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कार बाज़ार में नई जंग छेड़ सकती है मारुति की ऑल्टो के10

Updated at : 06 Nov 2014 1:15 PM (IST)
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कार बाज़ार में नई जंग छेड़ सकती है मारुति की ऑल्टो के10

अभी चंद रोज पहले देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति की नए अवतार में लॉन्च हुई ऑल्टो कार को लेकर मारुति ने जोरदार तैयारी कर ली है. कंपनी इसे देश के बाहर भी निर्यात करने की तैयारी कर चुकी है.ऑल्टो के10 के 1000 सीसी के इंजन को मारुति ने ईंधन खपत के मामले […]

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अभी चंद रोज पहले देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति की नए अवतार में लॉन्च हुई ऑल्टो कार को लेकर मारुति ने जोरदार तैयारी कर ली है. कंपनी इसे देश के बाहर भी निर्यात करने की तैयारी कर चुकी है.ऑल्टो के10 के 1000 सीसी के इंजन को मारुति ने ईंधन खपत के मामले में तक़रीबन 15 फीसदी किफायती बनाया है. इसके अलावा मारुति ने देश में ऑटोमेटिक सेक्टर में अब तक की सबसे कम कीमत में ऑल्टो के10 के ऑटोमेटिक संस्करण को भी बाज़ार में उतार दिया है. गौरतलब है कि इसके पहले मारुति ने इस साल की शुरुआत में अपनी एक और ऑटोमेटिक कार सेलेरियो को भी बाज़ार में उतारा था.

आमतौर पर ऑटोमेटिक कारें महंगी होती हैं लेकिन मारुति ने सेलेरियो के ऑटोमेटिक गियर बॉक्स को नए तरीके से बनाकर कीमतों को काफी हद तक किफायती बनाये रखा. लोगों ने भी बाज़ार में कम कीमत पर मिलने वाली ऑटोमेटिक कार सेलेरियो को काफी सराहा लेकिन सेलेरियो की कीमत मध्यम-वर्ग के लोगों के लिए थोड़ी महंगी हो रही थी क्योंकि मारुति ने इसके ऑटोमेटिक संस्करण की न्यूनतम कीमत 4 लाख 14 हज़ार रखी थी लेकिन अब मारुति ने सेलेरियो के गियर बॉक्स को ही नई ऑल्टो के10 में कम कीमत पर उतारा है. ऑल्टो के10 के ऑटोमेटिक संस्करण की कीमत 3 लाख 80 हज़ार रखी है.
यही वो वजह है जिसको लेकर मध्यम वर्ग काफी खुश होगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑटोमेटिक कारों का प्रचालन यूरोप और अमेरिका में सबसे ज्यादा है और इसकी प्रमुख वजह ये है कि वहां महिलाएं भी बड़ी संख्या में ड्राइविंग करती है.
यही सोचकर मारुति ने पहले भी देश में अपने जेन मॉडल की ऑटोमेटिक कार उतारी थी लेकिन तक़रीबन एक दशक पहले किये गए इस प्रयोग में मारुति असफल रही थी. वक़्त बदल चुका है और बदले हुए दौर में अब भारत में भी महिलाओं में खुद कार चलाने को लेकर जागरूकता बढ़ी है. ऐसे में मारुति की ये सबसे कम कीमत की ऑटोमेटिक कार निश्चित रूप से महिलाओं और बुजुर्गों के लिए बड़ी खुशखबरी हो सकती है.
अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के मुताबिक, दुनिया भर में महिलाओं और बुजुर्गों को गाड़ी चलाने में सबसे ज्यादा परेशानी गियर बदलने को लेकर होती है और यही कारण है कि महिलाओं और बुजुर्गों से ज्यादा भीड़-भाड़ या तंग रास्तों में दुर्घटना होने का आंकड़ा भी ज्यादा होता है. भारत में भी ये बात सामने आई है कि गाड़ियों में मैन्युअल गियर होने की वजह से यहां महिलाएं और बुजुर्ग कार चलाने को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं होते और जो महिलाएं कार चलती हैं, वो भी भीड़-भाड़ में बार-बार गियर बदलने और क्लच दबाने को लेकर परेशान और डरी रहती हैं.
ऐसे में दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है. असल में, ड्राइविंग एक ऐसी चीज मानी जाती है जिसमें चालक के अन्दर आत्म-विश्वास और सतर्कता की कमी ही मुख्य रूप से हादसों का कारण होती है.
लेकिन अब ऐसा लगता है कि इतने कम बजट में पूरी तरह से ऑटोमेटिक संस्करण के साथ लैस ऑल्टो के10 जैसी एक परिपूर्ण कार को बाज़ार में उतारकर मारुति ने ऑटोमेटिक कारों के मैदान में नयी जंग छेड़ने का काम किया है.
ऐसी खबरें आ रही हैं कि बाज़ार में ऑटोमेटिक कारों का बड़ा बाज़ार है और इस बाज़ार के हिस्से पर मारुति के खूंटा गाड़ने के बाद बाकी कम्पनियां भी सस्ती ऑटोमेटिक कारें बाज़ार में उतरने को मजबूर होंगी, जिसका प्रत्यक्ष लाभ यहां के उपभोक्ताओं को मिलने वाला है. यानि आने वाले समय में भारत में कार खरीदने को उतावले मध्यम वर्ग की चांदी ही चांदी होने वाली है. तभी तो टाटा ने भी अपनी ड्रीम कार नैनो को नए कलेवर में उतारने की तैयारी कर ली है. खबरों के मुताबिक टाटा अपनी नैनो कार के बाज़ार में पिट जाने से बहुत निराश थी और यही वजह है कि अब टाटा की नैनो में भी ऑटोमेटिक गियर के साथ-साथ कार की डिक्की यानि बूट स्पेस को भी खोलने वाला दरवाजा लगाया जा रहा है. इसके अलावा ह्युंदै और होंडा भी ऑटोमेटिक कारों के मैदान में उतरने को अपनी-अपनी तैयारियां कर रही हैं.
इन सबके बीच बढ़त बनाने के लिए मारुति ने अपनी नई ऑल्टो के10 कार को अफ्रीका, लैटिन अमेरिका एवं पश्चिम यूरोप के बाजारों में निर्यात करने का फैसला कर लिया है. इसमें कोई शक नहीं कि अब तक देश में ऑल्टो के 25 लाख से ज्यादा मॉडल बेच चुकी मारुति ऑटोमेटिक कारों के इस हिस्से पर भी अपनी बढ़त बनाये रखना चाहेगी और ऐसे में अर्थशास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार इसका अंतिम लाभ ग्राहक को मिलना तय है और भारत जैसे देश में मध्यम वर्ग के लोगों के लिए कार बाज़ार की ये प्रतिस्पर्धा किसी वरदान से कम साबित नहीं होगी.
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