आज ऑर्डर करने से पहले सोच लें! Swiggy, Zomato और Blinkit के डिलीवरी बॉयज की देशव्यापी हड़ताल, जानें वजह
Published by : Abhishek Pandey Updated At : 16 May 2026 1:04 PM
Swiggy-Zomato-blinkit Delivery Workers Strike : सावधान! आज स्विगी, जोमैटो और ब्लिंकिट से ऑर्डर करने में हो सकती है देरी. पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के विरोध में डिलीवरी पार्टनर्स ने आज देशव्यापी हड़ताल (चक्का जाम) का ऐलान किया है. जानें क्या हैं उनकी मांगें.
Swiggy-Zomato-blinkit Delivery Workers Strike : अगर आप आज दोपहर या शाम को स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट या जेप्टो से कुछ ऑर्डर करने की सोच रहे हैं, तो आपको लंबा इंतजार करना पड़ सकता है या हो सकता है कि आपका ऑर्डर कैंसिल हो जाए.
शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद, आज (शनिवार, 16 मई) देश भर के लाखों डिलीवरी पार्टनर्स ने 5 घंटे के चक्का जाम का ऐलान किया है. गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) के मुताबिक, आज दोपहर 12:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक ऐप-बेस्ड डिलीवरी और राइडिंग सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी.
आखिर डिलीवरी बॉयज क्यों हैं नाराज ?
सड़क पर घंटों धूप और ट्रैफिक का सामना करने वाले इन डिलीवरी पार्टनर्स के लिए पेट्रोल का महंगा होना सीधे उनके पेट पर लात पड़ने जैसा है.
- कमाई कम, खर्च ज्यादा: तेल महंगा होने का मतलब है कि अब इन वर्कर्स को अपनी जेब से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे, जिससे दिन के आखिर में घर ले जाने वाली उनकी नेट कमाई (Take-home salary) बहुत कम हो जाएगी.
- करोड़ों वर्कर्स पर असर: यूनियन का कहना है कि इस फ्यूल हाइक का सीधा असर देश के लगभग 1.2 करोड़ गिग वर्कर्स पर पड़ेगा जो अपनी आजीविका के लिए मोटरसाइकिल और स्कूटर पर निर्भर हैं.
“₹20 प्रति किलोमीटर का रेट दो” यूनियन की मांग
GIPSWU की अध्यक्ष सीमा सिंह ने इस बढ़ोतरी को वर्कर्स पर “सीधा हमला” बताया है. उन्होंने कहा, “इस भीषण गर्मी और महंगाई के बीच स्विगी, जोमैटो और ब्लिंकिट के डिलीवरी पार्टनर्स अब इस बढ़े हुए खर्च का बोझ नहीं उठा सकते.”
वर्कर्स की मुख्य मांगें क्या हैं ?
न्यूनतम सर्विस रेट: टेक कंपनियों और सरकार से मांग की गई है कि डिलीवरी का मिनिमम रेट ₹20 प्रति किलोमीटर तय किया जाए.
फ्यूल मुआवजा (Fuel Compensation): पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के अनुपात में कंपनियों की तरफ से अलग से तेल का भत्ता दिया जाए.
यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर कंपनियों और सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो बहुत से लोग इस सेक्टर को छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे, क्योंकि 10 से 14 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद भी वे अपने परिवार का खर्च नहीं चला पा रहे हैं.
कितनी बड़ी है गिग वर्कर्स की दुनिया ?
नीति आयोग (NITI Aayog) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में गिग वर्कफोर्स (फ्रीलांस या कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले लोग) बहुत तेजी से बढ़ रहा है. साल 2020-21 में इनकी संख्या जहाँ 77 लाख थी, वहीं साल 2029-30 तक इसके 2.3 करोड़ के पार जाने का अनुमान है. ऐसे में इनकी हड़ताल देश की डिजिटल इकोनॉमी को एक बड़ा झटका दे सकती है.
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अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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