क्या Honda ZR-V है आपके लिए सही हाइब्रिड SUV? जानें इसके 3 फायदे और 3 नुकसान

Honda ZR-V Hybrid Car (Image: Honda)
जापानी कार निर्माता नई होंडा ZR-V हाइब्रिड भारत में लॉन्च हो चुकी है, जिसकी शुरुआती कीमत 47.99 लाख रुपये है. यह पूरी तरह से इंपोर्टेड CBU मॉडल है, जो Volkswagen Tayron, Jeep Meridian जैसी कारों को टक्कर देगा. यदि आप इस हाइब्रिड कार को खरीदने की सोच रहे हैं, तो इसके 3 फायदे और 3 नुकसान जानना जरूरी है.
होंडा ने ZR-V हाइब्रिड को लॉन्च कर दिया है, जो जापानी कार निर्माता कंपनी की इंडियन मार्केट के लिए नई पेशकश है. इसकी शुरुआती कीमत 47.99 लाख रुपये तक की गई है. ZR-V को इंडिया में पूरी तरह से इंपोर्टेड CBU मॉडल के रूप में बेचा जाएगा और इसकी Folkswagen Tyron, Jeep Meredian और Skoda Kodiaq जैसी कारों को टक्कर होगी. यदि आपका भी मन इस हाइब्रिड कार की ओर जा रहा है, तो उससे पहले इसके 3 फायदे और 3 नुकसान के बारे में पहले जान लीजिए. उसके बाद आपके लिए इस अपकमिंग कार को सेलेक्ट करना थोड़ा आसान हो सकता है.
खरीदने के 3 फायदे
दमदार और रिफाइंड इंजन
ZR-V में नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल हाइब्रिड इंजन लगाया गया है, जो 184 हॉर्स पावर और 315 nm का टॉर्क जेनरेट करता है. यह पावर ई-सीविटी के जरिए फ्रंट व्हील्स तक पहुंचती है. ऑटो कार इंडिया के अनुसार, यह गाड़ी शुरुआत से ही अपना पावर का इस्तेमाल करती है, जिससे यह काफी फुर्तीली लगती है. पावर इसके पहियों तक सही तरीके से पहुंचती है थ्रॉटल दबाने पर अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है. इसका परफॉर्मेंस काफी जबरदस्त है. बैटरी में पर्याप्त चार्ज होने पर ZR-V लो-स्पीड पर पूरी तरह से इलेक्ट्रिक मोड पर भी चल सकती है.
शानदार हैंडलिंग
अपने ऊंचे ग्रैविटी और फ्रंट व्हील ड्राइव लेआउट के बावजूद बुद्ध इंटरनेश्नल सर्किट पर इसे ड्राइव करना एक्टिव और आरामदायक अनुभव देता है. इसके अलावा संतुलित और सटीक स्टियरिंग रैक ने कोनों पर स्थिर और अनुमानित संचालन इसकी खासियत है. ZR-V ने स्लैलम कोर्स पर भी जबरदस्त परफॉर्मेंस करने में सक्षम है. ड्राइविंग के दौरान इसका बॉडी कंट्रोल बेहतर है.
शानदार इंटीरियर और एर्गोनॉमिक्स
ऑटो कार इंडिया के अनुसार ZR-V के अंदर बेहतरीन ढंग से डिजाइन किया गया डैशबोर्ड मिलता है, जिसमें काफी सारी सॉफ्ट-टच मैटेरियल और प्रीमियम फीलिंग देने वाले ट्रिम पार्ट्स दिए गए हैं. इसमें 10.25 का डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले लगाया हुआ है, जो देखने में काफी अट्रैक्टिव लगता है. फ्रंट की सीटें बेहतर और गद्देदार हैं. इसके अलावा डैशबोर्ड के नीचे से देखने पर बेहतर व्यू दिखता है. इसमें पर्याप्त स्टोरेज भी है. छोटे स्टोरेज कम्पार्टमेंट के साथ ब्रिज टाइप ट्रांसमिशन टनल शामिल है.
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खरीदने के 3 नुकसान
कुछ जरूरी फीचर्स नहीं
अपने कंपटिटर्स की तुलना में कम तकनीक सुविधाओं से लैस होने का एक नुकसान यह है कि ZR-V कई ऐसी सुविधाईं की कमी है जिनकी इस कीमत पर खरीदार उम्मीद कर सकते हैं. ZR-V में 9 इंच का इंफोटेनमेंट टचस्क्रीन है, जो चमकदार है और पूरी तरह से काम करता है, लेकिन सेगमेंट के मानकों के हिसाब से काफी छोटा है. यहां तक कि काफी सस्ती होंडा सिटी में भी इससे बड़ा 10.1 इंच का टचस्क्रीन है.
रियर सीटें कम आरामदायक
ZR-V की निचली पीछे वाली सीटों पर बैठना आसान है, लेकिन आपको घुटने को ऊपर करके बैठना होगा. ऐसे में आप लंबे समय तक एक जैसा बैठ नहीं सकते हैं. तेज धूप से बचाव के लिए कोई सनसेट नहीं है. इसके अलावा ढलान वाली रूफ 6 फिट से ज्यादा लंबे लोगों के लिए हेडस्पेस को लिमिट कर देती है.
ज्यादा महंगी
ZR-V की बिक्री CBU के रूप में होगी, इसलिए इसकी कीमत 47.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है. इस कीमत पर कई कमियों के साथ, इसे बेचना मुश्किल हो सकता है, खासकर तब जब Tayron, Kodiaq और Meridian जैसी प्रतिद्वंद्वी कारें बड़ी, अधिक सुविधाओं से लैस हैं. इस रेंज में 7-सीटर विकल्प में भी उपलब्ध हैं.
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By शिवांश शेखर
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शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.
विस्तृत बायो
शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं.
उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.
पढ़ाई
बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.
काम का सफर
पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.
विजन
शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.
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