ChatGPT से छापा आंसर, अंत में लिखा- वीडियो के लिए लिंक पर क्लिक करें

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एग्जाम की सांकेतिक तस्वीर (PC- कैन्वा)

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AI Cheating in College: MP के डॉ हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी में सामूहिक चीटिंग का मामला सामने आया है. कई छात्रों ने ChatGPT की मदद से आंसर लिखे. अब इस यूनिवर्सिटी का रिजल्ट रोक दिया गया है. आगे की कार्रवाई के बाद ही रिजल्ट जारी किया जाएगा.

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AI Cheating in College: AI टूल्स की आदत अब छात्रों के लिए मुसीबत बनती जा रही है. इसका असली नजारा मध्य प्रदेश के सागर जिले स्थित डॉ हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी में देखने को मिला, जहां स्टूडेंट्स ने ChatGPT से नकल करके परीक्षा दी. नकल का मामला तब सामने आया जब एक छात्र की आंसर शीट में लिखा मिला, “वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें.” मामला सामने आने के बाद जांच शुरू हुई और पूरे कॉलेज का रिजल्ट रोक दिया गया.

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जांच में क्या सामने आया?

शुरुआती जांच में पाया गया कि सिर्फ एक नहीं कई छात्रों की कॉपी में एक जैसे जवाब और एक जैसी भाषा मिली. यूनिवर्सिटी ने पाया कि एग्जाम के दौरान AI टूल, विशेषकर ChatGPT, की मदद से आंसर तैयार किए गए हैं. इसी वजह से संबंधित कॉलेज का रिजल्ट रोक दिया गया है.

कॉलेज और स्टूडेंट्स के खिलाफ लिया जाएगा एक्शन

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. यदि AI के जरिए नकल के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यूनिवर्सिटी परीक्षा नियमों के अनुसार संबंधित छात्रों और कॉलेज के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है.

बढ़ी परीक्षा में AI के दुरुपयोग की चिंता

उच्च शिक्षण संस्थान में AI के बढ़ते इस्तेमाल ने समाज में चिंता पैदा कर दी है. ChatGPT और AI Gemini के बढ़ते इस्तेमाल ने कॉन्टेंट की ओरिजिनैलिटी खत्म कर दी है. टेक एक्सपर्ट अंकित देव अर्पण ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि आज के समय में छात्र अपने हर काम के लिए AI पर डिपेंड होते जा रहे हैं. बहुत आसान कामों के लिए भी वे AI Prompt देते है, जोकि उनके सोचने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है और AI टूल्स पर उनकी निर्भरता को बढ़ा रहा है. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि छात्रों की क्रिएटिविटी खत्म हो जाएगी.

उन्होंने मध्य प्रदेश वाले मामले पर कहा कि यह तो लिखित परीक्षा की बात थी, लेकिन इन्हीं छात्रों को Viva, Interview या Extempore जैसी प्रतियोगिताओं में भी शामिल होना है. अगर वहां भी AI पर निर्भर रहे तो इन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ेगा.

मेरा मानना है कि "टेक्नीक को अपना टूल्स बनाएं, अपना दिमाग नहीं". सच्ची सफलता बेहतरीन 'प्रॉम्प्ट' टाइप करने में नहीं, बल्कि अपने माइंड को सोचने के लिए प्रेरित करने में है. AI का उपयोग केवल Reference के लिए करें, परीक्षा में पढ़ाई, रिसर्च आदि के लिए नहीं.

AI के गलत इस्तेमाल पर लगानी पड़ेगी रोक

रांची के एमिटी यूनिवर्सिटी के बीए विभाग के HOD डॉ राहुल कुमार ने कहा कि AI का यूज करना गलत नहीं है. गलत है इसका अनियंत्रित इस्तेमाल करना. स्टूडेंट्स इसका प्रयोग सोच-समझकर करें, न कि हर काम के लिए इस पर निर्भर हो जाएं.

उन्होंने कहा कि शिक्षकों को स्कूल में AI के यूज को फिक्स करना चाहिए. स्टूडेंट्स AI का यूज केवल आईडिया कलेक्ट करने या लैंग्वेज की गलतियों को दूर करने के लिए करें तो ज्यादा अच्छा होगा. स्कूल कॉलेज में छात्रों को बिना AI के आंसर राइटिंग प्रैक्टिस कराना चाहिए. कॉलेज में टॉपिक से जुड़ी प्रामाणिक पुस्तकें और लेख पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए.

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