Sorry! अब आपकी जगह AI लेगा, Oracle Uber में Layoff से हो जाएं सतर्क, इन जॉब प्रोफाइल पर ज्यादा खतरा
ऑफिस स्टाफ की सांकेतिक फोटो (AI generated)
सोचिए, आप सुबह उठते हैं, चाय का कप उठाते हैं, और फोन ऑन करते ही पता चलता है कि आपकी कंपनी ने "कॉस्ट कटिंग" के नाम पर हजारों लोगों को नौकरी से निकाल दिया है. मजेदार बात ये है कि जिस कुर्सी पर कल तक कोई इंसान बैठकर काम करता था, आज उस पर एक लाइन का कोड बैठा है. Oracle और Uber जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों में हजारों Layoff के बाद कुछ जॉब प्रोफाइल हैं जिनपर AI का खतरा सबसे ज्यादा है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रफ्तार तेज हो गई है और इसने दुनिया भर में हलचल मचा दी है. AI टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है कि अब ये सवाल उठने लगा है कि क्या हमारी नौकरियों का भविष्य भी इससे जुड़ा है? AI के आने से कई ऐसे पुराने, ट्रेडिशनल करियर हैं जिनका वजूद आने वाले टाइम में खतरे में पड़ सकता है. कुछ तो ऐसे हैं जो पूरी तरह खत्म भी हो सकते हैं. ये कोई डराने वाली बात नहीं है, बल्कि एक हकीकत है जिसे समझना जरूरी है. बात करियर की सीरीज में जानेंगे कि AI के विस्तार के साथ कौन कौन से जॉब प्रोफाइल पर खतरा है.
PravRaha के CEO पंकज कुमार ने एक पोस्ट शेयर कर कहा कि 2026 में अगस्त तक ही टेक इंडस्ट्री में इतनी छंटनी हो चुकी थी, जितनी पूरे 2025 में हुई थी. टारगेट 4 महीने पहले ही पूरा हो गया (250+ कंपनियां, 1 लाख से ज्यादा लोग).
Oracle और Uber में कितनी हुई छंटनी?
CNBC की रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2026 को Oracle ने बड़े स्तर पर छंटनी की. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे Tech Insider) में आंकड़ा 30,000 तक भी बताया गया है. Oracle ने आधिकारिक रूप से कोई पूर्ण ब्रेकडाउन जारी नहीं किया.
| आंकड़ा | जानकारी |
| कुल वर्कफोर्स में कमी | करीब 21,000 |
| पहले की वर्कफोर्स | करीब 1.62 लाख |
| बाद की वर्कफोर्स | करीब 1.41 लाख |
| अनुमानित अतिरिक्त कटौती | 7,000–10,000 |
| भारत में संभावित असर | करीब 3,000 तक |
| क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ | करीब 77% सालाना |
Uber ने 3,300 कर्मचारियों यानी अपने वर्कफोर्स के 10% हिस्से की छंटनी की घोषणा की, साथ ही नाइजीरिया और युगांडा में अपना परिचालन भी बंद कर दिया. यह 2020 के बाद कंपनी के हेडकाउंट में सबसे बड़ी कटौती है.

AI का बढ़ता दबदबा, कौन से काम बदलेंगे?
AI सिर्फ मशीनों को सोचने की ताकत नहीं दे रहा, बल्कि ये इंसानों के काम करने के तरीकों को भी बदल रहा है. जिन कामों में दोहराव (repetition) ज्यादा होता है, जो काम पहले से तय नियमों पर चलते हैं, या जिनमें डेटा का इस्तेमाल बहुत होता है, ऐसे काम AI ज्यादा आसानी और तेजी से कर सकता है.
डेटा एंट्री और क्लैरिकल काम
डेटा एंट्री ऑपरेटर और क्लर्क जैसे पद सबसे पहले AI की चपेट में आ सकते हैं. AI वाले सिस्टम अब कागजात को स्कैन कर सकते हैं, जानकारी को अपने आप समझ सकते हैं और उसे डेटाबेस में डाल सकते हैं.
- क्यों खतरा है: एक AI प्रोग्राम हजारों पन्नों की एंट्री इंसानी क्लर्क के मुकाबले ज्यादा तेजी से और बिना गलती के कर सकता है. ये 24 घंटे काम कर सकता है और इसे सैलरी या छुट्टियों की जरूरत नहीं पड़ती.
- उदाहरण: कई कंपनियां अब कस्टमर सर्विस के लिए AI चैटबॉट का इस्तेमाल कर रही हैं, जो आम सवालों के जवाब देते हैं. इससे कॉल सेंटर के कुछ निचले लेवल के कर्मचारियों की जरूरत कम हो गई है.
ग्राहक सेवा (Customer Service) के कुछ पहलू
वैसे तो कस्टमर सर्विस में इंसानी स्पर्श की जरूरत हमेशा रहेगी, लेकिन AI ने इस फील्ड में भी अपनी जगह बना ली है. कस्टमर सपोर्ट एग्जीक्यूटिव का काम, खासकर जो सवालों के जवाब देने या साधारण समस्याओं को हल करने से जुड़ा है, AI संभाल सकता है.
- क्यों खतरा है: AI चैटबॉट और वर्चुअल असिस्टेंट पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट हो गए हैं. वो जटिल सवालों को भी समझ सकते हैं और इंसानों की तरह बात कर सकते हैं. इससे कॉल सेंटर की लागत कम होती है.
- आंकड़े: एक रिपोर्ट के मुताबिक, 75-90% ग्राहक सेवा AI संभाल सकती है, जिससे लाखों नौकरियों पर असर पड़ेगा.
बुककीपिंग और अकाउंटिंग के बेसिक काम
AI और अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर अब बिल बनाने, खर्चों को ट्रैक करने और साधारण फाइनेंशियल रिपोर्ट तैयार करने जैसे काम खुद कर सकते हैं. बुककीपर या अकाउंटेंट का वो हिस्सा जो सिर्फ डेटा रिकॉर्ड करने से जुड़ा है, AI के जरिए ऑटोमेट हो सकता है.
- क्यों खतरा है: AI सिस्टम किसी भी हिसाब-किताब को इंसानों से ज्यादा सटीकता और तेजी से कर सकते हैं. वो टैक्स फाइलिंग जैसे काम को भी आसान बना सकते हैं.
- क्या बदलेगा: आने वाले टाइम में अकाउंटेंट का काम सिर्फ डेटा एंट्री से हटकर एनालिसिस, प्लानिंग और सलाह देने पर ज्यादा फोकस होगा.
टेलीमार्केटिंग और सेल्स के कुछ रोल
टेलीमार्केटर का काम, जो अक्सर स्क्रिप्टेड बातचीत पर आधारित होता है, AI आसानी से कर सकता है. AI वाले वॉयस बॉट अब सीधे ग्राहकों से बात कर सकते हैं और उन्हें प्रोडक्ट्स या सर्विसेज के बारे में बता सकते हैं.
- क्यों खतरा है: AI बॉट बड़ी संख्या में कॉल्स कर सकते हैं, ग्राहक की आवाज को समझ सकते हैं और उसी हिसाब से जवाब दे सकते हैं. ये इंसानों के मुकाबले कहीं ज्यादा किफायती है.
- तरक्की: AI अब ग्राहकों की भावनाओं को समझने और उसी के हिसाब से बातचीत को मोड़ने में भी सक्षम हो रहा है.
फैक्टरी और असेंबली लाइन वर्कर्स
मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में ऑटोमेशन पहले से ही बड़ा बदलाव ला चुका है. AI वाले रोबोट अब ज्यादा जटिल काम भी संभाल सकते हैं, जैसे कार बनाना या इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स को असेंबल करना.
- क्यों खतरा है: रोबोट लगातार और बिना थके काम कर सकते हैं. वो ज्यादा सटीक होते हैं और भारी सामान उठाने या खतरनाक माहौल में काम करने में सक्षम होते हैं.
- डेटा: ऑटोमेशन की वजह से डेवलप्ड देशों में मैन्युफैक्चरिंग जॉब्स में पिछले कुछ दशकों में भारी गिरावट आई है.

ट्रैवल एजेंट्स
ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म और AI वाले यात्रा प्लानर की वजह से ट्रैवल एजेंट का ट्रेडिशनल रोल कम हो रहा है. अब लोग खुद ही फ्लाइट, होटल और टूर की बुकिंग आसानी से कर लेते हैं.
- क्यों खतरा है: AI आपकी पसंद, बजट और टाइम के हिसाब से सबसे अच्छे डील्स ढूंढ सकता है. ये आपको यात्रा के दौरान भी मदद कर सकता है.
- भविष्य: ट्रैवल एजेंट का रोल अब सिर्फ बुकिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वो खास या लग्जरी यात्राओं के लिए पर्सनलाइज्ड प्लानिंग और सलाह दे सकते हैं.
प्रूफरीडर और ट्रांसलेटर (सरल अनुवाद)
AI अब लेखों को प्रूफरीड करने और साधारण भाषाओं में अनुवाद करने में काफी माहिर हो गया है. Google Translate और Grammarly जैसे टूल्स हर दिन बेहतर हो रहे हैं.
- क्यों खतरा है: AI बहुत ही कम टाइम में बड़ी मात्रा में टेक्स्ट को जांच सकता है और गलतियों को सुधार सकता है. सरल अनुवाद के लिए तो ये इंसानों से बेहतर साबित हो रहा है.
- बदलाव: भाषा एक्सपर्ट और अनुवादक का काम अब ज्यादा जटिल, साहित्यिक या टेक्निकल अनुवादों पर फोकस होगा, जहां बारीकियों और सांस्कृतिक समझ की जरूरत होती है.
सभी नौकरियों को खतरा नहीं
ये जरूरी नहीं है कि AI आने से सारी नौकरियां खत्म हो जाएंगी. बल्कि, AI के साथ मिलकर काम करने वाले नए रोल भी सामने आएंगे. जो लोग AI को समझकर उसके साथ काम करना सीखेंगे, उनके लिए मौके बढ़ेंगे.
- नई स्किल्स की जरूरत: AI के दौर में क्रिएटिविटी, प्रॉब्लम-सॉल्विंग, क्रिटिकल थिंकिंग और इमोशनल इंटेलिजेंस जैसी स्किल्स ज्यादा जरूरी हो जाएंगी.
- टेक्निकल नॉलेज: AI टूल्स को मैनेज करना, उनका डेटा एनालाइज करना और उनसे जुड़ी नई टेक्नोलॉजी को समझना भी जरूरी होगा.
- एजुकेशन का महत्व: सरकारों और संस्थानों को नई एजुकेशन पॉलिसी पर ध्यान देना होगा ताकि भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स (workforce) तैयार हो सके.
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