खरीफ की पैदावार होगी कम, किसानों को फायदा ज्यादा

Updated at : 30 Aug 2019 5:16 PM (IST)
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खरीफ की पैदावार होगी कम, किसानों को फायदा ज्यादा

नयी दिल्ली : लगातार तीन साल तक बंपर फसल के बाद इस बार खरीफ की पैदावार में 5 फीसदी तक की कमी आयेगी. लेकिन, किसानों को नुकसान नहीं होगा. उन्हें 10-12 फीसदी तक फायदा होगा. क्रिसिल (CRISIL) की एक रिपोर्ट में यह बात कही गयी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि उत्पादों की […]

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नयी दिल्ली : लगातार तीन साल तक बंपर फसल के बाद इस बार खरीफ की पैदावार में 5 फीसदी तक की कमी आयेगी. लेकिन, किसानों को नुकसान नहीं होगा. उन्हें 10-12 फीसदी तक फायदा होगा. क्रिसिल (CRISIL) की एक रिपोर्ट में यह बात कही गयी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि उत्पादों की कीमतों में वृद्धि की वजह से किसानों को फायदा होने की उम्मीद है.

क्रिसिल के मुताबिक, मॉनसून की बारिश में देरी की वजह से इस साल 22 अगस्त तक धान की बुवाई का रकबा 6.4 फीसदी कम रहा. हालांकि, कपास और सोय के निर्यात और सोयाबीन, मक्का और जूट की घरेलू मांग से खरीफ फसलों का उचित मूल्य मिलेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, खरीफ की पैदावार में 3-5 फीसदी की कमी से इसकी कीमतें बढ़ेंगी और इसका लाभ किसानों को मिलेगा.

पिछले तीन साल से लगातार खरीफ की पैदावार में वृद्धि हो रही थी. वर्ष 2016 में 1650.2 लाख टन, वर्ष 2017 में 1681 लाख टन और वर्ष 2018 में रिकॉर्ड 1707 लाख टन की पैदावार हुई. इस वर्ष मॉनसून की देरी और बाद में बाढ़ की वजह से खेती प्रभावित हुई. महाराष्ट्र, ओड़िशा और आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों में धान की खेती प्रभावित हुई.

क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी का कहना है कि दक्षिणी-पश्चिमी मॉनसून के कारण कुछ क्षेत्रों में अगस्त में हुई भारी बारिश ने खरीफ खासकर धान की खेती को प्रभावित किया. उन्होंने यह भी कहा कि मॉनसून की अच्छी बारिश की वजह से रबी की फसल अच्छी होगी, क्योंकि भू-गर्भ जलस्तर में सुधार हुआ है और जलागारों में जल भंडार बढ़ा है.

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि 29 अगस्त तक पूरे भारत में 696.9 मिमी बारिश हुई है, जो एक जून से 29 अगस्त इस दौरान होने वाली बारिश के लगभग बराबर ही है. पश्चिमोत्तर भारत में सबसे कम बारिश हुई है. हरियाणा में 34 फीसदी, दिल्ली में 31 फीसदी और उत्तराखंड में 26 फीसदी कम बारिश हुई है. वहीं, उत्तर प्रदेश में सामान्य से 18 फीसदी कम बारिश हुई है.

क्रिसिल रिसर्च की निदेशक हेतल गाधी कहती हैं कि क्षेत्रीय स्तर पर बात करें, तो उत्तर भारत के किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि वे सिर्फ एक फसल की खेती नहीं करते. वे पूरी तरह वर्षा पर ही निर्भर नहीं होते. वहीं, गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान में बाजरा, कपास और सोयाबीन की खेती अच्छा मुनाफा देगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि गन्ने की कीमतों में नरमी और मध्य महाराष्ट्र में बारिश से फसलों को हुए नुकसान से महाराष्ट्र के किसानों का मुनाफा डूब सकता है.

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