प्लास्टिक मुद्रा के इस्तेमाल की तरफ बढने की जरुरत : अरुण जेटली
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Jun 2015 3:55 PM
नयी दिल्ली : वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज प्लास्टिक मुद्रा के अधिक इस्तेमाल का समर्थन किया और साथ ही कहा कि हौशंगाबाद व मैसूर में नयी इकाइयों की स्थापना से नोट मुद्रण के कागज के लिए आयात पर निर्भरता कम होगी. उन्होंने कहा, ‘विकसित देश ज्यादा से ज्यादा प्लास्टिक मुद्रा व पेमेंट गेटवे की […]
नयी दिल्ली : वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज प्लास्टिक मुद्रा के अधिक इस्तेमाल का समर्थन किया और साथ ही कहा कि हौशंगाबाद व मैसूर में नयी इकाइयों की स्थापना से नोट मुद्रण के कागज के लिए आयात पर निर्भरता कम होगी. उन्होंने कहा, ‘विकसित देश ज्यादा से ज्यादा प्लास्टिक मुद्रा व पेमेंट गेटवे की ओर बढे हैं. मेरी राय में भारत के लिए भी जरुरत है और हम धीरे-धीरे इस दिशा में बढने के लिए कदम उठाने को प्रतिबद्ध हैं.’
जेटली यहां ‘मेक इन इंडिया- मुद्रा का स्वदेशीकरण’ पर एक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. वित्त मंत्री ने कहा कि देश को पुरानी प्रणालियों को छोडते हुए भविष्य की प्रौद्योगिकी को अपनाना होगा ताकि स्वदेशीकरण को बढावा दिया जा सके व रोजगार सृजन हो. प्लास्टिक मुद्रा से आशय क्रेडिट व डेबिट कार्ड के इस्तेमाल से है. इससे भी कागजी मुद्रा नोटों पर निर्भरता कम होती है.
इस बीच जेटली ने कहा कि हौशंगाबाद व मैसूर में कागज विनिर्माण इकाइयों की स्थापना से घरेलू कागज पर नोटों की छपाई में मदद मिलेगी और मोदी सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढावा मिलेगा. जेटली ने कहा, ‘यह समय है की हम कम से कम अपनी स्याही व अपने कागज में नोट छापना शुरू कर दें. यह मात्र सांकेतिक नहीं बल्कि यह एक विचार प्रक्रिया भी है जो कि भारतीय विनिर्माण को एक तय स्तर पर लाने की इच्छा दिखाती है.’
जेटली ने कहा कि भारत पहले औद्योगिक क्रांति से चूक गया था लेकिन अब कंपनियों को वैश्विक बाजारों के लिए गुणवत्ता वाले उत्पाद प्रतिस्पर्धी कीमत पर उत्पादित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. सरकार की मेक इन इंडिया पहल का उद्देश्य देश को वैश्विक बाजार के लिए वस्तु विनिर्माण का हब बनाना है.
उन्होंने कहा, ‘यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि आप गुणवत्तापरक उत्पाद सस्ते बनाएं. आप केवल हमारे अपने ग्राहकों को ही आपूर्ति नहीं करें. आप अन्य देशों के ग्राहकों को भी आपूर्ति करें.’ उन्होंने कहा कि चीन जैसे बडे देशों ने प्रतिस्पर्धी क्षमता तथा कम लागत वाले विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित कर फायदा उठाया है.जेटली ने कहा, ‘समय हमारे हाथ से निकला जा रहा है, ऐसे में हम विनिर्माण क्षेत्र में धीमी वृद्धि से ही संतोष नहीं कर सकते हैं.’ इसके साथ ही उन्होंने श्रम बल को कृषि क्षेत्र से निकालकर विनिर्माण क्षेत्र में लाने पर भी जोर दिया.
वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने इस अवसर पर कहा कि देश में इस समय 30 अरब बैंक नोट की छपाई होती है. अब घरेलू स्तर पर मुद्रा की छपाई होने पर हमें वैश्विक जरुरतों को पूरा करने का लक्ष्य लेकर आगे बढना चाहिये. उन्होंने कहा कि देश अब नकदी रहित अर्थव्यवस्था की तरफ बढ रहा है ऐसे में रिजर्व बैंक जल्द ही भुगतान बैंकों के लिये लाइसेंस जारी करने जा रहा है.
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