24000 के ऊपर निफ्टी, कच्चे तेल में गिरावट से इन्वेस्टर्स को बड़ी राहत 

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Indian Stock Market 22 June 2026

Indian Stock Market 17 June 2026: निफ्टी 24,000 के ऊपर ट्रेड कर रहा है. क्या बाजार की यह तेजी बरकरार रहेगी? आइए जानते हैं कि फेडरल रिजर्व की बैठक और ग्लोबल संकेतों का बाजार पर क्या असर होगा.

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Indian Stock Market 17 June 2026: बुधवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए अच्छी रही. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही बढ़त के साथ खुले. इन्वेस्टर्स में उत्साह है क्योंकि निफ्टी ने 24,000 का अहम आंकड़ा पार कर लिया है. सेंसेक्स करीब 100 अंक ऊपर था. बाजार की इस खुशी के पीछे दो बड़ी वजहें हैं पहली, अमेरिका और ईरान के बीच शांति की सुगबुगाहट, और दूसरी, कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट.

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क्या कच्चा तेल सस्ता होने से महंगाई कम होगी?

बाजार को सबसे ज्यादा राहत इस बात से मिली है कि ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है. यह भाव तीन महीने के निचले स्तर पर है. इससे महंगाई और ऊर्जा की लागत को लेकर जो चिंताएं थीं, वे फिलहाल कम होती दिख रही हैं. जानकारों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें इसी तरह सामान्य बनी रहीं, तो अर्थव्यवस्था को काफी फायदा होगा.

US-Iran दोस्ती की क्या है असल कहानी?

बाजार के जानकार अजय बग्गा के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच शांति का जो नया ढांचा बन रहा है, वह इनवेस्टमेंट के माहौल को बेहतर बना रहा है. हालांकि, यह समझौता अभी बहुत शुरुआती स्तर पर है. इसके असल मायने अगले 60 दिनों में पता चलेंगे. अभी जो संकेत मिल रहे हैं, उसके अनुसार ईरान के दो तेल टैंकरों का अमेरिकी नाकेबंदी से बिना किसी रुकावट के गुजरना एक बड़ा सकारात्मक संकेत है.

आने वाले समय में:

  • शुक्रवार को इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है.
  • ईरान के फंसे हुए 24 अरब डॉलर और 300 अरब डॉलर के आर्थिक पैकेज पर बातचीत होनी बाकी है.
  • स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से खदानें हटाने और तेल के बुनियादी ढांचे को फिर से शुरू करने में समय और बड़े निवेश की जरूरत होगी.
  • इसमें अमेरिकी, यूरोपीय कंपनियों के साथ-साथ भारतीय और चीनी कंपनियों के लिए भी निर्माण (reconstruction) के नए मौके खुल सकते हैं.

फेडरल रिजर्व की बैठक से क्या उम्मीद करें?

आज सबकी नजरें अमेरिका के ‘फेडरल रिजर्व’ की पॉलिसी मीटिंग पर टिकी हैं. यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि यह नए चेयरमैन केविन वॉर्श की पहली मीटिंग है. बाजार को पूरी उम्मीद है कि ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा और ये 3.50-3.75 प्रतिशत पर ही बनी रहेंगी.

इन्वेस्टर्स की असली चिंता यह है कि क्या फेड अब भी नरमी का रुख अपनाएगा, क्योंकि अमेरिका में महंगाई पिछले तीन सालों में सबसे ज्यादा 4.2 प्रतिशत पर पहुंच गई है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि निफ्टी अगर 24,000 के ऊपर मजबूती से टिका रहता है, तो आगे और तेजी की उम्मीद की जा सकती है.

बाजार के जानकारों का कहना है कि अभी सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि फेड का फैसला और ग्लोबल संकेत बाजार की चाल को कभी भी बदल सकते हैं.

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