किसी को मिला देवी का दर्जा, किसी की कास्टिंग पर हुआ विवाद, 39 साल में ऐसे बदलीं पर्दे की माता सीता
दीपिका चिखलिया और अंजलि अरोड़ा, फोटो - इंस्टाग्राम
भारतीय सिनेमा में माता सीता का किरदार हमेशा खास रहा है. 1987 में दीपिका चिखलिया की 'रामायण' से लेकर अब साई पल्लवी तक, जानें कैसे सीता का किरदार पर्दे पर बदला है. यह लेख सीता के किरदार के विकास और विभिन्न अभिनेत्रियों द्वारा निभाई गई भूमिकाओं पर प्रकाश डालता है.
भारतीय सिनेमा और टेलीविजन में रामायण की कहानी जब भी पर्दे पर आई, माता सीता का किरदार दर्शकों के लिए खास रहा है. यह सिर्फ एक फिल्मी या टीवी भूमिका नहीं रही, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा किरदार रहा है. यही वजह है कि जब भी कोई नई अभिनेत्री सीता का रोल निभाती है, उसकी तुलना पुराने किरदारों से होना स्वाभाविक है.
1987 में रामानंद सागर की 'रामायण' में दीपिका चिखलिया ने सीता का किरदार निभाकर ऐसी पहचान बनाई, जिसे आज भी याद किया जाता है. इसके बाद स्मृति ईरानी, देबिना बनर्जी, कृति सेनन और अब साई पल्लवी जैसी अभिनेत्रियों ने अलग-अलग दौर में सीता की भूमिका को पर्दे पर पेश किया. अब 2026 में अंजलि अरोड़ा के सीता बनने की खबर ने एक बार फिर इस किरदार को चर्चा में ला दिया है.
दीपिका चिखलिया बनीं ऐसी सीता, जिसे लोग आज भी नहीं भूल पाए
1987 में प्रसारित हुई रामानंद सागर की 'रामायण' भारतीय टेलीविजन के इतिहास का अहम हिस्सा बन गई. इसमें दीपिका चिखलिया ने माता सीता का किरदार निभाया था. उनकी सादगी, शांत भाव-भंगिमा और गरिमामयी अभिनय ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा. उस समय 'रामायण' के कलाकारों को लेकर दर्शकों की भावनाएं आज के दौर से काफी अलग थीं. दीपिका चिखलिया को कई लोग माता सीता की छवि से ही जोड़कर देखने लगे थे. यही कारण है कि आज भी जब सीता के किरदार की बात होती है तो सबसे पहले दीपिका चिखलिया का नाम याद आता है.
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कृति सेनन की जानकी में दिखा सिनेमाई अंदाज
2023 में 'आदिपुरुष' में कृति सेनन ने जानकी यानी माता सीता का किरदार निभाया. फिल्म को बड़े बजट और आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया गया था. ऐसे में सीता का किरदार भी पारंपरिक टीवी प्रस्तुतियों से काफी अलग नजर आया. कृति सेनन के अभिनय को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही. फिल्म के VFX, संवाद और प्रस्तुति को लेकर काफी चर्चा और विवाद हुआ. इसके बावजूद कृति की सीता ने आधुनिक दौर में इस किरदार के बदलते सिनेमाई रूप को जरूर दिखाया.
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साई पल्लवी से जुड़ी हैं बड़ी उम्मीदें
नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित 'रामायण' में साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी. फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में हैं. इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही काफी उत्सुकता है. साई पल्लवी अपनी स्वाभाविक अदाकारी और सादगी के लिए जानी जाती हैं. ऐसे में दर्शक यह देखने के लिए उत्साहित हैं कि वह माता सीता जैसे भावनात्मक और गरिमामयी किरदार को पर्दे पर किस तरह पेश करती हैं.
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अब अंजलि अरोड़ा के सीता बनने पर क्यों हो रही चर्चा?
2026 में 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' के टीजर के साथ अंजलि अरोड़ा का सीता के रूप में लुक सामने आया. सोशल मीडिया पर मशहूर अंजलि अरोड़ा को इस तरह के पौराणिक किरदार में देखकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं. अंजलि को 'कच्चा बादाम' से लोकप्रियता मिली थी और इसके बाद वह सोशल मीडिया की चर्चित हस्तियों में शामिल हो गईं. अब उनका पौराणिक फिल्म में माता सीता का किरदार निभाना उनके करियर में एक अलग तरह का बदलाव माना जा रहा है. उनकी कास्टिंग को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल भी उठे हैं. कुछ यूजर्स का कहना है कि माता सीता जैसे किरदार के लिए पारंपरिक छवि वाली अभिनेत्री को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जबकि कुछ लोग इसे बदलते सिनेमा और नई कास्टिंग का हिस्सा मान रहे हैं.
सीता के किरदार के साथ बदला सिनेमा का नजरिया
अगर पिछले करीब चार दशकों पर नजर डालें तो माता सीता की प्रस्तुति में काफी बदलाव दिखाई देता है. 1980 के दशक में जहां सादगी और भक्ति पर जोर था, वहीं 2000 के दशक में टीवी तकनीक और ड्रामा का प्रभाव बढ़ा. इसके बाद फिल्मों में VFX, बड़े सेट और भव्यता ने पौराणिक किरदारों की प्रस्तुति को बदल दिया. अब सोशल मीडिया के दौर में लोकप्रियता और डिजिटल पहचान भी कलाकारों की कास्टिंग में अहम भूमिका निभाने लगी है. यही वजह है कि दीपिका चिखलिया की सीता और आज की सीता के बीच दर्शकों को काफी अंतर दिखाई देता है. हालांकि एक चीज अब भी नहीं बदली है और वह है इस किरदार से जुड़ी दर्शकों की भावनाएं.
दीपिका चिखलिया की सीता आज भी क्यों खास है?
अब तक कई अभिनेत्रियां माता सीता का किरदार निभा चुकी हैं और आने वाले समय में भी यह सिलसिला जारी रहेगा. लेकिन दीपिका चिखलिया की सीता की लोकप्रियता आज भी अलग स्तर पर दिखाई देती है. इसकी बड़ी वजह उस दौर की प्रस्तुति और दर्शकों का धारावाहिक से भावनात्मक जुड़ाव माना जाता है. उस समय रामायण सिर्फ एक टीवी शो नहीं थी, बल्कि परिवारों के लिए देखने का एक सामूहिक अनुभव बन गई थी. अब देखना दिलचस्प होगा कि साई पल्लवी और अंजलि अरोड़ा अपने-अपने अंदाज में माता सीता की इस लोकप्रिय छवि को कितना नया रूप देती हैं और दर्शक उन्हें किस तरह स्वीकार करते हैं.
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