महंगाई ने फिर बढ़ाई टेंशन, जुलाई में CPI 4.45%, 19 महीने के हाई पर महंगाई

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खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी (Photo: AI)

जुलाई में भारत की खुदरा महंगाई 19 महीने के हाई 4.45% पर पहुंच गई है. खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़ने से आम लोगों की चिंता बढ़ी है.

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भारत में खुदरा महंगाई जुलाई में बढ़कर 4.45% पर पहुंच गई, जो 19 महीने का सबसे ऊंचा स्तर है. जून में यह 4.38% थी. महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दाम रहे. फूड इन्फ्लेशन जुलाई में बढ़कर 5.52% हो गई, जबकि जून में यह 5.32% थी.

यानी आम लोगों के घर का बजट सबसे ज्यादा खाने-पीने की चीजों की वजह से प्रभावित हो सकता है. हालांकि, कुल CPI महंगाई 4.45% रही, जो 4.4% के अनुमान के काफी करीब है.

जुलाई में किन चीजों की महंगाई बढ़ी?

जुलाई के आंकड़ों में कई जरूरी सामान और सेवाओं के दाम बढ़ते दिखे. इसका असर ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में नजर आया.

कैटेगरीजूनजुलाई
खुदरा महंगाई4.38%4.45%
फूड इन्फ्लेशन5.32%5.52%
ग्रामीण महंगाई4.74%4.84%
शहरी महंगाई3.93%3.96%
हाउसिंग2.10%2.22%
कपड़े और फुटवियर3.23%3.38%
रेस्टोरेंट और अकोमोडेशन6.91%7.72%

रेस्टोरेंट और अकोमोडेशन से जुड़ी महंगाई में खासा उछाल आया. वहीं हाउसिंग, कपड़े और फुटवियर की महंगाई भी बढ़ी.

क्या हर चीज महंगी हुई?

नहीं. कुछ कैटेगरी में राहत भी मिली. हेल्थ इन्फ्लेशन 1.42% से घटकर 1.34% हो गई. पर्सनल केयर, सोशल प्रोडक्शन और मिसलेनियस गुड्स की महंगाई भी 16.72% से घटकर 14.77% रही. इसके उलट इंफॉर्मेशन और कम्युनिकेशन सर्विसेज की महंगाई 0.43% से बढ़कर 0.63% हो गई.

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खाने-पीने की चीजों के दाम क्यों बढ़े?

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, जुलाई में फूड इन्फ्लेशन बढ़ाने में प्याज, लहसुन और अदरक की कीमतों का अहम रोल रहा. वहीं आलू और टमाटर में डिफ्लेशन देखने को मिला. पिरामल ग्रुप के चीफ इकोनॉमिस्ट देबोपम चौधरी के मुताबिक, टमाटर, प्याज, ट्रांसपोर्ट कॉस्ट, कुकिंग फ्यूल और रेस्टोरेंट की कीमतों का असर महंगाई पर पड़ा. उनका मानना है कि इनमें से कई दबाव अस्थायी हो सकते हैं.

आगे महंगाई का रुख कैसा रह सकता है?

बजाज ब्रोकिंग के फंडामेंटल एनालिस्ट शाश्वत सिंह ने कहा कि CPI जनवरी के 2.74% से लगातार बढ़कर जुलाई में 4.45% हो गई है. भू-राजनीतिक तनाव और क्रूड कीमतों में मजबूती के बीच CPI और WPI दोनों ऊपर जा रहे हैं. ब्रिकवर्क रेटिंग्स के राजीव शरण के मुताबिक, Q2 FY27 में हेडलाइन CPI औसतन 4.5-4.7% रह सकती है. सितंबर में बेस इफेक्ट की वजह से इसमें हल्की बढ़ोतरी हो सकती है. उन्होंने कहा कि आगे भी फूड इन्फ्लेशन सबसे अहम फैक्टर रहेगा. असमान मानसून और अल नीनो को लेकर अनिश्चितता भी महंगाई के लिए अहम होगी.

वहीं, अगर वेस्ट एशिया का तनाव कम होता है, तो रिटेल महंगाई RBI के दिसंबर 2026 तिमाही के 5.9% के अनुमानित पीक से नीचे रह सकती है. इससे ब्याज दरों के मोर्चे पर राहत की गुंजाइश बन सकती है.

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सौम्या शाहदेव

लेखक के बारे में

By सौम्या शाहदेव

सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.

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