Election 2022: कांग्रेस में खौफ, हॉर्स ट्रेडिंग के डर से गोवा-उत्तराखंड में नजरबंद किए जा सकते हैं MLA
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Mar 2022 1:59 PM
मीडिया रिपोर्ट्स और पार्टी के सोर्स के अनुसार, विधानसभा चुनाव के एक्जिट पोल में उत्तराखंड में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में सियासी तोड़-तिकड़म और खरीद-फरोख्त की चुनौतियों को लेकर कांग्रेस सचेत हो गई है.
Assembly Elections Results : पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना से पहले आए एक्जिट पोल से मतगणना के पहले सियासी सूरमाओं की हवा सरक रही है. खासकर उत्तराखंड में कांग्रेस के अंदर विधायकों की खरीद-फरोख्त का खौफ जरूर बना हुआ है. पार्टी सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट की मानें तो इसी खौफ की वजह से पार्टी प्रत्याशियों को अपने-अपने घरों में ही नजरबंद किया जा सकता है. दरअसल, कांग्रेस की इस कसरत को गोवा में विधायकों की हुई खरीद-फरोख्त के सबक के तौर पर देखा जा रहा है.
मीडिया रिपोर्ट्स और पार्टी के सोर्स के अनुसार, विधानसभा चुनाव के एक्जिट पोल में उत्तराखंड में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में सियासी तोड़-तिकड़म और खरीद-फरोख्त की चुनौतियों को लेकर कांग्रेस सचेत हो गई है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, चूंकि गोवा में कांग्रेस को गच्चा खाना पड़ गया था, इसलिए अब वो उत्तराखंड में उस घटना को दोहराना नहीं चाहती है. गोवा की सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी उसके विधायक तथाकथित तौर पर विपक्षी पार्टी से सौदेबाजी कर ली थी और कांग्रेस को सरकार बनाने की बजाए विपक्ष में बैठना पड़ा था. इसीलिए पार्टी अब उत्तराखंड में किसी प्रकार का जोखिम मोल नहीं लेना चाहती.
इतना ही नहीं, पार्टी सूत्रों की मानें तो कांग्रेस केवल उत्तराखंड में ही नहीं बल्कि गोवा में भी विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर सतर्क हो गई है. यही वजह है कि पार्टी आलाकमान की ओर से उत्तराखंड की तर्ज पर यहां के प्रत्याशियों को भी घरों में ही रहने का निर्देश दिया जा सकता है. इसके लिए पार्टी ने उत्तराखंड और गोवा दोनों स्थानों पर अपना एक वॉररूम तैयार किया है, जहां से पार्टी प्रत्याशियों और विरोधी दलों पर नजर रखी जा रही है. यहां पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठकों का दौर जारी है.
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पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने मतगणना के लिए विशेष रणनीति तैयार की है. इसके तहत प्रत्येक मतगणना केंद्र पर पार्टी का एक केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात किया जाएगा. इस पर्यवेक्षक का काम मतगणना के दौरान प्रत्याशी को हर प्रकार की सहायता प्रदान करना है. जरूरत पड़ने पर वह पर्यवेक्षक पार्टी की प्रदेश इकाई या केंद्रीय नेताओं का सहयोग ले सकता है. मतगणना पूरी होने के बाद जीते हुए प्रत्याशी पर्यवेक्षक की कस्टडी में चले जाएंगे. सूत्र तो यह भी बताते हैं कि पर्यवेक्षक की कस्टडी में जाने के बाद जीते हुए प्रत्याशियों को दूसरे राज्यों में शिफ्ट भी किया जा सकता है.
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