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कारोबारियों के लिए इन कारणों से बढ़ सकती है टीडीएस कटौती की दर, अक्टूबर से टैक्स के नए नियम होंगे प्रभावी…

पटना: अमेजन, फ्लिपकार्ट और अन्‍य इ-कॉमर्स ऑपरेटर के कारोबारी एक अक्तूबर, 2020 से टीडीएस की कटौती करेंगे. फाइनेंस बिल 2020 में आयकर की धारा 1940 के तहत लाये गये नये नियम एक अक्टूबर, 2020 से प्रभावी हो रहे हैं. इसके तहत इ-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने माल की बिक्री करने वाले कारोबारियों से इ-कॉमर्स ऑपरेटर टीडीएस की कटौती करेगा. इसकी दर कुल भुगतान का एक फीसदी निर्धारित की गयी है. इसके लिए वैसे कारोबारियों को अपना पैन इ-कॉमर्स ऑपरेटर को उपलब्ध कराना होगा. अगर पैन नहीं दिया जाता है, तो टीडीएस कटौती की दर पांच फीसदी होगी.

पटना: अमेजन, फ्लिपकार्ट और अन्‍य इ-कॉमर्स ऑपरेटर के कारोबारी एक अक्तूबर, 2020 से टीडीएस की कटौती करेंगे. फाइनेंस बिल 2020 में आयकर की धारा 1940 के तहत लाये गये नये नियम एक अक्टूबर, 2020 से प्रभावी हो रहे हैं. इसके तहत इ-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने माल की बिक्री करने वाले कारोबारियों से इ-कॉमर्स ऑपरेटर टीडीएस की कटौती करेगा. इसकी दर कुल भुगतान का एक फीसदी निर्धारित की गयी है. इसके लिए वैसे कारोबारियों को अपना पैन इ-कॉमर्स ऑपरेटर को उपलब्ध कराना होगा. अगर पैन नहीं दिया जाता है, तो टीडीएस कटौती की दर पांच फीसदी होगी.

इ-कॉमर्स ऑपरेटर करेगा टीडीएस की कटौती

इस संबंध में वरीय चार्टर्ड अकाउंटेंट राजेश खेतान ने बताया कि सरकार डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दे रही है, जिससे आम उपभोक्ता अपनी दैनिक आवश्यकता की भी खरीदारी इ- कॉमर्स पोर्टल से कर रहा है. ऐसे प्लेटफॉर्म पर कोई भी माल बेचने वाला कारोबारी अपने आप को लिस्ट करा सकता है और उस पर मिले ऑर्डर को सीधा खरीदार को भेज देता है. माल भेजने की भी सभी व्यवस्था इ-कॉमर्स ऑपरेटर ही करता है. ऐसी स्थिति में उपभोक्ता से प्राप्त राशि‍ जब व्यापारी के खाते में भेजी जायेगी, तब ऑपरेटर द्वारा टीडीएस की कटौती कर ली जायेगी, जिससे वैसे कारोबारियों के लिए अपने टैक्स रिटर्न जमा कराने की बाध्यता हो जायेगी. इस जरिये से होने वाली संभावित कर की चोरी पर लगाम लगाया जा सकेगा.

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टैक्स की चोरी नहीं हो सकेगी

यहां यह भी स्पष्ट कर दें की ऐसे मामलों में जीएसटी की चोरी रोकने के लिए जीएसटी के तहत टीडीएस काटने के व्यवस्था पहले से ही लागू है. खेतान ने बताया की हालांकि ऐसे मामलों में अगर माल बेचने वाला साल में पांच लाख से कम के माल की बिक्री करता है और वह प्रोपराइटर या एचयूएफ के जरिये से बिक्री करता है, तो उसे पैन का ब्यौरा देने के बाद इससे छूट मिल जायेगी. साथ ही अगर कोई बहुत बड़े पैमाने पर बिक्री करता है, तो वह आयकर विभाग से नो डिडक्शन सर्टिफिकेट भी ले सकता है. लेकिन किसी भी हालत में कारोबारी बिक्री छुपा कर टैक्स की चोरी नहीं कर पायेगा.

पैन या आधार नहीं रहने की हालत में घाटा 

उन्‍होंने बताया कि इसके साथ ही यदि कोई कारोबारी किसी वैसे कारोबारी से जिसका सालाना कारोबार दस करोड़ रुपये से ज्यादा है और साल में 50 लाख रुपये से अधिक का माल खरीदता है, तो उसे इनकम टैक्स के रूप में 0.1 फीसदी टीसीएस भी देना होगा. पैन या आधार नहीं रहने की हालत में यह दर एक फीसदी हो जायेगी. यह नियम भी एक अक्तूबर से प्रभावी हो जायेगा.

Posted by : Thakur Shaktilochan Shandilya

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Prabhat Khabar News Desk
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