Budget 2026 : क्या खुलेगा वित्त मंत्री का पिटारा? 2027 तक 25,000 जन औषधि केंद्र खोलने का टारगेट
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (File Photo)
Budget 2026 : 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट 2026 की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. जब बजट की बात होती है, तो स्वास्थ्य क्षेत्र भी पीछे नहीं रहता. प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) पर भी वित्त मंत्री कुछ बड़ी घोषणा कर सकतीं हैं.
Budget 2026 : प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है. यह ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% कम कीमत पर हाई क्वालिटी वाली जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराती है. परियोजना के तहत 30 जून 2025 तक कुल 16,912 जन औषधि केंद्र (जेएके) खोले जा चुके हैं. इसकी जानकारी पीआईबी की ओर से दी गई है. इस योजना में 2,110 दवाइयां और 315 सर्जिकल, मेडिकल कंज्यूमेबल और इक्विपमेंट शामिल हैं.
इस योजना में सभी मुख्य तरह की दवाइयां शामिल हैं, जैसे हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, संक्रमण, एलर्जी, पेट से जुड़ी दवाइयां और न्यूट्रास्युटिकल्स. लैब के लिए जरूरी कैमिकल और वैक्सीन छोड़कर, जरूरी जेनेरिक दवाइयों की सूची में मौजूद लगभग सभी दवाइयां यहां उपलब्ध हैं.
जेएके के लिए एक केंद्रीय गोदाम, चार क्षेत्रीय गोदाम हैं
जन औषधि केंद्र (जेएके) में दवाइयों की लगातार आपूर्ति और उपलब्धता बनाए रखने के लिए पूरी तरह आईटी-सक्षम सप्लाई चेन बनाई गई है. इसमें एक केंद्रीय गोदाम, चार क्षेत्रीय गोदाम और पूरे देश में 39 डिस्ट्रीब्यूटर शामिल हैं. 400 जल्दी बिकने वाली दवाइयों की रेगुलर मॉनिटरिंग की जाती है ताकि ये हमेशा उपलब्ध रहें. इसके अलावा, 200 दवाइयों के लिए न्यूनतम स्टॉक तय किया गया है, जिसमें योजना की 100 सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाइयां और मार्केट में 100 तेजी से बिकने वाली दवाइयां शामिल हैं.
सरकार ने क्यों शुरू की प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना?
सरकार ने लोगों को किफायती दामों पर अच्छी गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाइयां देने के लिए यह योजना शुरू की है. पिछले 11 सालों में इस योजना की वजह से नागरिकों को ब्रांडेड दवाओं की तुलना में करीब ₹38,000 करोड़ की बचत हुई है. इससे परिवारों को अपनी जेब से होने वाले स्वास्थ्य खर्च में बड़ी कमी आई है, जो 2014-15 में कुल स्वास्थ्य खर्च का 62.6% था, वह 2021-22 में घटकर 39.4% रह गया.
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मार्च 2027 तक 25,000 जन औषधि केंद्र खोलने का टारगेट
जन औषधि दवाइयों की पहुंच बढ़ाने और लोगों के खर्च को कम करने के लिए सरकार ने मार्च 2027 तक 25,000 जन औषधि केंद्र खोलने का टारगेट रखा है. इसके लिए सरकार ने फ्रेंचाइजी मॉडल अपनाया है, जिसमें ब्लॉकों और तहसीलों से कोई एंटरप्रेन्योर, एनजीओ, सोसायटी, ट्रस्ट, फर्म या प्राइवेट कंपनियां वेबसाइट (www.janaushadhi.gov.in) के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं.
| क्रम संख्या | राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | 30.6.2025 तक खोले गए JAK की कुल संख्या |
|---|---|---|
| 1 | अंडमान व नोकोबार द्वीप समूह | 9 |
| 2 | आंध्र प्रदेश | 281 |
| 3 | अरुणाचल प्रदेश | 35 |
| 4 | असम | 179 |
| 5 | बिहार | 900 |
| 6 | चंडीगढ़ | 14 |
| 7 | छत्तीसगढ़ | 316 |
| 8 | दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव | 40 |
| 9 | दिल्ली | 552 |
| 10 | गोवा | 22 |
| 11 | गुजरात | 812 |
| 12 | हरियाणा | 465 |
| 13 | हिमाचल प्रदेश | 75 |
| 14 | जम्मू और कश्मीर | 335 |
| 15 | झारखंड | 163 |
| 16 | कर्नाटक | 1,480 |
| 17 | केरल | 1,629 |
| 18 | लद्दाख | 2 |
| 19 | लक्षद्वीप | 1 |
| 20 | मध्य प्रदेश | 592 |
| 21 | महाराष्ट्र | 723 |
| 22 | मणिपुर | 61 |
| 23 | मेघालय | 26 |
| 24 | मिजोरम | 15 |
| 25 | नागालैंड | 22 |
| 26 | ओडिशा | 753 |
| 27 | पुदुचेरी | 33 |
| 28 | पंजाब | 520 |
| 29 | राजस्थान | 545 |
| 30 | सिक्किम | 12 |
| 31 | तमिलनाडु | 1,432 |
| 32 | तेलंगाना | 203 |
| 33 | त्रिपुरा | 31 |
| 34 | उत्तर प्रदेश | 3,550 |
| 35 | उत्तराखंड | 331 |
| 36 | पश्चिम बंगाल | 753 |
| कुल | 16,912 |
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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