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RBI का अगले वित्त वर्ष 2019-20 में आर्थिक वृद्धि 7.4 फीसदी रहने का अनुमान

Updated at : 07 Feb 2019 3:51 PM (IST)
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RBI का अगले वित्त वर्ष 2019-20 में आर्थिक वृद्धि 7.4 फीसदी रहने का अनुमान

मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को अगले वित्त वर्ष में देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. यह केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के चालू वित्त वर्ष के 7.2 फीसदी के अनुमान से अधिक है. आरबीआई की तीन दिन चली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की […]

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मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को अगले वित्त वर्ष में देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. यह केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के चालू वित्त वर्ष के 7.2 फीसदी के अनुमान से अधिक है. आरबीआई की तीन दिन चली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद जारी दस्तावेज में ये आंकड़े दिये गये हैं.

इसे भी पढ़ें : RBI का अनुमान : 2018-19 में 7.4 फीसदी रहेगी जीडीपी ग्रोथ

इसमें कहा गया है कि बैंक ऋण बढ़ने और वाणिज्यिक क्षेत्र को सकल वित्तीय प्रवाह बढ़ने का सकल घरेलू उत्पादन पर अनुकूल असर पड़ सकता है, लेकिन वैश्विक स्तर पर मांग सुस्त पड़ने का इस पर प्रतिकूल असर हो सकता है. आबीआई ने दिसंबर में जारी मौद्रिक नीति समीक्षा में 2018-19 में जीडीपी वृद्धि दर 7.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया था. उसने दूसरी छमाही के लिए यह अनुमान 7.2 फीसदी से 7.3 फीसदी रखा था.

हालांकि, बैंक ने 2019-20 की पहली छमाही के लिए वृद्धि का अनुमान 7.5 फीसदी रखा था. हालांकि, सीएसओ ने 2018-19 के लिए जीडीपी वृद्धि दर अनुमान 7.2 फीसदी रखा है. एमपीसी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष से आगे देखें, तो कुल बैंक कर्ज, वाणिज्य क्षेत्रों में होने वाले कुल वित्तीय प्रवाह का वृद्धि परिदृश्य पर प्रभाव रहेगा.

दस्तावेज के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने और शुद्ध निर्यात के चलते रुपये में आयी हालिया गिरावट का प्रभाव कम होने के बावजूद वैश्विक मांग के कमजोर रुख से वृद्धि दर प्रभावित हो सकती है. रिजर्व बैंक के गवर्नर और एमपीसी के सदस्य शक्तिकांत दास ने कहा कि वृद्धि के लिए जोखिम समान तौर पर संतुलित हैं.

दास की अध्यक्षता वाली एमपीसी ने कहा कि निवेश गतिविधियां सुधर रही हैं, लेकिन इसे अधिकतर सहयोग बुनियादी विकास पर सरकारी खर्च से मिल रहा है. हमें निजी निवेश को भी मजबूत बनाने की जरूरत है.

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