फिल्म सेट पर A, B और C कैटेगरी का खेल, लीड एक्टर्स को 4 वैनिटी… जूनियर को टेंट भी नसीब नहीं, बी-टाउन का कड़वा सच
A, B और C कैटेगरी सिस्टम पर जतिन नेगी का बड़ा खुलासा फोटो- इंस्टाग्राम
Jatin Negi On Character Artists Struggle: अभिनेता जतिन नेगी ने फिल्म सेट के कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. जिसमें बताया कि कलाकारों को A, B और C कैटेगरी में बांटा जाता है, जिसका असर वैनिटी वैन, खाने और अन्य सुविधाओं पर भी पड़ता है.
Jatin Negi On Character Artists Struggle: बाहर से देखने पर फिल्म और टीवी इंडस्ट्री पूरी तरह ग्लैमरस लगती है. रेड कार्पेट, स्टारडम और लाइमलाइट से भरी इस दुनिया का एक दूसरा पहलू भी है. यहां कई ऐसे कलाकार काम करते हैं, जो स्क्रीन पर कहानी को मजबूत बनाते हैं, लेकिन उन्हें वह पहचान और सम्मान नहीं मिल पाता जिसके वे हकदार हैं. उन्हें ए, बी और सी केटेगरी में बांटा जाता है.
Jatin Negi Shocking Revelations: ग्लैमर वर्ल्ड के चौंकाने वाले खुलासे जतिन नेगी ने किए शेयर
अभिनेता जतिन नेगी ने ग्लैमर वर्ल्ड के कुछ चौंकाने वाली सच्चाई शेयर की है. उन्होंने स्क्रीन संग बातचीत में कहा, “कैरेक्टर आर्टिस्ट्स को इंडस्ट्री में अक्सर उतना सम्मान नहीं मिलता, जब तक वे परेश रावल या अनुपम खेर जैसे बड़े नाम न बन जाएं. ज्यादातर ट्रेंड एक्टर्स अपने करियर की शुरुआत छोटे या सपोर्टिंग रोल्स से करते हैं और फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं, लेकिन सेट पर मिलने वाली सुविधाएं इस बात पर निर्भर करती हैं कि आपका रोल कितना बड़ा है.”
Discrimination Between Character Artist And Main Lead: कैरेक्टर आर्टिस्ट और मेन लीड में होता है भेदभाव
उन्होंने आगे कहा, ”बड़ी फिल्मों में लीड एक्टर्स के लिए 4 वैनिटी वैन और अलग स्टाफ होता है, जबकि कैरेक्टर आर्टिस्ट्स को अक्सर सिर्फ एक स्पॉट बॉय मिलता है, जो उनका सामान संभालता है. कभी-कभी उनके लिए एक मेकअप आर्टिस्ट भी होता है. अगर आप सीनियर कैरेक्टर आर्टिस्ट हैं, तो आपको बेहतर वैनिटी मिल सकती है, लेकिन ज्यादातर मामलों में वैनिटी दूसरे कलाकारों के साथ शेयर करनी पड़ती है. वहीं छोटे रोल करने वाले कलाकारों को कई बार 7-8 लोगों के साथ एक ही वैन शेयर करनी पड़ती है. सच कहूं तो सेट पर आपको कितना सम्मान मिलेगा, यह काफी हद तक आपके किरदार की अहमियत पर निर्भर करता है.”
A, B and C Categories System on Film Set: फिल्म के सेट पर A, B और C कैटेगरी का चलता है सिस्टम
जतिन नेगी ने कहा, “सेट पर सबसे ज्यादा बुरा तब लगता है, जब कलाकारों के बीच अलग-अलग कैटेगरी बना दी जाती हैं, खासकर खाने को लेकर. यहां A, B और C कैटेगरी का सिस्टम चलता है. A कैटेगरी में सीनियर कलाकार और मुख्य या सपोर्टिंग रोल निभाने वाले लोग होते हैं, जबकि छोटे किरदार या एक्स्ट्रा कलाकारों के लिए खाने की अलग व्यवस्था होती है. यह देखकर मुझे हमेशा दुख होता है. मुझे यह फर्क कभी पसंद नहीं आया, लेकिन आज भी कई बड़े प्रोडक्शन हाउस में ऐसा देखने को मिलता है. लीड एक्टर्स अक्सर डायरेक्टर्स के साथ बैठकर खाना खाते हैं, जबकि बाकी कलाकारों को अलग रखा जाता है. कई बार ऐसा लगता है जैसे सेट पर भी लोगों को कास्ट सिस्टम में बांट दिया गया है.”
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Jatin Negi Shared His Experience: जतिन नेगी ने अपना एक्सपीरियंस किया शेयर
जतिन नेगी ने आगे कहा, “करीब 7-8 साल पहले मैं एक छोटे किरदार में काम कर रहा था. मैं अपने कॉस्ट्यूम और मेकअप वाले लुक में ही खाना खाने गया था, लेकिन मुझे अंदर जाने का परमिशन नहीं मिला. रात के करीब 10 बजे थे और मुझे मजबूर होकर प्रोडक्शन टीम के एक व्यक्ति को फोन करना पड़ा. काफी देर बाद मुझे एंट्री मिली, लेकिन फिर मुझे एक अलग तरफ भेज दिया गया, जहां मुझे खाना खाना था. उस समय मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मैं वहां का हिस्सा ही नहीं हूं.”
Junior Artists To Eat In C Category Without Tents: जूनियर आर्टिस्ट्स को बिना टेंट के C कैटेगरी में खाना पड़ता है
उन्होंने कहा, ”हैरानी की बात यह है कि खाने की क्वालिटी में भी साफ फर्क दिखाई देता है. हर सेट पर ऐसा नहीं होता, लेकिन मैंने खुद देखा है कि A और B कैटेगरी के कलाकारों को जो खाना मिलता है, उसकी तुलना में C कैटेगरी के लोगों के लिए व्यवस्था काफी अलग होती है. खाने के लिए अलग-अलग सेक्शन बनाए जाते हैं और पहले से बता दिया जाता है कि आपको किस सेक्शन में जाकर खाना है. कई बार जूनियर आर्टिस्ट्स को सेट से काफी दूर खाना दिया जाता है. उनके लिए न टेंट होता है और न ही बैठने की सही व्यवस्था. ऐसे में उन्हें खड़े-खड़े ही खाना खाना पड़ता है.”
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By आशीष लता
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पत्रकारिता अनुभव
पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने प्लस न्यूज से की, जहां बिहार में एंकर और रिपोर्टर के रूप में काम करते हुए कई महत्वपूर्ण ग्राउंड रिपोर्ट्स तैयार कीं. फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कई वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के इंटरव्यू भी किए. इसके बाद उन्होंने एबीपी न्यूज और ईटीवी भारत जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी सेवाएं दीं.
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आशीष लता ने पटना विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग, रिसर्च और जर्नलिज्म के 5Ws + 1H सिद्धांतों पर उनकी मजबूत पकड़ है. यही वजह है कि उनका कंटेंट भरोसेमंद, संतुलित और पाठकों के लिए उपयोगी माना जाता है.
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