झारखंड के युवा फिल्मकार निरंजन कुजूर के विज्ञापन फिल्म ‘ दि स्पिटिंग वाॅल को ABBY’S Award मिला

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झारखंड के युवा फिल्मकार निरंजन कुजूर के विज्ञापन फिल्म ‘ दि स्पिटिंग वाॅल को ABBY’S Award मिला

विज्ञापन जगत में इसे साउथ एशिया का का सबसे बड़ा अवार्ड माना जाता है. निरंजन कुजूर की यह एड फिल्म नो टोबैको डे के दिन रिलीज हुई. यह एक डिजिटल एड फिल्म है जिसे सोशल मीडिया में साल 2022 में रिलीज किया गया था.

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झारखंड के युवा फिल्मकार निरंजन कुजूर के विज्ञापन फिल्म ‘ दि स्पिटिंग वाॅल को विज्ञापन जगत का प्रतिष्ठित पुरस्कार एबिज अवार्ड (ABBYS Award) दिया गया है. एडवरटाइजिंग क्लब के 54वें संस्करण का अवार्ड गोवा फेस्ट के दौरान दिया गया. विज्ञापन जगत में इसे साउथ एशिया का का सबसे बड़ा अवार्ड माना जाता है. निरंजन कुजूर की यह एड फिल्म नो टोबैको डे के दिन रिलीज हुई. यह एक डिजिटल एड फिल्म है जिसे सोशल मीडिया में साल 2022 में रिलीज किया गया था.

स्पेशलिस्ट कैटेगरी में काॅउज मार्केटिंग के लिए पुरस्कार

प्रभात खबर के साथ विशेष बातचीत में निरंजन कुमार ने बताया कि दि स्पिटिंग वाॅल विज्ञापन को डाबर रेड पेस्ट के सहयोग से बनाया गया है. एड फिल्म को स्पेशलिस्ट कैटेगरी में काॅउज मार्केटिंग के लिए पुरस्कार दिया गया. एड फिल्म की शूटिंग कोलकाता और नोएडा में हुई है. एड फिल्म का उद्देश्य पान-गुटखा खाने वाले को जागरूक करना है. एक कृत्रिम वाॅल को जरिया बनाकर बहुत ही खूबसूरती के साथ इस विज्ञापन में आम लोगों को तंबाकू सेवन से बचने की सलाह दी गयी है. उन्होंने कहा कि यह फिल्म अगर पुरस्कार जीत पायी है तो उसका श्रेय टीमवर्क को जाता है. बहुत खुशी हुई है.

पांच में से दो एड फिल्म को मिला है पुरस्कार

निरंजन का कहना है कि मैं फीचर फिल्म, शार्ट फिल्म और एड फिल्म सभी बनाता हूं. मैं इन फिल्मों में अंतर की बजाय उनमें समानता खोजता हूं. हर फिल्म में बिगनिंग, मिडिल और एंड होता है और मैं इसी को ध्यान में रखकर काम करता हूं. मैं 2020 से एड फिल्म बना रहा हूं. मैंने अबतक पांच एड फिल्म बनायी है, जिसमें से दो को अवार्ड मिला है. ‘दि स्पिटिंग वाॅल को अबतक दो पुरस्कार मिल चुके हैं. एड गली का मोबेक्स अवार्ड भी इस फिल्म को मिला है. इसके अलावा डाबर रत्नप्राश को इकोनोमिक्स टाइम्स का बेस्ट यूज्ड आॅफ कंटेंट मार्किटिंग का अवार्ड भी मिला है. अभी तक मैं पांच-छह एड फिल्म बनाया है और दो को अवार्ड मिला है.

कुड़ुख भाषा में बनी फिल्म को मिला है राष्ट्रीय पुरस्कार

झारखंड के युवा फिल्मकार निरंजन कुजूर की कुडुख भाषा में बनी फि ल्म ‘एड़पा काना ’ को नॉन फीचर फिल्म कैटेगरी में बेस्ट ऑडियोग्राफी के लिए राष्ट्री य पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. झारखंड के लोहरदगा जिले के रहनेवाले निरंजन कुजूर निदेशक और पटकथा लेखक हैं. अब तक निरंजन ने कुड़ुख, हिंदी, बांग्ला और संताली भाषा में फिल्म बनायी है. हाल ही में निरंजन ने बांग्ला में शार्ट फिल्म ‘तीरे बेंधो ना’ बनायी है, जिसे केरल के IDSFFK aur SiGNS फिल्म फेस्टिवल में दिखाया जायेगा. उसके बाद इसे कोलकाता में South Asian Short Film Festival (SASFF) में भी दिखाया जायेगा.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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