कर-नीति विरोध भाव से मुक्त रखने से बनेगा कारोबार के लिए अनुकूल माहौल : अरुण जेटली
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Apr 2015 1:46 PM
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नयी दिल्ली : वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए देश में कारोबार के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने का वादा करते हुये आज स्पष्ट रुप से कहा कि कोई कर पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा और कर-नीति विरोध भाव पर आधारित नहीं होनी होगी. जेटली ने कहा, हमारी […]
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नयी दिल्ली : वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए देश में कारोबार के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने का वादा करते हुये आज स्पष्ट रुप से कहा कि कोई कर पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा और कर-नीति विरोध भाव पर आधारित नहीं होनी होगी.
जेटली ने कहा, हमारी कर-प्रक्रिया सरल होनी चाहिये, तभी कर वसूली बढेगी. हमे अपनी कर-नीति विरोध भाव से मुक्त रखनी होगी. सरकार का इरादा लोगों पर पिछली तिथि से करारोपण करने का कतई नहीं है. वित्त मंत्री ने यहां डी पी कोहली स्मारक व्याख्यान देते हुये कहा कि देश में कंपनियों पर आयकर का ढांचा वैश्विक दृष्टि से प्रतिस्पर्धी होना चाहिये. यही कारण है कि सरकार ने इस साल के बजट में कारपोरेट कर की दर 30 से घटाकर 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया है.
उन्होंने कहा, फैसले में और शीघ्रता लाने की आवश्यकता है. राजनीतिक आम राय की प्रक्रिया को व्यापक राजनीतिक दृष्टि के साथ और परिपक्व होनी चाहिये. उन्होंने यह भी कहा कि भारत में कृषि और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के समक्ष गंभीर चुनौतियां हैं.
वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि राजमार्गो का निर्माण कार्य धीमा पड चुका है और रेलवे में निवेश नहीं आया है. हमें ढांचागत क्षेत्र में 70,000 करोड रुपये का निवेश करना है, इसीलिए हम राजकोषीय घाटे को सीमित करने में थोडा अधिक समय ले रहे हैं.
गौरतलब है कि सरकार ने राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के तीन प्रतिशत पर सीमित करने के लक्ष्य को एक साल बढाकर 2017-18 कर दिया है. वित्त मंत्री ने पिछले दिनों कहा था कि यह लक्ष्य भी चुनौतीपूर्ण है. साथ ही उन्होंने कहा कि हमें भ्रष्टाचार निरोधक कानून-1988 के कुछ प्रावधानों की समीक्षा करने की जरुरत है. उन्होंने कहा, हमें भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों पर फिर से गौर करने की जरुरत है. उन्होंने इसी संदर्भ में इस बात का जिक्र किया कि संबंधित विभाग और सरकारी अधिकारी फैसले करने से कतराते हैं.
उन्होंने कहा कि भ्रष्ट तरीकों और लोक हित तथा वित्तीय लाभ जैसी शब्दावलियों को नये संदर्भो में फिर से परिभाषित करना होगा, ताकि भ्रष्टाचार और भूल में फर्क किया जा सके.
वित्त मंत्री ने कहा कि मई 2014 से पहले विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर राजनीतिक आम सहमति बनाने की प्रक्रिया छिन्न-भिन्न हो चुकी थी. इससे हमारी निर्णय की प्रक्रिया की विश्वसनीयता खत्म हो गयी और सरकार में अनिर्णय की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी. जेटली ने कहा कि एक कमजोर सरकार और सरकार के बाहर एक सत्ता केंद्र से काम नहीं चला है. जाहिरा तौर पर उनका इशारा पिछली संप्रग सरकार की ओर था.
उन्होंने कहा कि इस समय फैसला करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) पर है क्योंकि 30 साल बाद स्पष्ट जनादेश प्राप्त हुआ है और एक दल अपने बूते बहुमत में आया है.
उन्होंने नई सरकार द्वारा लिये गये फैसलों का जिक्र करते हुये कहा कि रक्षा उत्पादन एवं जमीन जायजाद के विकास कारोबार में विदेशी निवेश बढाने की छूट दी गयी है.
जेटली ने कहा कि सीबीआइ के पास सच्चाई उजागर करने की छठी इंद्री होनी चाहिये और उसके काम में कोई खामी नहीं होनी चाहिये. इस मंच पर उनके अलग-बगल मुख्य सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) बैठे थे.
अरुण जेटली ने कहा, बहुत सी एजेंसियों से गलती हो सकती है. कोई पूर्ण नहीं होता, लेकिन दो संस्थायें, न्यायपालिका और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ऐसे हैं, जिनमें किसी कमी का जोखिम देश नहीं उठा सकता.
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