वोडाफोन-आइडिया के विलय प्रस्ताव पर फैसला कल, मर्जर की ये होंगी शर्तें

Updated at : 17 Jun 2018 10:43 AM (IST)
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वोडाफोन-आइडिया के विलय प्रस्ताव पर फैसला कल, मर्जर की ये होंगी शर्तें

नयी दिल्ली: दूरसंचार विभाग वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर की विलय योजना कोसोमवारको मंजूरी दे सकता है. विलय के बाद कंपनी का नाम वोडाफोन आइडिया लिमिटेड होगा और मौजूदा ग्राहक संख्या के हिसाब से यह देश की सबसे बड़ी मोबाइल दूरसंचार सेवा कंपनी हो जायेगी. एक आधिकारिक सूत्र ने यह जानकारी दी. दोनों कंपनियों के […]

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नयी दिल्ली: दूरसंचार विभाग वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर की विलय योजना कोसोमवारको मंजूरी दे सकता है. विलय के बाद कंपनी का नाम वोडाफोन आइडिया लिमिटेड होगा और मौजूदा ग्राहक संख्या के हिसाब से यह देश की सबसे बड़ी मोबाइल दूरसंचार सेवा कंपनी हो जायेगी. एक आधिकारिक सूत्र ने यह जानकारी दी.

दोनों कंपनियों के विलय के बाद आज के हिसाब से नयी कंपनी की संयुक्त आय 23 अरब डाॅलर (1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक) होगी और उसके ग्राहकों का आधार 43 करोड़ होगा. इस तरह यह देश की सबसे बड़ी कंपनी बन जायेगी. इस बढ़ी हुई ताकत से दोनों कंपनियों को बाजार प्रतिस्पर्धा से निबटने में काफी मदद मिलने की उम्मीद है.

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रिलायंस जियो के बाजार में प्रवेश के बाद टेलीकॉम बाजार आकर्षक पैकेज देकर ग्राहकों को तोड़ने-जोड़ने की जबरदस्त प्रतिस्पर्धा के दौर से गुजर रहा है. इससे मोबाइल इंटरनेट और कॉल सेवाओं की दरें काफी कम हो गयी हैं. विलय में जा रही इन दोनों कंपनियों पर इस समय कर्ज का संयुक्त बोझ 1.15 लाख करोड़ रुपये के करीब बताया जा रहा है.

सूत्र ने कहा कि विलय योजना की मंजूरी के लिए विभाग आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी आइडिया सेल्युलर से बैंक गारंटी लेगा. इसके अलावा कंपनी को यह भी भरोसा देना होगा कि ब्रिटेन के वोडाफोन समूह की कंपनी वोडाफोन इंडिया पर आगे भी कोई देनदारी निकलती है, तो उसकी जिम्मेदारी आइडिया को पूरी करनी होगी.

विलय से जुड़ी खास बातें

-दूरसंचार विभाग आइडिया सेल्युलर के स्पेक्ट्रम के एकबारगी शुल्क के लिए 2100 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी मांग सकता है.

-कंपनियों को यह भरोसा भी देना होगा कि वह अदालती आदेश के अनुसार स्पेक्ट्रम संबंधी सभी बकायों का निपटान करेगी.

-स्पेक्ट्रम शुल्क टुकड़ों में भुगतान के लिए वोडाफोन इंडिया की एक साल की बैंक गारंटी की जिम्मेदारी आइडिया को लेनी होगी.

-विलय के बाद नयी कंपनी में वोडाफोन की हिस्सेदारी 45.1 प्रतिशत और कुमारमंगलम बिड़ला के नेतृत्व वाले आदित्य बिड़ला समूह की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत तथा आइडिया के शेयरधारकों की हिस्सेदारी 28.9 प्रतिशत होगी.

-कुमारमंगलम बिड़ला नयी कंपनी के गैर कार्यकारी चेयरमैन होंगे और बालेश शर्मा को कंपनी का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) बनाया जा सकता है.

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