NITI Ayog की न्यायपालिका से अपील, वाणिज्यिक मामलों का किया जाये त्वरित निपटान

Updated at : 25 Oct 2018 6:20 PM (IST)
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NITI Ayog की न्यायपालिका से अपील, वाणिज्यिक मामलों का किया जाये त्वरित निपटान

मुंबई : नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने गुरुवार को न्यायपालिका से वाणिज्यिक मामलों का त्वरित निपटान तय करने की अपील की है, ताकि अनुबंध लागू करने के मामले में भारत की रैंकिंग में सुधार लाया जा सके. हालांकि, भारत की कारोबार सुगमता रैंकिंग में पिछले दिनों काफी सुधार आया है. […]

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मुंबई : नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने गुरुवार को न्यायपालिका से वाणिज्यिक मामलों का त्वरित निपटान तय करने की अपील की है, ताकि अनुबंध लागू करने के मामले में भारत की रैंकिंग में सुधार लाया जा सके. हालांकि, भारत की कारोबार सुगमता रैंकिंग में पिछले दिनों काफी सुधार आया है. ‘द इकोनॉमिस्ट इंडिया समिट’ में कांत ने पूरी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए निचली अदालतों में वाणिज्यिक अदालतें स्थापित करने की जरूरत को भी रेखांकित किया.

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उन्होंने कहा कि हमने कई क्षेत्रों में लंबी छलांग लगायी है. केवल एक जगह हैं, जहां हमने अधिक तरक्की नहीं की और वह है अनुबंधों को लागू करने का मामला. मूल रूप से इस कारण देश में वाणिज्यिक अदालतों की कमी होना है. वह सम्मेलन में भाग ले रहे एक प्रतिभागी के सवाल का जवाब दे रहे थे. उसने विश्वबैंक रिपोर्ट का हावाला देते हुए पूछा था कि अनुबंधों को लागू करने में 190 देशों की सूची में भारत 164वें स्थान पर है.

उन्होंने कहा कि जब आप कारोबार सुगमता पर काम कर रहे हैं, तो राज्य और केंद्र सरकार के साथ न्यायपालिका को मिलकर आगे बढ़ने की जरूरत है. केंद्र तथा राज्यों ने इस दिशा में प्रयास किये हैं. अब वाणिज्यिक अदालतें स्थापित किये जाने की जरूरत है. कांत ने आगे कहा कि वाणिज्यिक मामलों का त्वरित निपटान तय करने के लिए न्यापालिका को भी कदम उठाने की जरूरत है.

कारोबार सुगमता में देश की रैंकिंग में सुधार के बारे में उन्होंने कहा कि देश कारोबार करने के लिए एक आसान और सुगम स्थल बना है. इसका एक प्रमुख कारण डिजिटलीकरण पर काफी संसाधन लगाना है. पिछले साल विश्वबैंक की सालाना कारोबार सुगमता रिपोर्ट में भारत 30 स्थानों की छलांग लगाते हुए 100वें स्थान पर आ गया. इस साल की रैंकिंग रिपोर्ट 31 अक्टूबर को जारी की जायेगी.

कांत ने कहा कि पिछले तीन साल में कई पुराने कायदे- नियमों को समाप्त कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि हमने पिछले तीन से चार साल में करीब 1,200 कानून को रद्द किया है. हमने हर चीज का डिजिटलीकरण किया है, ताकि मानवीय हस्तक्षेप कम-से-कम हो.

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