345 टेक्निकल कॉलेज की मान्यता रद्द, महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा

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कॉलेज स्टूडेंट की सांकेतिक फोटो (Canva)

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AICTE: भारत में टेक्निकल एजुकेशन के क्षेत्र में बदलाव देखने को मिल रहा है. पिछले तीन शैक्षणिक वर्षों के दौरान देशभर में AICTE से मान्यता प्राप्त 345 टेक्निकल इंस्टीट्यूट बंद हो चुके हैं. यह जानकारी लोकसभा में शिक्षा मंत्रालय की ओर से साझा की गई.

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ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) के आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा संस्थान महाराष्ट्र में बंद हुए, जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश भी इस सूची में प्रमुख राज्यों में शामिल रहे. इन बंद होते संस्थानों ने टेक्निकल एजुकेशन की गुणवत्ता, छात्रों की पसंद और कॉलेजों की आर्थिक स्थिति पर नई चर्चा शुरू कर दी है.

क्यों बंद हो रहे हैं टेक्निकल कॉलेज?

शिक्षा राज्य मंत्री डॉ सुकांत मजूमदार ने लोकसभा में बताया कि AICTE अपने Approval Process Handbook (APH) के तहत संस्थानों के बंद होने से जुड़े आवेदन पर फैसला लेता है. कई संस्थानों में लगातार कम एडमिशन, कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर, घटती मांग और वित्तीय चुनौतियों की वजह से संचालन मुश्किल हो गया. ऐसे मामलों में संस्थानों ने खुद बंद होने का आवेदन दिया.

महाराष्ट्र सबसे आगे

सरकारी आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में 2026-27 के दौरान सबसे ज्यादा AICTE मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थान बंद हुए. इसके अलावा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी पिछले तीन वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में कॉलेजों ने संचालन बंद किया. यह संकेत देता है कि सिर्फ किसी एक राज्य में नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों में तकनीकी शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है.

सरकार की नई रणनीति

शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि सिर्फ नए कॉलेज खोलने पर जोर नहीं दिया जा रहा है, बल्कि मौजूदा संस्थानों की गुणवत्ता और टिकाऊ व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी जा रही है. इसी दिशा में AICTE ने कई नई नीतियां लागू की हैं. अब कॉलेजों को मांग के अनुसार सीटें कम करने, कम प्रदर्शन वाले कोर्स बंद करने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की अनुमति दी जा रही है.

छात्रों के लिए क्या है इसका मतलब?

विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर प्रदर्शन वाले संस्थानों के बंद होने से छात्रों को बेहतर गुणवत्ता वाले कॉलेज चुनने का मौका मिलेगा. हालांकि जिन क्षेत्रों में कॉलेजों की संख्या कम हो जाएगी, वहां छात्रों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ सकता है. ऐसे में एडमिशन लेने से पहले AICTE की मान्यता, प्लेसमेंट रिकॉर्ड, फैकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच करना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है.

बदल रहा है टेक्निकल एजुकेशन का माहौल

तकनीकी शिक्षा में अब केवल कॉलेजों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता सबसे बड़ा पैमाना बनती जा रही है. इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक नए कोर्स, बेहतर स्किल ट्रेनिंग और रोजगार आधारित शिक्षा पर जोर बढ़ रहा है.

ऐसे में आने वाले वर्षों में वही संस्थान टिक पाएंगे जो छात्रों को आधुनिक शिक्षा, बेहतर लैब, अनुभवी फैकल्टी और मजबूत प्लेसमेंट अवसर उपलब्ध करा सकेंगे. यही बदलाव भारत की तकनीकी शिक्षा को अधिक प्रतिस्पर्धी और रोजगार केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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रवि मल्लिक

लेखक के बारे में

By रवि मल्लिक

रवि मल्लिक पिछले 7 सालों से डिजिटल पत्रकारिता से जुड़े हैं. स्कूली शिक्षा से लेकर नौकरी तक की खबरों पर काम करना पसंद है. युवाओं को बेहतर करियर ऑप्शन, करंट अफेयर्स और नई वैकेंसी के बारे में बताना अच्छा लगता है. बोर्ड परीक्षा हो या UPSC, JEE और NEET एग्जाम टॉपर्स से बात करना और उनकी स्ट्रेटजी के बारे में जानना पसंद है. युवाओं को प्रेरित करने के लिए उनके बीच के मुद्दों को उठाना और सही व सटीक जानकारी देना ही उनकी प्राथमिकता है.

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