Corona crisis के बीच बड़ी राहत : बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर 61.5 रुपये हो गया सस्ता, जानिए कितना देना होगा पैसा...?
Author : KumarVishwat Sen Published by : Prabhat Khabar Updated At : 01 Apr 2020 5:28 PM
बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी ही राहतभरी खबर है और वह यह कि बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर सस्ता हो गया है.
नयी दिल्ली : बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी ही राहतभरी खबर है और वह यह कि बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर सस्ता हो गया है. वजह यह है कि बिना सब्सिडी के बाजार मूल्य आधारित रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में 61.5 रुपये की कटौती की गयी है. अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट के अनुरूप देश में भी एलपीजी सिलेंडर सस्ते किये गये हैं. दिल्ली में अब बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर का दाम 744 रुपये प्रति सिलेंडर पर आ गया है.
बता दें कि उपभोक्ताओं को सालाना 14.2 किलोग्राम के 12 सिलेंडर सब्सिडी वाली कीमत पर मिलते हैं. उसके बाद जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता बाजार कीमत पर सिलेंडर खरीदते हैं. सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों की अधिसूचना के अनुसार मार्च से यह बाजार मूल्य आधारित सिलेंडर कीमत में दूसरी कटौती है. इससे पहले, एक मार्च को सिलेंडर के दाम 53 रुपये घटाये गये थे. वहीं, फरवरी में बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम में 144.5 रुपये की भारी वृद्धि की गयी थी. इन दो कटौतियों के बाद भी सिलेंडर का दाम फरवरी के स्तर से ऊंचा है.
देश में रसोई गैस सिलेंडर बाजार मूल्य पर बेचा जाता है. सब्सिडी के पात्र ग्राहकों के बैंक खातों में सब्सिडी का पैसा भेजा जाता है. अधिसूचना के अनुसार, व्यावसायिक इस्तेमाल वाले रसोई गैस सिलेंडर का दाम भी घटकर 1,381.50 रुपये से 1,285 रुपये पर आ गया है.
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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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