क्या सचमुच निवेशकों का भरोसा भारतीय शेयर बाजार से डगमगा रहा हैं ? आखिर क्या गड़बड़ हो गई, पढ़े
भारतीय शेयर बाज़ार, जो कभी मजबूत प्रदर्शन के लिए जाना जाता था, पिछले कुछ समय से फीका पड़ता दिख रहा है. आइए इसके पीछे के कारणों को विस्तार से जानें और भविष्य की संभावनाओं पर विचार करें.
लेखक- शिवपूजन सिंह
हिंदुस्तान दुनिया की एक मजबूत और छठी अर्थव्यवस्था का ओहदा रखता हैं. यहां संभावनाएं अपार और असीमित हैं. यह दुनिया का बड़ा बाजार हैं, जहां हर देश कारोबार करने की हसरत और हुनर आजमाना चाहता हैं. भारत के शेयर बाजार ने भी पिछले एक दशक के प्रदर्शन को देखे तो बेहतरीन रिटर्न्स दिया और निवेशकों को बेशुमार दौलत दी हैं. हालांकि पिछले एक-डेढ़ साल से प्रदर्शन फीका और बेरंग हैं.जिसके चलते तरह-तरह के कयास और बाते हो रही हैं.
भारतीय बाजार का मौजूदा हाल
इंडेक्स निफ्टी और सेंसेक्स आए दिन लाल निशान पर ही बंद हो रहें और पिछले एक साल का रिटर्न्स देखे तो उनके पिछले कद के माफिक कही नहीं ठहरता. निफ्टी-50 इंडेक्स ने पिछले एक साल में -4.31% नकारात्मक रिटर्न्स दिया हैं. यानी बाजार में लगाया हुआ पैसा मुनाफा नहीं दिया. हालांकि इस दरमियान कई वजहें भी रहें, जिसकी वजह से ये बुरा हाल बाजार का रहा.अभी आगे क्या होगा ये कहना मुश्किल ही हैं क्योंकि साजगार माहौल और मुफिद परिस्थितियां तो फिलहाल उतनी नहीं दिखती हैं.
सर्वे में आकर्षक नहीं दिख रहा बाजार
अगस्त महीने में बैंक ऑफ अमेरिका के फण्ड मैनेजर्स के सर्वे में यह सामने आया कि एशिया के शेयर बाजार में भारतीय शेयर बाजार उतना आकर्षक और लुभाने वाला निवेशकों को नहीं लग रहा हैं. भारत ने इंडोनेशिया के शेयर बाजार से भी कमतर और कमजोर आंका गया और अंडरवेट माना गया. जो निवेशकों के लिए सबसे कम पसंदीदा बना.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक सर्व में शामिल 32 प्रतिशत निवेशक भारतीय शेयर्स को लेकर अंडरवेट थे. वही एशियाई बाजार में निवेशकों की पसंद जापान और ताइवान सबसे अच्छे थी.
ये आंकड़े इसीलिए ज्यादा मायने रखते हैं कि दुनिया में निवेशकों की सोच बदल रहीं हैं. उनकी नजर में भारतीय बाजार अभी पैसा लगाने के लिए उतनी बेहतर जगह नहीं हैं.
AI बनी सबसे बड़ी वजह
सवाल हैं कि आखिर क्या हो गया कि भारतीय बाजार निवेशकों को लुभावना और लचीला नहीं लग रहा.इसके पीछे वजह आर्टिफिशल इंटेलिजेन्स यानि AI को मानी जा रही हैं. भारतीय कंपनियां इसे लेकर पिछड़ रहीं हैं. हाल के दिनों में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के चलते कई बाजारों में तेजी दिखी. खासकर साउथ कोरिया और ताइवान आगे रहा. इसके पीछे सेमीकंडक्टर, AI जैसी तकनीकी काफी फायदेमंद और असरकारी रहीं. भारत के प्रमुख शेयर सूचकांको में ऐसी कंपनियां AI तकनीकी को भाव देने में फिसल गई हैं, जिसके चलते विदेशी संस्थागत निवेशक पैसा लगाने में उतनी दिलचस्पी नहीं दिखा रहें. हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार से भारी बिकवाली के चलते शेयर बाजार में गिरावट की प्रमुख कारणों में से एक रहा.
आर्थिक वृद्धि और हाई वैल्यूएशन
दूसरी बातों पर गौर करें तो भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर भी अभी निवेशक उतने आशावादी नहीं दिखलाई पड़े रहें. हालांकि दीर्घकालिक नजरिये को ख़ारिज भी नहीं कर रहें. लेकिन मौजूदा वक्त में उतनी उम्मीद नहीं रखे हुए हैं. एक बात यहां निवेशकों को यह भी लग रही हैं कि भारतीय शेयर्स के मूल्य ज्यादा हैं यानी हाई वैल्यूएशन उनकी नजर में हैं.जहां कमाने के अवसर कम हैं. लिहाजा इसीलिए भी विदेशी फण्ड मैनेजर यहां कमाई कम देख रहें हैं, इस कारण भी पैसा लगाने से हिचक और डर रहें हैं.
आगे कैसा रहेगा भारतीय बाजार?
सवाल हैं कि क्या सबकुछ ठीक भारतीय शेयर बाजार में नहीं चल रहा हैं? यह अब पहले जैसा रफ्तार नहीं भरेगा? पैसा आगे यहां बनना मुश्किल होने वाला हैं? लेकिन सच्चाई यही हैं कि ऐसी बात नहीं हैं. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट का एक पहलू सकारात्मक भारतीय बाजार को लेकर यह था कि निफ्टी-50 इंडेक्स में शामिल कंपनियों के तिमाही नतीजे की कमाई पिछले साल की समान अवधि में 18 प्रतिशत बढ़ी हैं, जो की एक बेहतरीन संकेत हैं, जो बाजार की बुनियाद को मजबूत और निवेश की संभावनाओं को बल देगा. चालू तिमाही में विदेशी फण्ड मैनेजरों चार अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश भी किया. जो एक जबरदस्त पहलू भी हैं.
कच्चे तेल की कीमत का असर
भारत के लिए कच्चा तेल काफी मायने रखता क्योंकि देश अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता हैं. मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में काफी इजाफा हुआ. जिसके चलते महंगाई भी दिखी.आयात बिल भी बढ़ा, रुपये पर इसका दबाव भी देखा गया. इस कारण भी बाजार लाल निशान पर ज्यादा बंद होता दिखा इसके अलावा वैश्विक ब्याज दरों, रुपये का अवमूल्य, भू -राजनीतिक हालात भी काफी दिक्कतें पैदा की.
आगे बाजार में आएगी बहार
क्या आगे ऐसे हालात बने रहेंगे तो इसका जवाब बिल्कुल साफ हैं कि ऐसा नहीं होगा. मौजूदा वक्त में यह चुनौतियां सिर उठाये हुए हैं. जो समय के साथ बेहतर होते जाएगी. ऐसी स्थिति दुनिया के किसी भी देश के बाजारों में आते रहती हैं, लेकिन एक जैसा कभी नहीं रहता. क्योंकि यह बाजार की प्रकृति हैं. यह कहे रफ्तार और लड़खड़ाट हिस्सा हैं.
इधर विदेशी निवेशक अपने फायदे के हिसाब से अलग -अलग और बेहतर बाजार तलाश कर निवेश करते रहते हैं, जिससे की उनका मुनाफा होता रहें. इसीलिए अभी भारतीय बाजार लाभकारी नहीं दिख रहा हैं तो आगे भी ऐसा रहें यह कहना बेमानी और बेतुका हैं.
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