित कई मुद्दों को भी सामने लेकर आती है. हर एपिसोड की शुरुआत फ़्लैशबक से होती है, जो किरदार और कहानी की उलझनों को बखूबी दिखाता है.इसके लिए राइटिंग टीम बधाई की हकदार है.स्क्रीनप्ले की रफ़्तार थोड़ी धीमी हैं ,लेकिन यह पूरी सीरीज में दर्शकों की दिलचस्पी को बनाये रखती है. इससे इंकार नहीं है। सीरीज के संवाद कहानी और किरदार के साथ न्याय करते हैं. किसी तरह की भाषणबाजी नहीं जोड़ी गयी है. बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा बन पड़ा है तो सिनमैटोग्राफी कहानी को रियलिटी के बेहद करीब रखा है। सीरीज से जुडी खामियों की बात करें तो कुछ खामियां भी रह गयी है छह एपिसोड्स वाली इस सीरीज में मूल कहानी के साथ साथ अलग अलग ट्रैक और भी हैं. जिससे कई सारे  किरदार कहानी से जुड़ गए हैं. शुरुआत में थोड़ा यह कन्फ्यूज भी करता है.इसके अलावा अमरपाल की निजी जिंदगी की जद्दोजहद को बखूबी समझने के लिए आपको कोहरा का पहला सीजन भी देखना पड़ेगा तभी आप पूरी तरह से जुड़ पाएंगे। मोना सिंह और बरुन सोबती के वर्किंग डायनामिक्स में नयापन नहीं है. ऐसा अब तक कई वेब सीरीज में नज़र आ चुका है. इसके अलावा धनवंत कौर पुलिस में होने के बावजूद अपने पति को नहीं ढूंढ पाती है. यह सा अविश्वसनीय लगता है.सीरीज के चौथे एपिसोड में जयदीप अहलावत जैसे बेहतरीन अभिनेता  की झलक सिर्फ दिखना अखरता है.उन्हें छोटे से रोल में क्यों जाया किया गया है.

कलाकारों ने इस बार भी दिल जीता 

अभिनय की बात करें तो इस बार मोना सिंह इस सीरीज से जुड़ी हैं.वह कमाल की अदाकारा हैं. इस सीरीज ने उन्हें इसे साबित करने का पूरा मौका दिया है.किरदार की निजी जिंदगी की त्रासदी उन्हें जहां कमजोर करती रहती है, वहीं प्रोफेशनल तौर पर हर मोर्चे पर उन्हें सशक्त खुद को दिखाना है.किरदार से जुड़े दोनों पहलुओं को उन्होंने बखूबी सामने लाया है.बरुन सोबती की भी तारीफ बनती है.एक बार फिर वह अपने किरदार में पूरी तरह से रचे बसे नज़र आये हैं.प्रायार्क मेहता छोटी भूमिका में भी याद रह जाते हैं। सत्यकाम ,रणविजय ,अनुराग अरोरा, पूजा बुमराह, प्रद्युम्न सहित सभी कलाकारों ने बड़ी ईमानदारी के साथ अपना काम किया है.जिससे यह सीरीज और दिलचस्प बन गयी है.


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