खत्म हुई मेमोरेंडम जमा करने की तारीख, 8वें वेतन आयोग में इतनी बढ़ सकती है न्यूनतम बेसिक सैलरी

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खत्म हुई मेमोरेंडम जमा करने की तारीख, 8वें वेतन आयोग में इतनी बढ़ सकती है न्यूनतम बेसिक सैलरी

8th Pay Commission : 8वें वेतन आयोग के गठन की दिशा में पहला बड़ा चरण पूरा हो चुका है. विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी संगठनों और पेंशनभोगी यूनियनों द्वारा अपनी मांगें और मेमोरेंडम (प्रस्ताव) सौंपने की आखिरी तारीख 15 जून को खत्म हो गई है. अब पूरा फोकस इस बात पर शिफ्ट हो गया है कि आयोग कर्मचारियों की इन मांगों में से किसे स्वीकार करता है और किसे खारिज.

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8th Pay Commission : देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से जुड़ी एक बहुत बड़ी अपडेट सामने आई है. वेतन आयोग के समक्ष अपनी मांगों के मेमोरेंडम और प्रस्ताव ऑनलाइन जमा करने की अंतिम तारीख 15 जून को समाप्त हो चुकी है.

आयोग ने पहले ही साफ कर दिया था कि इस तारीख को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और ईमेल या हार्ड कॉपी के जरिए भेजे गए प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया जाएगा.

प्रस्ताव जमा होने के साथ ही पहला चरण पूरा हो गया है. अब गेंद आयोग के पाले में है, जो यह तय करेगा कि नए पे-मैट्रिक्स (Pay Matrix) में कर्मचारियों की कौन सी मांगें शामिल की जानी चाहिए. आइए जानते हैं कि कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने कौन सी सबसे बड़ी मांगें रखी हैं.

न्यूनतम बेसिक सैलरी में भारी बढ़ोतरी की मांग

8वें वेतन आयोग के सामने सबसे बड़ी लड़ाई इस बात को लेकर है कि कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी (Minimum Basic Pay) तय करने का फॉर्मूला क्या होना चाहिए.

  • पुराना फॉर्मूला हुआ आउटडेटेड : ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) सहित कई बड़े संगठनों का तर्क है कि अभी तक सैलरी तय करने के लिए जिस पारंपरिक उपभोग पैटर्न (Consumption Pattern) का इस्तेमाल होता आया है, वह आज के आधुनिक दौर की वित्तीय वास्तविकताओं से मेल नहीं खाता.
  • खर्चों का बदला स्वरूप : यूनियनों का कहना है कि आज के समय में एक सरकारी कर्मचारी को बच्चों की उच्च शिक्षा, महंगे इलाज, होम लोन, इंटरनेट-डिजिटल कनेक्टिविटी, ट्रांसपोर्टेशन और बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल पर भारी रकम खर्च करनी पड़ती है.
  • 3 की जगह 5 फैमिली यूनिट का फॉर्मूला : कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि सैलरी तय करते समय आश्रितों की संख्या गिनने के लिए मौजूदा ‘3-फैमिली-परिजनों’ के फॉर्मूले को बदलकर ‘5-फैमिली-परिजनों’ का किया जाए, क्योंकि आज के सामाजिक ताने-बाने में कर्मचारियों पर आश्रितों का बोझ काफी बढ़ गया है.

खाने के खर्च और कैलोरी वाले फॉर्मूले पर उठे सवाल

पहले के वेतन आयोग न्यूनतम मजदूरी और वेतन तय करने के लिए भोजन की जरूरतों (जैसे एक मानक परिवार के लिए 3,490 कैलोरी का नियम), कपड़े और मकान के किराए को मुख्य आधार मानते थे.

कर्मचारी संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि केवल खाने-पीने की कैलोरी से आज के जीवन स्तर को नहीं मापा जा सकता. आज के समय में बेहतर रहन-सहन, तकनीकी खर्च और जरूरी पोषण स्तर को ध्यान में रखकर ही नई न्यूनतम सैलरी का निर्धारण किया जाना चाहिए.

फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.83 करने की मांग

नए वेतन आयोग के तहत सैलरी रिवीजन के लिए इस्तेमाल होने वाला ‘फिटमेंट फैक्टर’ (Fitment Factor) सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है.

संगठन / आयोगप्रस्तावित / मौजूदा फिटमेंट फैक्टरकर्मचारियों का मुख्य तर्क
प्रमुख कर्मचारी संगठन3.83 गुनामहंगाई (Inflation) और जीवन यापन की लागत में भारी बढ़ोतरी के चलते 7वें वेतन आयोग का गुणांक अब नाकाफी है.
IRTSA (रेलवे टेक्निकल एसोसिएशन)अलग-अलग स्तर के लिए अलग फिटमेंट फैक्टरएक समान (Single) फिटमेंट फैक्टर से विभिन्न पे-लेवल की विसंगतियां दूर नहीं होतीं, इसलिए अलग-अलग श्रेणियां बनाई जाएं.
7वां वेतन आयोग (मौजूदा)2.57 गुनावर्तमान में इसी गुणांक के आधार पर कर्मचारियों की बेसिक सैलरी तय होती है.

मूल वेतन (Basic Pay) में 60% डीए को मर्ज करने का प्रस्ताव

केंद्रीय कर्मचारियों की एक और बड़ी मांग यह है कि 8वें वेतन आयोग का नया पे-स्ट्रक्चर लागू होने से ठीक पहले मौजूदा महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक सैलरी में मर्ज (विलय) कर दिया जाए. वर्तमान में महंगाई भत्ता बढ़कर 60% तक पहुंच चुका है. नेशनल काउंसिल-जेसीएम (NC-JCM) ने अपने मेमोरेंडम में तर्क दिया है कि लगातार बढ़ती महंगाई ने कर्मचारियों की वास्तविक क्रय शक्ति (Purchasing Power) को कम कर दिया है. इसलिए संचित महंगाई के प्रभाव को नए पे-मैट्रिक्स में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को नुकसान न हो.

OPS, NPS और UPS पर तकरार जारी

वेतन के साथ-साथ पेंशन सुरक्षा भी इस बार एक बड़ा मुद्दा है.

  • पुरानी पेंशन (OPS) की बहाली: ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) अपनी इस मांग पर कायम है कि नई पेंशन योजना (NPS) के बाजार आधारित रिटर्न पर निर्भर रहने के बजाय कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) की तरह निश्चित सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए. अन्य कर्मचारी संगठनों ने भी सेवानिवृत्ति के बाद की सुरक्षा को मजबूत करने और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के प्रावधानों में और बेहतर सुधार करने की मांग आयोग के सामने उठाई है.

अब आगे क्या होगा ?

प्रस्तावों की समय-सीमा समाप्त होने के बाद, अब 8वां वेतन आयोग कर्मचारियों, पेंशनभोगी समूहों और सभी संबंधित पक्षों द्वारा सौंपे गए इन दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन करेगा. आयोग अपनी अगली समीक्षा बैठकों और दौरों का सिलसिला जारी रखेगा.

इसी कड़ी में कोलकाता में कई अहम बैठकें निर्धारित हैं, जहां केंद्र सरकार के विभिन्न संस्थानों, यूनियनों और एसोसिएशनों के प्रतिनिधि व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आयोग के सामने अपना पक्ष और दलीलें पेश करेंगे. देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों के लिए यह अगला चरण बेहद निर्णायक होने वाला है.

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अभिषेक पाण्डेय

लेखक के बारे में

By अभिषेक पाण्डेय

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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