FAQ : कल से बैंकों में बदले जायेंगे 2000 रुपये के नोट, अपने सवालों का जवाब जानने के लिए पढ़ें आरबीआई का जवाब
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 20 May 2023 3:39 PM
बैंकों में दो हजार रुपये के नोट जमा करने और बदले जाने की व्यवस्था 23 मई से शुरू होगी. RBI की इस घोषणा के बाद जिन लोगों के पास दो हजार रुपये के नोट हैं और जिन लोगों के पास नहीं हैं उनके मन में भी कई सवाल उठ रहे हैं और जिनका सही जवाब वे जानना चाहते हैं.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को यह घोषणा की कि 2,000 रुपये का नोट अब चलन से बाहर हो जायेगा. इस मूल्य के नोट बैंकों में जाकर 30 सितंबर तक जमा किये जा सकेंगे या बदले जा सकेंगे. बैंकों में दो हजार रुपये के नोट जमा करने और बदले जाने की व्यवस्था 23 मई यानी कल से शुरू होगी. RBI की इस घोषणा के बाद जिन लोगों के पास दो हजार रुपये के नोट हैं और जिन लोगों के पास नहीं हैं उनके मन में भी कई सवाल उठ रहे हैं और जिनका सही जवाब वे जानना चाहते हैं. लोगों के सवालों को देखते हुए आरबीआई ने अपनी अधिकारिक वेबसाइट पर कुछ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब अपलोड किये हैं, जिनके बारे में हम आपको जानकारी दे रहे हैं.
1. 2000 रुपये के नोट वापस क्यों लिये जा रहे हैं?
भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 24(1) के तहत नवंबर 2016 में 2000 रुपये के बैंकनोट की शुरुआत की गयी थी. उस वक्त सरकार ने 500 और 1000 रुपये के नोट को वापस लेने की घोषणा की थी. उस वक्त देश की अर्थव्यवस्था की मुद्रा आवश्यकता को शीघ्रता से पूरा करने के उद्देश्य से दो हजार रुपये की शुरुआत की गयी थी. 2018-19 में दो हजार रुपये के बैंक नोटों की छपाई बंद कर दी गई थी. अधिकांश 2000 रुपये के नोट मार्च 2017 से पहले जारी किये गये थे. यह देखा गया है कि इस मूल्यवर्ग के नोट का आमतौर पर लेन-देन के लिए उपयोग नहीं किया जाता है. इसके अलावा, जनता की मुद्रा आवश्यकता को पूरा करने के लिए अन्य मूल्यवर्ग के बैंक नोटों का स्टॉक पर्याप्त बना हुआ है. अत: रिजर्व बैंक ने 2000 हजार रुपये के बैंक नोट का चलन बंद करने का निर्णय लिया है.
2. स्वच्छ नोट नीति क्या है?
यह आरबीआई द्वारा जनता को अच्छी गुणवत्ता वाले बैंक नोटों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अपनाई गयी नीति है. भारतीय रिजर्व बैंक ने 1988 में स्वच्छ नोट नीति पेश की थी, इसके प्रभाव से नकली नोटों के चलन पर काफी अंकुश लगाया गया.
3. क्या 2000 के नोटों की वैधता अभी बनी हुई है?
रिजर्व बैंक का कहना है कि 2000 रुपये के नोटों की वैधता बनी हुई है. 2000 रुपये के नोट वैध बने रहेंगे.
4. क्या सामान्य लेनदेन के लिए 2000 रुपये के नोटों का उपयोग किया जा सकता है?
हां. आम नागरिक लेन-देन के लिए 2000 रुपये के नोटों का इस्तेमाल जारी रख सकता है , लेकिन उन्हें 30 सितंबर, 2023 तक इन नोटों को बैंक में जाकर जमा कर देना चाहिए या बदल लेना चाहिए.
5. आम नागरिक जिनके पास 2000 रुपये का नोट है वे उन नोटों का क्या करें?
देश के जिस भी व्यक्ति के पास 2000 रुपये का नोट है वे उसे जाम करने या बदलने के लिए बैंक शाखाओं से संपर्क करें. सभी बैंकों में 30 सितंबर 2023 तक 2000 रुपये के नोटों को बदलने और जमा करने की सुविधा उपलब्ध होगी.
6. क्या बैंक खातों में 2000 रुपये के नोट जमा करने की कोई सीमा है?
बैंकों में 2000 रुपये के नोट जमा करने की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गयी है. लेकिन इसके लिए केवाईसी की प्रक्रिया को पूरा करना होगा.
7. क्या 2000 रुपये के नोट को बदलने के लिए भी कोई सीमा तय की गयी है?
जी हां. एक व्यक्ति एक बार में 20 हजार रुपये मूल्य के नोट यानी दस नोट को ही बैंक में बदल सकता है.
8. क्या सीएसपी के बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट के जरिये 2000 रुपये के नोट बदले जा सकते हैं?
जी हां. सीएसपी के के बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट के जरिये खाताधारक प्रतिदिन 4000 रुपये तक के नोट को बदल सकते हैं.
9. दो हजार रुपये के नोट को बदलने की सुविधा कब से मिलेगी?
23 मई, 2023 से बैंक शाखाओं या आरबीआई के क्षेत्रीय कार्यालयों से नोटों को बदलने की सुविधा दी जायेगी.
10. क्या बैंक से 2000 रुपये के नोट को बदलने के लिए बैंक का ग्राहक होना आवश्यक है?
नहीं. जिस भी व्यक्ति के पास दो हजार रुपये का नोट है वह किसी भी बैंक की शाखा जाकर 20 हजार रुपये तक के नोट को बदल सकता है.
11. अगर किसी के पास 20 हजार से अधिक के दो हजार के नोट हों और उन्हें किसी व्यवसाय या अन्य उद्देश्यों के लिए 20,000 से अधिक नकद की आवश्यकता हो?
अगर किसी व्यक्ति के पास 20 हजार से अधिक के दो हजार के नोट हों और उन्हें पैसे की जरूरत हो तो उनके पास यह विकल्प है कि वे उन रुपयों को बैंक में जमा करा दें और अपनी जरूरत के अनुसार नकद पैसे बैंक से प्राप्त कर लें.
12. क्या दो हजार रुपये का नोट बदलने के लिए कोई शुल्क देना होगा?
नहीं. नोट बदलने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा.
13. क्या वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों को नोट बदलने की प्रक्रिया में कोई छूट मिलेगी?
बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे 2000 रुपये के नोटों को बदलने और जमा करने आने वाले वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों की मदद करने और जहां तक संभव हो उनकी मांग शीघ्र पूरी करें.
14. अगर 30 सिंतबर तक नोट नहीं बदले जा सके तो क्या होगा?
बैंक ने जनता को चार महीने तक का समय दिया है, जो नोट बदलने और जमा करने के लिए पर्याप्त है. इन हालत में बैंक सबको प्रोत्साहित करता है कि वे इस अवधि का उपयोग करें और नोट को जमा करें और बदल लें.
15. अगर कोई बैंक दो हजार रुपये के नोट को जमा करने और बदलने से मना कर दे तो क्या होगा?
अगर कोई बैंक दो हजार रुपये के नोट को जमा करने या बदलने से मना करता है तो इस स्थिति में सबसे पहले ग्राहक को उसी बैंक में शिकायत करनी चाहिए. अगर बैंक शिकायत दर्ज होने के 30 दिनों के भीतर जवाब नहीं देता और अगर शिकायत कर्ता जवाब से संतुष्ट नहीं है तो वो रिजर्व बैंक से शिकायत कर सकता है. वह अपनी शिकायत cms.rbi.org.in पर दर्ज करा सकता है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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