ePaper

बिहार: बेलाउर के सूर्य मंदिर में छठ पर बड़ी संख्या में आते है श्रद्धालु, सिक्का वापस करने की है अद्‌भुत परंपरा

Updated at : 01 Nov 2023 3:54 PM (IST)
विज्ञापन
बिहार: बेलाउर के सूर्य मंदिर में छठ पर बड़ी संख्या में आते है श्रद्धालु, सिक्का वापस करने की है अद्‌भुत परंपरा

Chhath Puja 2023: बिहार के आरा में स्थित एक मंदिर में दूर- दूर से लोग भगवान के दर्शन के लिए आते है. इस मंदिर की काफी खास मान्यता भी है. दरअसल, श्रद्धालुओं को यहां मनोकामना सिक्का दिया जाता है.

विज्ञापन
undefined

बिहार के भोजपुर जिले में बेलाउर सूर्य मंदिर स्थित है. यहां छठ में व्रतियों की भारी भीड़ उमड़ती है. प्रसिद्ध सूर्य मंदिर में हर साल छठ के मौके पर बिहार सहित पूरे उत्तर भारत से हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है.

undefined

उदवंतनगर प्रखंड के बेलाउर स्थित सूर्य मंदिर की प्रसिद्धि पूरे क्षेत्र में है. भोजपुर मुख्यालय से 20 किलोमीटर उदवंतनगर प्रखंड दूर अवस्थित बेलाउर गांव स्थित मोनिया बाबा सूर्य मंदिर की बड़ी महिमा है.

undefined

इस मंदिर कि सबसे खासियत बात है कि यह कई एकड़ बना तालाब के बीचों- बीच स्थापित है, जो मंदिर की सुंदरता को बढ़ा देता है. इस मंदिर कि ऐसी मान्यता है कि यहां जो भी व्रती आते हैं, वह खाली हाथ नहीं लौटते हैं.

undefined

भगवान भास्कर के मंदिर में अब यूपी, बिहार, झारखंड जैसे राज्यों से नहीं बल्कि दूसरे राज्यों से भी भागवान सूर्य की पूजा करने के लिए व्रती आते हैं. ऐसे तो सालों भर श्रद्धालुओं का जमावड़ा यहां लगता है, पर हर रविवार के दिन इस मंदिर में खास तरह का मेला भी लगता है. साथ ही लग्न के दिन में दूर दूर से शादी- विवाह के लिए भी लोग यहां आते हैं.

undefined

इस मंदिर में साल में चैती व कार्तिक मास में होने वाले लोक आस्था पर्व के छठ को करने लेकर लाखों कि संख्या में लोग जुटते हैं. मंदिर में व्रतियों के भीड़ पर्व के दूसरे दिन लोहर से ही जुटने लगती है. सबसे खास बात यह है कि मंदिर कमिटी के सदस्य व्रतियों के सुविधा के लिए जी जान से जुटे रहते हैं. प्रशासन का भी भरपूर सहयोग रहता है.

undefined

इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालु मंदिर के पुजारी से मनोकामना सिक्का लेने को जुटते हैं. क्योंकि सिक्का लेने पर मनोकामना जरूर पूर्ण होता है. मनोकामना पूरा होने पर सिक्का को लौटा जाते है. यहां के पुजारी पुरोशतम जी बताते हैं कि हम लोग स्वेक्षा से इस मंदिर में सेवा करते हैं. क्योंकि इस मंदिर में सेवा करने से हमारे कई परिवार आज सुखमय जीवन बसर कर रहे हैं. हमारे कई पीढ़ी से लोग इस मंदिर में पुजारी बन पूजा अर्चना करते आ रहे हैं. इस मंदिर का गेट पूजा पाठ के लिए दो बार खुलता है, पहला सुबह चार बजे से बारह बजे तक दूसरा संध्या चार बजे रात आठ बजे तक यहां पर प्रसाद के रूप में दूध व लावा चढ़ाया जाता है.

undefined

बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1949 में हुआ था. कहा जाता है कि गांव में एक बार भीषण सूखा पड़ा था. इसी दौरान इस तलाब व मंदिर का निर्माण राजा बावन सुब्वा ने कराया था.

undefined

गांव के लोगों का कहना है कि इस मंदिर के मूर्ति का निर्माण आगरा के ताजमहल से बने सकरना पत्थर से किया गया है.

विज्ञापन
Sakshi Shiva

लेखक के बारे में

By Sakshi Shiva

Worked as Anchor/Producer from March 2022 to January 2023 at DTV Bharat TV channel. Have worked with Sixth Sense weekly newspaper from August 2021 to January 2022. Have done 21 days internship at Clinqon India as a Social media intern. Post Graduated in Journalism and Mass Communication from Central University of South Bihar, Gaya. Graduated in English from Purnea Mahila College, Purnea.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन