येस बैंक से बड़ा झटका : स्टॉक मार्केट में जोरदार गिरावट से इन्वेस्टर्स की डूब गयी 3.28 लाख करोड़ रुपये की पूंजी

Author : KumarVishwat Sen Published by : Prabhat Khabar Updated At : 06 Mar 2020 9:56 PM

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निजी क्षेत्र के सबसे बड़े चौथे येस बैंक पर आरबीआई की नियामकीय रोक लगने के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी में आयी जोरदार गिरावट से निवेशकों को बड़ा झटका लगा है. शुक्रवार को एक दिन में बाजार निवेशकों के 3.28 लाख करोड़ रुपये डूब गये.

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नयी दिल्ली : येस बैंक पर आरबीआई द्वारा रोक लगाये जाने की वजह से शेयर बाजारों में शुक्रवार को चली जोरदार बिकवाली के बाद आयी भारी गिरावट से निवेशकों की 3.28 लाख करोड़ रुपये की पूंजी डूब गयी. बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स दिन में कारोबार के दौरान एक समय 1,400 अंक से अधिक नीचे आ गया था. बैंकिंग, मेटल और एनर्जी सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में निवेशकों ने जमकर बिकवाली की.

बिकवाली के बीच बंबई शेयर बाजार के 30 शेयरों के सेंसेक्स की कंपनियों का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) 3,28,684.5 करोड़ रुपये घटकर 1,44,31,224.41 करोड़ रुपये रह गया. येस बैंक संकट ओर कोरोना वायरस से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर की आशंका से शुरआती कारोबार में सेंसेक्स 1,459.52 अंक टूट गया. हालांकि, बाद में यह कुछ सुधरा. अंत में सेंसेक्स 893.99 अंक के नुकसान से 37,576.62 अंक पर बंद हुआ.

येस बैंक पर रिजर्व बैंक ने कई तरह के अंकुश लगाये हैं. येस बैंक के जमाकर्ताओं के लिए निकासी की सीमा 50,000 रुपये हर महीने तय की गयी है. रिजर्व बैंक ने येस बैंक के निदेशक मंडल को भी भंग कर दिया है और उसे प्रशासक के तहत ला दिया है. शुक्रवार को येस बैंक का शेयर 56.04 फीसदी के नुकसान से 16.20 रुपये पर बंद हुआ. दिन में कारोबार के दौरान यह एक समय 85 फीसदी तक टूट गया था.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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