आधी दुनिया नहीं जानती EMI का फुल फॉर्म, जान जाएंगे तो हो जाएंगे स्मार्ट !

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Emi Full Form

EMI Full Form : आज के दौर में घर, गाड़ी या नया स्मार्टफोन खरीदना EMI के कारण बेहद आसान हो गया है. जानिए EMI का फुल फॉर्म क्या है, यह आपके मासिक बजट को कैसे प्रभावित करती है और लोन लेते समय आपको किन गलतियों से बचना चाहिए.

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EMI Full Form : आज के दौर में जब भी हम कोई नया घर, कार, टू-व्हीलर या फिर कोई महंगा इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जैसे मोबाइल और लैपटॉप खरीदने की सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला शब्द आता है EMI. इस सुविधा ने मध्यम वर्ग के लोगों के लिए बड़ी और महंगी खरीदारी को बेहद आसान और पहुंच में ला दिया है. हालांकि, हर महीने किस्त चुकाने वाले बहुत से लोग अब भी EMI के फुल फॉर्म और इसके काम करने के सटीक तरीके से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं. आइए जानते हैं इससे जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात.

EMI का फुल फॉर्म और इसका मतलब क्या है?

  • पूरा नाम (Full Form): EMI का फुल फॉर्म Equated Monthly Installment होता है.
  • हिंदी में अर्थ: इसे हिंदी में ‘समान मासिक किस्त’ कहा जाता है.

सरल शब्दों में कहें तो, जब आप कोई सामान उधार (लोन) पर लेते हैं, तो उसे चुकाने के लिए हर महीने एक निश्चित तारीख को जो तय रकम बैंक या फाइनेंस कंपनी को देते हैं, वही EMI कहलाती है.

यह कैसे काम करती है ?

जब आप किसी वित्तीय संस्थान से कर्ज लेते हैं, तो आपको केवल ली गई रकम ही नहीं, बल्कि उस पर लगने वाला ब्याज भी लौटाना होता है. बैंक आपकी कुल उधार राशि (Principal) और उस पर लगने वाले कुल ब्याज (Interest) को जोड़कर, आपकी चुनी गई अवधि (Months/Years) के हिसाब से बराबर हिस्सों में बांट देता है.

उदाहरण के लिए अगर आपने 5 साल (60 महीने) की अवधि के लिए 5 लाख रुपये का कार लोन लिया है, तो बैंक ब्याज सहित कुल रकम को 60 से भाग देकर एक फिक्स मासिक राशि तय कर देगा. आपको हर महीने उसी तय राशि का भुगतान करना होगा.

EMI चुनने के 4 सबसे बड़े फायदे

  • इसके जरिए आपको किसी बड़े सामान को खरीदने के लिए सालों तक पैसे जोड़ने का इंतजार नहीं करना पड़ता. आप मामूली डाउन पेमेंट देकर सामान तुरंत घर ला सकते हैं.
  • एक साथ लाखों रुपये खर्च करने की बजाय हर महीने छोटी-छोटी किस्तें देना जेब के लिए काफी आरामदायक होता है.
  • चूंकि आपको पहले से पता होता है कि हर महीने कितनी रकम खाते से कटेगी, इसलिए आप अपना मासिक घरेलू बजट आसानी से प्लान कर सकते हैं.
  • आप अपनी आमदनी के हिसाब से किस्त चुकाने का समय (जैसे 1 साल से लेकर 30 साल तक) खुद चुन सकते हैं.

किस्त बंधवाने से पहले इन सावधानियों को कभी न भूलें

EMI जितनी सुविधाजनक है, थोड़ी सी लापरवाही के कारण यह उतनी ही बड़ी मुसीबत भी बन सकती है. इसलिए लोन लेते समय इन बातों को गांठ बांध लें.

  • ब्याज दरों की तुलना करें: अलग-अलग बैंक एक ही लोन पर अलग-अलग ब्याज वसूलते हैं. हमेशा सबसे कम ब्याज दर वाले विकल्प को चुनें.
  • छिपे हुए खर्च (Hidden Charges): लोन एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें. प्रोसेसिंग फीस, एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज और फाइल चार्ज जैसी छिपी हुई लागतों के बारे में पहले ही पता कर लें.
  • समय पर भुगतान है जरूरी: अगर आप किसी महीने की किस्त चूक जाते हैं, तो बैंक आप पर भारी जुर्माना (Late Payment Fee) तो लगाता ही है, साथ ही इससे आपका सिबिल स्कोर (CIBIL Score) भी खराब होता है, जिससे भविष्य में दोबारा लोन मिलने में दिक्कत आती है.
  • समय से पहले बंद करने के नियम (Preclosure): यदि आपके पास बीच में कहीं से पैसा आ जाता है और आप अपना लोन बंद करना चाहते हैं, तो बैंक उस पर कितना ‘फोरक्लोजर चार्ज’ लेगा, इसकी जानकारी जरूर रखें.

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अभिषेक पाण्डेय

लेखक के बारे में

By अभिषेक पाण्डेय

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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