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Dil Bekarar Review: यह फैमिली कॉमेडी ड्रामा दिल को करार देता है... यहां पढ़ें रिव्यू

डिज्नी प्लस हॉटस्टार की वेब सीरीज दिल बेकरार अनुजा चौहान की नॉवेल दोज प्राइसी ठाकुर गर्ल्स पर आधारित है और सीरीज का बैकड्रॉप 80 का दशक है. 80 और 90 के दशक के प्लाट पर आधारित कुछ वेब सीरीज पहले भी दस्तक दे चुकी है.

By उर्मिला कोरी
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Dil Bekarar Review
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Dil Bekarar Review

वेब सीरीज - दिल बेकरार

निर्देशक -हबीब फैसल

कलाकार-राज बब्बर,पूनम ढिल्लो, पद्मिनी कोल्हापुरे,अक्षय ओबेरॉय, सहर बाम्बा, तेज़ सप्रू ,अंजलि आनंद और अन्य

रेटिंग- तीन

डिज्नी प्लस हॉटस्टार की वेब सीरीज दिल बेकरार अनुजा चौहान की नॉवेल दोज प्राइसी ठाकुर गर्ल्स पर आधारित है और सीरीज का बैकड्रॉप 80 का दशक है. 80 और 90 के दशक के प्लाट पर आधारित कुछ वेब सीरीज पहले भी दस्तक दे चुकी है लेकिन इसके बावजूद यह वेब सीरीज अपने ट्रीटमेंट और कलाकारों के उम्दा परफॉरमेंस की वजह से एंगेज और एंटरटेन करने में कामयाब होती है.

इस सीरीज की कहानी दस एपिसोड में कही गयी है. सीरीज का बैकड्रॉप 1988 है. सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एलएन ठाकुर ( राज बब्बर) अपनी पत्नी(पूनम ढिल्लो) और अपनी पांच बेटियां के साथ हैं. 80 का दशक है तो एक्सटेंडेड फैमिली और दोस्त की भी बहुत अहमियत है तो कहानी में उन्हें भी मुख्य तौर पर जोड़ा गया है. एलएन ठाकुर के छोटे भाई और दोस्त का परिवार भी है.

इन तीन परिवारों के लोगों की आपसी संबंध,उनसे जुड़ी समस्याओं,सपनों,प्यार,ख्वाइशों से यह सीरीज रूबरू करवाती है. पहले तकरार फिर प्यार,भाइयों की खटपट और बेटियों की समस्या ही नहीं बल्कि राजनीति और समाज पर भी यह सीरीज अपना पक्ष रखती है. सीरीज में भ्रष्ट मंत्री के किरदार के ज़रिए राजनीति को लेकर जो टिप्पणियां की गयी है . जो आज के दौर में भी फिट बैठती है.

मीडिया की आज़ादी की बात प्रासंगिक लगती हैं. मेकर्स ने 80का बैकड्रॉप रखते हुए भी आज की सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं को आइना दिखाया है. यह कहना गलत ना होगा. 80 के दशक पर कहानी है तो उस दौर का लुक भी एक अहम किरदार बन जाता है. टाइप राइटर,टेलीग्राम, टीवी, टेलीफोन,स्कूटर, बाइक से लेकर कॉस्ट्यूम तक में जिस तरह से जिस तरह से 80 के दशक को परदे पर उतारा गया है. उसके लिए क्रिएटिव टीम की तारीफ करनी होगी.

गोलमाल,मैंने प्यार किया,कयामत से कयामत तक और बप्पी दा के डिस्को गीतों का बहुत खूबसूरती से बदलते कालखंड को दर्शाने के लिए किया गया है. सीरीज में भोपाल गैस त्रासदी का जिक्र है तो सीरीज का अंत इस बात से होता है कि सचिन तेंदुलकर भारतीय क्रिकेट टीम में अपना डेब्यू करने जा रहे हैं. खामियों की बात करें तो सीरीज में बहुत सारे सारे किरदार हैं उनकी ज़िंदगी की अलग अलग चुनौतियां हैं.कहानी के इतने किरदार और उससे जुड़े सब प्लॉट्स इतने ज़्यादा हैं कि कई बार सीरीज देखते हुए थोड़ी रोचकता भी कम हो जाती है. बहनों के बीच बॉन्डिंग को कहानी में अहमियत नहीं दी गयी है. यह बात भी अखरती है.

अभिनय की बात करें तो इस सीरीज में 80 के दशक में एक्टिंग में पॉपुलर रहे चेहरों को कास्ट किया है. राज बब्बर ,पूनम ढिल्लो,पद्मिनी कोल्हापुरे जैसे नाम इस सीरीज से जुड़े हैं जो इस सीरीज की जान है और वे अपने अभिनय से दिल भी जीत ले जाते हैं. युवा कलाकारों में अक्षय ओबेरॉय और सहर का काम अच्छा है लेकिन युवाओं में बाज़ी मेधा शंकर अपने अभिनय से मार ले जाती है. बाकी के कलाकार भी कहानी के साथ अपने अभिनय से न्याय करते हैं.

कुलमिलाकर, यह वेब सीरीज कुछ खामियों के बावजूद एंगेजिंग हैं. अगर आप 80 के दशक से कनेक्टेड हैं. आपका बचपन या युवा उनदिनों से जुड़ा हुआ है तो यह सीरीज आपको खास तौर पर कनेक्ट करेगी.

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