एयर इंडिया में 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीद सकते हैं प्रवासी भारतीय, सरकार ने दी अनुमति

भारत सरकार आर्थिक संकट से जूझ रही सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया की सौ फीसदी हिस्सेदारी बेचना चाहती है. इसके लिए उसने बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रवासी भारतीयों के लिए 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीद की अनुमति दे दी है.
नयी दिल्ली : प्रवासी भारतीय अब आर्थिक संकट से जूझ रही सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया की 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीद सकते हैं. सरकार ने बुधवार को प्रवासी भारतीयों को एयर इंडिया में 100 फीसदी हिस्सेदारी लेने की अनुमति दे दी. सरकार एयर इंडिया में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच रही है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में मंत्रिमंडल की बैठक में प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) को एयर इंडिया में शत-प्रतिशत हिस्सेदारी लेने को मंजूरी दी गयी.
प्रवासी भारतीयों को 100 फीसदी निवेश की अनुमति देने से वृहद मालिकाना हक और प्रभावी नियंत्रण (एसओईसी) नियमों का उल्लंघन नहीं होगा. एनआरआई निवेश को घरेलू निवेश के रूप में लिया जाता है. एसओईसी रूपरेखा के तहत जो एयरलाइन किसी खास देश से दूसरे देशों के लिए उड़ान भरती है, उसमें वहां की सरकार या नागरिकों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी होनी चाहिए.
फिलहाल, एनआरआई एयर इंडिया में केवल 49 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण कर सकते हैं. एयरलाइन में सरकार की मंजूरी मार्ग के जरिये 49 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति है. मौजूदा नियमों के तहत अनुसूचित एयरलाइन में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति है. यह कुछ शर्तों पर निर्भर है. इसके तहत यह विदेशी एयरलाइन के लिये लागू नहीं होगा.
अनुसूचित एयरलाइन के मामले में खुद के जरिये 49 फीसदी एफडीआई की अनुमति है और उसके ऊपर कोई भी निवेश के लिए सरकार की मंजूरी की जरूरत होती है. सरकार ने एयर इंडिया के विनिवेश के लिए 27 जनवरी को प्रारंभिक सूचना ज्ञापन पेश किया है. इसमें एयर इंडिया और उसकी बजट एयरलाइन अनुषंगी एयर इंडिया एक्सप्रेस में 100 फीसदी हिस्सेदारी और सरकारी विमान कंपनी का एआईएसएटीएस संयुक्त उद्यम में 50 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव है. एयर इंडिया में हिस्सेदारी बेचने का यह सरकार का दूसरा प्रयास है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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